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MPLAD को लेकर नया विवाद: भाजपा सांसदों द्वारा भी दूसरे राज्यों में निधि खर्च करने का मामला सामने आया
नेशनल न्यूज
राजस्थान में उठे सवालों के बीच भाजपा के चार राज्यसभा सांसद और एक केंद्रीय मंत्री द्वारा अन्य राज्यों में सांसद निधि उपयोग की जानकारी उजागर
जयपुर। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLAD) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस ने नया मोड़ ले लिया है। राजस्थान के कुछ कांग्रेस सांसदों द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर निधि खर्च करने पर सवाल उठाए जाने के बाद अब यह जानकारी सामने आई है कि भाजपा के सांसदों ने भी अन्य राज्यों में MPLAD फंड का उपयोग किया है। इसमें चार राज्यसभा सांसदों के साथ एक केंद्रीय मंत्री का नाम शामिल है।
जानकारी के अनुसार, जिन भाजपा नेताओं ने अपने राज्य से बाहर सांसद निधि खर्च की है, उनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया और राजेन्द्र गहलोत शामिल हैं। इन सभी ने अलग-अलग राज्यों में जनसुविधा और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों के लिए राशि जारी की है।
घनश्याम तिवाड़ी ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में धर्मशाला से जुड़े विकास कार्यों के लिए निधि दी, जबकि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सोलर पैनल लगाने के लिए भी सांसद कोष से राशि स्वीकृत की गई। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हरियाणा और पंजाब के कुछ जिलों में अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक ट्रस्टों से जुड़े कार्यों में सांसद निधि का उपयोग किया।
इसी तरह, चुन्नीलाल गरासिया ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और शाहजहांपुर में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए एलईडी लाइट लगवाने हेतु राशि जारी की। राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत ने आगरा में जल आपूर्ति और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए निधि खर्च की, वहीं मऊ जिले में एक जरूरतमंद बच्चे को सुनने की मशीन भी सांसद कोष से उपलब्ध कराई गई।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि जब भाजपा सांसद भी नियमों के तहत दूसरे राज्यों में निधि खर्च कर रहे हैं, तो केवल कांग्रेस सांसदों को निशाने पर लेना उचित नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक चयनात्मकता और दोहरा रवैया बताया।
वहीं, भाजपा का कहना है कि सांसद निधि का उपयोग पूरी तरह नियमों के दायरे में किया गया है और इसका उद्देश्य जरूरतमंद क्षेत्रों में जनहित के कार्य कराना है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि निधि का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर किया गया है।नियमों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा सांसद एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 लाख रुपए तक की MPLAD राशि अपने राज्य के बाहर खर्च कर सकते हैं।
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जयपुर। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLAD) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस ने नया मोड़ ले लिया है। राजस्थान के कुछ कांग्रेस सांसदों द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर निधि खर्च करने पर सवाल उठाए जाने के बाद अब यह जानकारी सामने आई है कि भाजपा के सांसदों ने भी अन्य राज्यों में MPLAD फंड का उपयोग किया है। इसमें चार राज्यसभा सांसदों के साथ एक केंद्रीय मंत्री का नाम शामिल है।
जानकारी के अनुसार, जिन भाजपा नेताओं ने अपने राज्य से बाहर सांसद निधि खर्च की है, उनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया और राजेन्द्र गहलोत शामिल हैं। इन सभी ने अलग-अलग राज्यों में जनसुविधा और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों के लिए राशि जारी की है।
घनश्याम तिवाड़ी ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में धर्मशाला से जुड़े विकास कार्यों के लिए निधि दी, जबकि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सोलर पैनल लगाने के लिए भी सांसद कोष से राशि स्वीकृत की गई। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हरियाणा और पंजाब के कुछ जिलों में अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक ट्रस्टों से जुड़े कार्यों में सांसद निधि का उपयोग किया।
इसी तरह, चुन्नीलाल गरासिया ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और शाहजहांपुर में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए एलईडी लाइट लगवाने हेतु राशि जारी की। राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत ने आगरा में जल आपूर्ति और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए निधि खर्च की, वहीं मऊ जिले में एक जरूरतमंद बच्चे को सुनने की मशीन भी सांसद कोष से उपलब्ध कराई गई।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि जब भाजपा सांसद भी नियमों के तहत दूसरे राज्यों में निधि खर्च कर रहे हैं, तो केवल कांग्रेस सांसदों को निशाने पर लेना उचित नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक चयनात्मकता और दोहरा रवैया बताया।
वहीं, भाजपा का कहना है कि सांसद निधि का उपयोग पूरी तरह नियमों के दायरे में किया गया है और इसका उद्देश्य जरूरतमंद क्षेत्रों में जनहित के कार्य कराना है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि निधि का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर किया गया है।नियमों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा सांसद एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 लाख रुपए तक की MPLAD राशि अपने राज्य के बाहर खर्च कर सकते हैं।
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