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नींद की कमी से बढ़ती बीमारियाँ: विशेषज्ञों की चेतावनी, अनदेखी बन रही गंभीर खतरा
लाइफस्टाइल डेस्क
भागदौड़ भरी जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या के कारण देश में स्लीप डिसऑर्डर तेजी से बढ़ रहा है, डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल के बीच नींद की कमी अब केवल थकान या सुस्ती तक सीमित समस्या नहीं रही, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार कम नींद लेने से हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। देश के शहरी इलाकों में यह समस्या तेजी से फैल रही है, जिसमें युवा और कामकाजी वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद आवश्यक मानी जाती है। इसके बावजूद देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और ओटीटी प्लेटफॉर्म का उपयोग आम होता जा रहा है। वर्क फ्रॉम होम और अनियमित दिनचर्या ने सोने-जागने के समय को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। इसका सीधा असर शरीर की जैविक घड़ी पर पड़ रहा है, जिससे नींद की गुणवत्ता लगातार गिर रही है।
नींद की कमी क्यों खतरनाक है, इस पर डॉक्टरों का कहना है कि नींद के दौरान शरीर खुद को ठीक करता है। इसी समय दिमाग तनाव से उबरता है और हार्मोन संतुलित होते हैं। पर्याप्त नींद न मिलने पर ब्लड प्रेशर बढ़ने, शुगर लेवल असंतुलित होने और मानसिक चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक बीमारियाँ भी पनप सकती हैं।
कब से यह समस्या गंभीर हुई, इस सवाल पर विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड के बाद डिजिटल निर्भरता में तेज़ी आई। ऑनलाइन काम, पढ़ाई और मनोरंजन ने स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ा दिया। देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत ने मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित किया, जो नींद के लिए जरूरी होता है। नतीजतन, अनिद्रा और अधूरी नींद आम समस्या बन गई।
कैसे सुधारी जाए लाइफस्टाइल, इस पर विशेषज्ञ सरल लेकिन प्रभावी उपाय सुझाते हैं। रोज एक तय समय पर सोने और जागने की आदत डालना, सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना, कैफीन और भारी भोजन से बचना नींद को बेहतर बना सकता है। इसके अलावा, हल्की एक्सरसाइज और ध्यान भी नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक माने जाते हैं।
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