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रायपुर में अवैध खैर लकड़ी का बड़ा भंडाफोड़, दो ट्रक से ज्यादा माल जब्त; तस्करी नेटवर्क की जांच तेज
रायपुर,(छ.ग.)
वन विभाग की छापेमारी में गोदाम सील, हरियाणा भेजी जानी थी लकड़ी; पुराने मामलों से भी जुड़े मिले तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वन विभाग ने अवैध खैर लकड़ी की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ट्रक से अधिक खैर की लकड़ी जब्त की है। विभाग ने शहर के एक गोदाम पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में लकड़ी बरामद की और गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह लकड़ी हरियाणा भेजी जाने की तैयारी में थी। वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लकड़ी कहां से लाई गई, किन लोगों की इसमें भूमिका है और इसका अंतिम गंतव्य क्या था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खैर की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से कत्था तैयार करने में किया जाता है। पान उद्योग के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी कत्थे की मांग रहती है। यही वजह है कि खैर की लकड़ी की तस्करी लंबे समय से वन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। विभाग का मानना है कि अवैध कटाई और तस्करी के कारण वन संपदा को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।
यह कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में विशेष अभियान के तहत की गई। संयुक्त कार्रवाई में राज्य उड़नदस्ता, रायपुर वन परिक्षेत्र और अन्य अधिकारियों की टीम शामिल रही। अधिकारियों ने गोदाम में रखी लकड़ी का निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की। संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पूरी खेप जब्त कर ली गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब्त की गई लकड़ी को हरियाणा भेजने की तैयारी चल रही थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लकड़ी किस वन क्षेत्र से काटी गई थी और इसे किस माध्यम से रायपुर तक पहुंचाया गया। वन विभाग ने परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केवल लकड़ी की जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच की जाएगी और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर कई राज्यों तक फैला नेटवर्क सक्रिय रहता है, इसलिए जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस कार्रवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वन विभाग के अनुसार, जिस व्यक्ति का नाम इस मामले में सामने आया है, उससे जुड़े एक ट्रक को करीब पांच वर्ष पहले भी अवैध खैर लकड़ी के साथ पकड़ा गया था। उस समय संबंधित वाहन को राजसात कर लिया गया था और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया था। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि अवैध लकड़ी कारोबार में कुछ लोग लगातार सक्रिय हैं और पुराने मामलों के बावजूद अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
वन विभाग ने यह भी जानकारी दी कि संबंधित व्यक्ति का नाम पहले वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों में भी सामने आ चुका है। इनमें तेंदुए की खाल के अवैध व्यापार से जुड़े आरोप शामिल रहे हैं। हालांकि इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चली है और संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की गई थी। वर्तमान मामले में विभाग इन पुराने रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बना रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं अवैध वन संपदा और वन्यजीव तस्करी से जुड़े नेटवर्क आपस में जुड़े तो नहीं हैं। खैर के पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी अनियंत्रित कटाई से जंगलों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है। यही कारण है कि खैर की लकड़ी के परिवहन और व्यापार के लिए कानूनी अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध दस्तावेजों के लकड़ी का परिवहन वन कानूनों का उल्लंघन माना जाता है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में अवैध लकड़ी की कटाई और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर भी लोगों से अपील कर रहा है कि यदि कहीं अवैध कटाई या लकड़ी के परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
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रायपुर में अवैध खैर लकड़ी का बड़ा भंडाफोड़, दो ट्रक से ज्यादा माल जब्त; तस्करी नेटवर्क की जांच तेज
रायपुर,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वन विभाग ने अवैध खैर लकड़ी की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ट्रक से अधिक खैर की लकड़ी जब्त की है। विभाग ने शहर के एक गोदाम पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में लकड़ी बरामद की और गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह लकड़ी हरियाणा भेजी जाने की तैयारी में थी। वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लकड़ी कहां से लाई गई, किन लोगों की इसमें भूमिका है और इसका अंतिम गंतव्य क्या था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खैर की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से कत्था तैयार करने में किया जाता है। पान उद्योग के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी कत्थे की मांग रहती है। यही वजह है कि खैर की लकड़ी की तस्करी लंबे समय से वन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। विभाग का मानना है कि अवैध कटाई और तस्करी के कारण वन संपदा को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।
यह कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में विशेष अभियान के तहत की गई। संयुक्त कार्रवाई में राज्य उड़नदस्ता, रायपुर वन परिक्षेत्र और अन्य अधिकारियों की टीम शामिल रही। अधिकारियों ने गोदाम में रखी लकड़ी का निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की। संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पूरी खेप जब्त कर ली गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब्त की गई लकड़ी को हरियाणा भेजने की तैयारी चल रही थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लकड़ी किस वन क्षेत्र से काटी गई थी और इसे किस माध्यम से रायपुर तक पहुंचाया गया। वन विभाग ने परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केवल लकड़ी की जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच की जाएगी और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर कई राज्यों तक फैला नेटवर्क सक्रिय रहता है, इसलिए जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस कार्रवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वन विभाग के अनुसार, जिस व्यक्ति का नाम इस मामले में सामने आया है, उससे जुड़े एक ट्रक को करीब पांच वर्ष पहले भी अवैध खैर लकड़ी के साथ पकड़ा गया था। उस समय संबंधित वाहन को राजसात कर लिया गया था और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया था। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि अवैध लकड़ी कारोबार में कुछ लोग लगातार सक्रिय हैं और पुराने मामलों के बावजूद अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
वन विभाग ने यह भी जानकारी दी कि संबंधित व्यक्ति का नाम पहले वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों में भी सामने आ चुका है। इनमें तेंदुए की खाल के अवैध व्यापार से जुड़े आरोप शामिल रहे हैं। हालांकि इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चली है और संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की गई थी। वर्तमान मामले में विभाग इन पुराने रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बना रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं अवैध वन संपदा और वन्यजीव तस्करी से जुड़े नेटवर्क आपस में जुड़े तो नहीं हैं। खैर के पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनकी अनियंत्रित कटाई से जंगलों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है। यही कारण है कि खैर की लकड़ी के परिवहन और व्यापार के लिए कानूनी अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध दस्तावेजों के लकड़ी का परिवहन वन कानूनों का उल्लंघन माना जाता है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में अवैध लकड़ी की कटाई और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर भी लोगों से अपील कर रहा है कि यदि कहीं अवैध कटाई या लकड़ी के परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
