तांबे के बर्तन में पानी पीते समय बरतें सावधानी, ज्यादा मात्रा बन सकती है सेहत के लिए खतरा

लाइफस्टाइल डेस्क

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आयुर्वेदिक परंपरा में शामिल तांबे का पानी फायदेमंद जरूर, लेकिन गलत तरीके से सेवन नुकसानदेह

भारत में तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। घरों में आज भी सुबह के समय तांबे के लोटे या जग में रखा पानी पीने को सेहत से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि तांबे का पानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसका सेवन संतुलन से बाहर हो जाए, तो यह फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।

स्वास्थ्य से जुड़े ताजा अध्ययनों और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर को सीमित मात्रा में कॉपर मिलता है, जो एक जरूरी खनिज है। यह खून बनने, इम्युनिटी मजबूत करने और शरीर की कई जैविक क्रियाओं में मदद करता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में जमा होने लगे, तो यही तत्व विषाक्त असर दिखा सकता है।

कब बनता है नुकसानदेह
जानकारों के अनुसार, दिनभर तांबे के बर्तन का पानी पीते रहना, उसमें नींबू या अन्य खट्टे पदार्थ मिलाना, या तांबे के बर्तन में रखा पानी गर्म करके पीना गलत माना जाता है। इन आदतों से पानी में घुलने वाले तांबे की मात्रा बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा करने से पेट में जलन, उलटी, मतली, पेट दर्द और शरीर में मिनरल असंतुलन की शिकायत हो सकती है।

कितनी मात्रा है सुरक्षित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना एक या दो गिलास सामान्य तापमान वाला तांबे के बर्तन में रखा पानी पर्याप्त होता है। इसे सुबह या दिन में किसी एक समय लिया जा सकता है। बाकी समय सामान्य साफ पानी पीना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। लगातार पूरे दिन तांबे का पानी पीने की जरूरत नहीं होती।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग जिन्हें किडनी, लीवर या पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें तांबे के पानी का सेवन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नियमित आदत बनाना जोखिम भरा हो सकता है।

फायदे तभी, जब सही तरीका अपनाएं
सही मात्रा और सही तरीके से लिया गया तांबे का पानी इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है। यह दिल और दिमाग के स्वास्थ्य को सपोर्ट करता है और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है।

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www.dainikjagranmpcg.com
08 Jan 2026 By Nitin Trivedi

तांबे के बर्तन में पानी पीते समय बरतें सावधानी, ज्यादा मात्रा बन सकती है सेहत के लिए खतरा

लाइफस्टाइल डेस्क

भारत में तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। घरों में आज भी सुबह के समय तांबे के लोटे या जग में रखा पानी पीने को सेहत से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि तांबे का पानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसका सेवन संतुलन से बाहर हो जाए, तो यह फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।

स्वास्थ्य से जुड़े ताजा अध्ययनों और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर को सीमित मात्रा में कॉपर मिलता है, जो एक जरूरी खनिज है। यह खून बनने, इम्युनिटी मजबूत करने और शरीर की कई जैविक क्रियाओं में मदद करता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में जमा होने लगे, तो यही तत्व विषाक्त असर दिखा सकता है।

कब बनता है नुकसानदेह
जानकारों के अनुसार, दिनभर तांबे के बर्तन का पानी पीते रहना, उसमें नींबू या अन्य खट्टे पदार्थ मिलाना, या तांबे के बर्तन में रखा पानी गर्म करके पीना गलत माना जाता है। इन आदतों से पानी में घुलने वाले तांबे की मात्रा बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा करने से पेट में जलन, उलटी, मतली, पेट दर्द और शरीर में मिनरल असंतुलन की शिकायत हो सकती है।

कितनी मात्रा है सुरक्षित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना एक या दो गिलास सामान्य तापमान वाला तांबे के बर्तन में रखा पानी पर्याप्त होता है। इसे सुबह या दिन में किसी एक समय लिया जा सकता है। बाकी समय सामान्य साफ पानी पीना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। लगातार पूरे दिन तांबे का पानी पीने की जरूरत नहीं होती।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग जिन्हें किडनी, लीवर या पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें तांबे के पानी का सेवन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नियमित आदत बनाना जोखिम भरा हो सकता है।

फायदे तभी, जब सही तरीका अपनाएं
सही मात्रा और सही तरीके से लिया गया तांबे का पानी इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है। यह दिल और दिमाग के स्वास्थ्य को सपोर्ट करता है और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है।

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