वोडाफोन-आइडिया को कैबिनेट से बड़ी राहत, 87,695 करोड़ के AGR बकाया पर 5 साल का मोरेटोरियम

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AGR भुगतान FY32 से FY41 के बीच होगा, नकदी संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी को मिली अहम सांस

केंद्र सरकार ने कर्ज के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vi) को साल के आखिरी दिन बड़ी राहत दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कंपनी के ₹87,695 करोड़ के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया भुगतान पर अस्थायी रोक लगाने को मंजूरी दे दी। फैसले के तहत कंपनी को अब यह राशि तत्काल नहीं चुकानी होगी और भुगतान की समय-सीमा को आगे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2032 से 2041 के बीच कर दिया गया है।

क्या है कैबिनेट का फैसला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वोडाफोन-आइडिया को AGR बकाया पर पांच साल का मोरेटोरियम दिया गया है। इसका अर्थ है कि अगले पांच वर्षों तक कंपनी पर इस मद में किसी बड़ी किस्त का दबाव नहीं रहेगा। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब कंपनी गंभीर नकदी संकट और लगातार घटते ग्राहक आधार से जूझ रही है।

क्यों जरूरी थी यह राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AGR भुगतान में राहत नहीं मिलती, तो वोडाफोन-आइडिया के लिए परिचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता था। कंपनी लंबे समय से सरकार से भुगतान शर्तों में ढील की मांग कर रही थी। सरकार ने भी यह स्पष्ट किया था कि टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में कंपनी का बने रहना जरूरी है।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
कैबिनेट के फैसले के बावजूद शेयर बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। बुधवार को वोडाफोन-आइडिया का शेयर करीब 11.5% गिरकर ₹10.67 पर बंद हुआ। हालांकि, लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले छह महीनों में शेयर करीब 43% चढ़ा है और एक साल में निवेशकों को लगभग 34% का रिटर्न मिला है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹1.17 लाख करोड़ रुपये है।

AGR क्या होता है
AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू, टेलीकॉम कंपनियों की उस आय को कहते हैं जिस पर सरकार लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज वसूलती है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद AGR की परिभाषा को लेकर विवाद बढ़ा था, जिसके चलते कंपनियों पर भारी बकाया सामने आया।

सरकार की हिस्सेदारी और कर्ज की स्थिति
केंद्र सरकार फिलहाल वोडाफोन-आइडिया में लगभग 49% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है। बीते वर्षों में कंपनी ने स्पेक्ट्रम और ब्याज से जुड़े कुछ बकायों को इक्विटी में बदला था। कुल मिलाकर कंपनी पर ₹2 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है, जिसमें AGR और स्पेक्ट्रम देनदारियां प्रमुख हैं।

आगे की रणनीति क्या होगी
इस राहत के बाद कंपनी अब बैंकों और निवेशकों से फंड जुटाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। प्रबंधन का फोकस 5G सेवाओं की तैयारी और मौजूदा 4G नेटवर्क को मजबूत करने पर रहेगा। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर में दो बड़ी कंपनियों के वर्चस्व की आशंका फिलहाल कम हुई है।

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www.dainikjagranmpcg.com
01 Jan 2026 By Nitin Trivedi

वोडाफोन-आइडिया को कैबिनेट से बड़ी राहत, 87,695 करोड़ के AGR बकाया पर 5 साल का मोरेटोरियम

बिजनेस न्यूज

केंद्र सरकार ने कर्ज के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vi) को साल के आखिरी दिन बड़ी राहत दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कंपनी के ₹87,695 करोड़ के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया भुगतान पर अस्थायी रोक लगाने को मंजूरी दे दी। फैसले के तहत कंपनी को अब यह राशि तत्काल नहीं चुकानी होगी और भुगतान की समय-सीमा को आगे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2032 से 2041 के बीच कर दिया गया है।

क्या है कैबिनेट का फैसला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वोडाफोन-आइडिया को AGR बकाया पर पांच साल का मोरेटोरियम दिया गया है। इसका अर्थ है कि अगले पांच वर्षों तक कंपनी पर इस मद में किसी बड़ी किस्त का दबाव नहीं रहेगा। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब कंपनी गंभीर नकदी संकट और लगातार घटते ग्राहक आधार से जूझ रही है।

क्यों जरूरी थी यह राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AGR भुगतान में राहत नहीं मिलती, तो वोडाफोन-आइडिया के लिए परिचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता था। कंपनी लंबे समय से सरकार से भुगतान शर्तों में ढील की मांग कर रही थी। सरकार ने भी यह स्पष्ट किया था कि टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में कंपनी का बने रहना जरूरी है।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
कैबिनेट के फैसले के बावजूद शेयर बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। बुधवार को वोडाफोन-आइडिया का शेयर करीब 11.5% गिरकर ₹10.67 पर बंद हुआ। हालांकि, लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले छह महीनों में शेयर करीब 43% चढ़ा है और एक साल में निवेशकों को लगभग 34% का रिटर्न मिला है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹1.17 लाख करोड़ रुपये है।

AGR क्या होता है
AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू, टेलीकॉम कंपनियों की उस आय को कहते हैं जिस पर सरकार लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज वसूलती है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद AGR की परिभाषा को लेकर विवाद बढ़ा था, जिसके चलते कंपनियों पर भारी बकाया सामने आया।

सरकार की हिस्सेदारी और कर्ज की स्थिति
केंद्र सरकार फिलहाल वोडाफोन-आइडिया में लगभग 49% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है। बीते वर्षों में कंपनी ने स्पेक्ट्रम और ब्याज से जुड़े कुछ बकायों को इक्विटी में बदला था। कुल मिलाकर कंपनी पर ₹2 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है, जिसमें AGR और स्पेक्ट्रम देनदारियां प्रमुख हैं।

आगे की रणनीति क्या होगी
इस राहत के बाद कंपनी अब बैंकों और निवेशकों से फंड जुटाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। प्रबंधन का फोकस 5G सेवाओं की तैयारी और मौजूदा 4G नेटवर्क को मजबूत करने पर रहेगा। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर में दो बड़ी कंपनियों के वर्चस्व की आशंका फिलहाल कम हुई है।

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