- Hindi News
- धर्म
- कल से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का धार्मिक महत...
कल से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का धार्मिक महत्व
धर्म डेस्क
मां दुर्गा की गुप्त उपासना का विशेष पर्व, साधना, मंत्र जाप और कलश स्थापना से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन वर्ष में आने वाली गुप्त नवरात्रि को साधना, तप और देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ और माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, शक्ति आराधना और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व मानी जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की गुप्त रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल से हो रहा है। भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां भगवती की आराधना करेंगे। मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी घटस्थापना कर अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में देवी पूजा, मंत्र जाप, यज्ञ, हवन और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है।
घटस्थापना का महत्व
गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है। कलश को सुख-समृद्धि, शुभता और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
घटस्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ कर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाया जाता है। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और पंचरत्न डालने की परंपरा भी है। कलश के ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित किया जाता है और फिर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि में कैसे करें देवी पूजा
गुप्त नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और मां दुर्गा का ध्यान करें। इसके बाद रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यदि संभव हो तो पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं। मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप भी इस अवधि में विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार एक समय भोजन या फलाहार कर सकते हैं।
नौ दिनों का धार्मिक महत्व
गुप्त नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी शक्ति के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।
धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी के प्रत्येक स्वरूप की आराधना करने से जीवन के विभिन्न कष्ट दूर होते हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
साधना और मंत्र जाप का विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से साधकों और तांत्रिक उपासकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि सामान्य श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं। इस दौरान किए गए मंत्र जाप, हवन और ध्यान को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। कई लोग इस अवधि में अपने इष्ट देवी-देवता की विशेष साधना भी करते हैं।
व्रत रखने वाले रखें इन बातों का ध्यान
गुप्त नवरात्रि में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक माना गया है। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है।
व्रत के दौरान फल, दूध, मखाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, साबूदाना और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
घर में ऐसे बनाएं सकारात्मक वातावरण
नवरात्रि के दौरान घर की नियमित साफ-सफाई करें और पूजा स्थान को विशेष रूप से स्वच्छ रखें। सुबह और शाम दीपक जलाकर आरती करें। घर में देवी भजन, मंत्र और धार्मिक वातावरण बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। परिवार के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
कन्या पूजन का महत्व
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन, फल, मिठाई और उपहार देकर सम्मानित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे मां दुर्गा प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष पर्व
गुप्त नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर है। इन नौ दिनों में व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक शांति प्राप्त करने का प्रयास करता है। श्रद्धा, अनुशासन और विधि-विधान से की गई देवी आराधना जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
कल से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का धार्मिक महत्व
धर्म डेस्क
सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन वर्ष में आने वाली गुप्त नवरात्रि को साधना, तप और देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ और माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, शक्ति आराधना और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व मानी जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की गुप्त रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल से हो रहा है। भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां भगवती की आराधना करेंगे। मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी घटस्थापना कर अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में देवी पूजा, मंत्र जाप, यज्ञ, हवन और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है।
घटस्थापना का महत्व
गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है। कलश को सुख-समृद्धि, शुभता और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
घटस्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ कर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाया जाता है। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और पंचरत्न डालने की परंपरा भी है। कलश के ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित किया जाता है और फिर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि में कैसे करें देवी पूजा
गुप्त नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और मां दुर्गा का ध्यान करें। इसके बाद रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यदि संभव हो तो पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं। मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप भी इस अवधि में विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार एक समय भोजन या फलाहार कर सकते हैं।
नौ दिनों का धार्मिक महत्व
गुप्त नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी शक्ति के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।
धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी के प्रत्येक स्वरूप की आराधना करने से जीवन के विभिन्न कष्ट दूर होते हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
साधना और मंत्र जाप का विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से साधकों और तांत्रिक उपासकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि सामान्य श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं। इस दौरान किए गए मंत्र जाप, हवन और ध्यान को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। कई लोग इस अवधि में अपने इष्ट देवी-देवता की विशेष साधना भी करते हैं।
व्रत रखने वाले रखें इन बातों का ध्यान
गुप्त नवरात्रि में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक माना गया है। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है।
व्रत के दौरान फल, दूध, मखाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, साबूदाना और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
घर में ऐसे बनाएं सकारात्मक वातावरण
नवरात्रि के दौरान घर की नियमित साफ-सफाई करें और पूजा स्थान को विशेष रूप से स्वच्छ रखें। सुबह और शाम दीपक जलाकर आरती करें। घर में देवी भजन, मंत्र और धार्मिक वातावरण बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। परिवार के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
कन्या पूजन का महत्व
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन, फल, मिठाई और उपहार देकर सम्मानित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे मां दुर्गा प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष पर्व
गुप्त नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर है। इन नौ दिनों में व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक शांति प्राप्त करने का प्रयास करता है। श्रद्धा, अनुशासन और विधि-विधान से की गई देवी आराधना जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करती है।
