शहर में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए नगर निगम द्वारा जारी कचरा पृथक्करण के निर्देश जमीनी स्तर पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं। जनवरी की शुरुआत में कचरा संग्रहण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए सख्त आदेश जारी किए गए थे, लेकिन दस दिन बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालात यह हैं कि खुद नगर निगम की कचरा गाड़ियां ही तय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
नगर निगम प्रशासन ने 1 जनवरी से सभी कचरा संग्रहण वाहनों में पांच अलग-अलग डिब्बे अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए थे। इन डिब्बों का उद्देश्य गीले, सूखे, प्लास्टिक, घरेलू खतरनाक और अन्य अपशिष्ट को अलग-अलग एकत्र करना था, ताकि प्रोसेसिंग और निपटान आसान हो सके। लेकिन शहर के अधिकांश इलाकों में कचरा अब भी एक ही बॉक्स या खुले ट्रॉली में डाला जा रहा है।
स्थानीय वार्डों में रोजाना निकलने वाली निगम की गाड़ियों में न तो निर्धारित पांच बॉक्स नजर आ रहे हैं और न ही चालक कचरे को अलग-अलग लेने में रुचि दिखा रहे हैं। कई स्थानों पर नागरिकों ने घरों से सूखा और गीला कचरा अलग कर रखा, लेकिन कचरा गाड़ी में दोनों को एक साथ डाल दिया गया। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
शहरवासियों का कहना है कि निगम लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, पोस्टर लगाए जा रहे हैं और लोगों से कचरा अलग करने की अपील की जा रही है। लेकिन जब अंतिम स्तर पर संग्रहण करने वाली व्यवस्था ही लापरवाह हो, तो आम जनता का प्रयास व्यर्थ हो जाता है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि नियम सिर्फ नागरिकों के लिए क्यों, निगम कर्मियों पर क्यों नहीं।
इस पूरे मामले पर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कचरा वाहन चालकों और ठेकेदारों को बार-बार निर्देश दिए गए हैं कि वे पृथक्करण व्यवस्था का पालन करें। नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना और ठेका निरस्त करने जैसी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
हालांकि, हकीकत यह है कि अब तक न तो सभी गाड़ियों में आवश्यक डिब्बे लगाए जा सके हैं और न ही निगरानी व्यवस्था प्रभावी हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निगम खुद उदाहरण पेश नहीं करेगा, तब तक शहर में कचरा प्रबंधन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रहेगा।
स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं के बीच जबलपुर में कचरा पृथक्करण की यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर को उजागर करती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नगर निगम चेतावनियों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई कर पाता है या नहीं।
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