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वैश्विक शांति पर कंसास स्टेट सीनेट में डॉ. के. ए. पॉल का संबोधन: भारत–अमेरिका सहयोग को बताया समय की जरूरत
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अमेरिका के कंसास राज्य विधानमंडल में वैश्विक संघर्ष, कूटनीति और मानवीय नेतृत्व पर बोले डॉ. पॉल, भारतीय निजी नागरिक के रूप में पहली बार मिला मंच
वैश्विक शांति, संघर्ष समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर मानवतावादी नेता डॉ. के. ए. पॉल ने अमेरिका के कंसास स्टेट सीनेट को संबोधित किया। यह संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि डॉ. पॉल वैश्विक शांति जैसे विषय पर कंसास स्टेट सीनेट के सदस्यों से संवाद करने वाले पहले भारतीय निजी नागरिक बने हैं। यह कार्यक्रम कंसास की राजधानी टोपीका स्थित सीनेट भवन में आयोजित हुआ।
अपने संबोधन में डॉ. के. ए. पॉल ने दुनिया भर में जारी सशस्त्र संघर्षों पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में दर्जनों बड़े युद्ध न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक मानवता के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देशों की भूमिका और जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
डॉ. पॉल ने अमेरिकी विधायकों से आग्रह किया कि वे विदेश नीति में सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीति, संवाद और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दें। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धों से आम नागरिकों को सबसे अधिक नुकसान होता है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्व सैन्य अभियानों से सीख लेकर भविष्य की नीतियों को अधिक संतुलित बनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दौरान कंसास स्टेट सीनेट के चैपलिन डॉ. सेसिल वाशिंगटन ने डॉ. के. ए. पॉल का परिचय कराया। उन्होंने डॉ. पॉल के दशकों लंबे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कार्यों, शांति मिशनों और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ किए गए संवादों का उल्लेख किया। डॉ. वाशिंगटन ने कहा कि डॉ. पॉल का अनुभव और दृष्टिकोण वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है।
सत्र के दौरान डॉ. पॉल ने पूर्वी यूरोप, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का हवाला देते हुए कहा कि बिना संवाद और संयम के स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवीय संकटों पर एकजुट होकर काम करे।
डॉ. पॉल ने अमेरिका द्वारा दुनिया भर में किए जा रहे मानवीय सहायता कार्यक्रमों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और राहत कार्यों में अमेरिका की भूमिका सराहनीय रही है, लेकिन इसे और अधिक संगठित और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. पॉल ने भारत–अमेरिका संबंधों को वैश्विक स्थिरता के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों, सुरक्षा मुद्दों और मानवीय संकटों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच मजबूत, भरोसेमंद और पारदर्शी साझेदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों दलों के सीनेटरों ने भाग लिया और शांति, जवाबदेही तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर विचार साझा किए। यह संवाद भविष्य में वैश्विक मंचों पर भारत–अमेरिका सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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