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यमुना तट पर कुश्ती का महाकुंभ: ऐतिहासिक इनामी दंगल में दिखी पुरानी दिल्ली की अखाड़ा परंपरा
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जयप्रकाश अग्रवाल और देवेंद्र यादव की मौजूदगी में 200 से अधिक पहलवान उतरे अखाड़े में, गुरु धर्मपाल यादव की स्मृति को समर्पित रहा आयोजन
पुरानी दिल्ली के यमुना तट पर रविवार को पारंपरिक भारतीय कुश्ती की जीवंत झलक देखने को मिली, जब घाट संख्या-2 पर ऐतिहासिक इनामी कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। यमुना युवक केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस दंगल में देश के विभिन्न राज्यों से आए 200 से अधिक पहलवानों ने भाग लिया। वर्ष 1967 से लगातार आयोजित हो रहा यह दंगल इस बार विश्व चैंपियन दंड (11011) स्वर्गीय गुरु धर्मपाल यादव की स्मृति को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि कुश्ती केवल ताकत का खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि दशकों से इस परंपरा को जीवित रखना आसान नहीं होता, लेकिन यमुना युवक केंद्र ने इसे निरंतर आगे बढ़ाया है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने स्वर्गीय धर्मपाल यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मिट्टी के अखाड़ों से निकले पहलवानों ने भारत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। देवेंद्र यादव ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली में ‘दिल्ली केसरी’ जैसे बड़े आयोजनों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि स्थानीय पहलवानों को बेहतर मंच मिल सके।
दंगल में सुबह से लेकर शाम तक चले मुकाबलों ने दर्शकों को बांधे रखा। मिट्टी के अखाड़े में हुए कुश्ती मुकाबलों में तकनीक, ताकत और धैर्य का संतुलन साफ नजर आया। विजेता पहलवानों को नकद इनाम दिए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। भारत केसरी पहलवान राज सिंह की मौजूदगी ने युवा पहलवानों का उत्साह और बढ़ा दिया।
नगर निगम पार्षद सुमन गुप्ता ने कहा कि कुश्ती जैसे खेल युवाओं को नशे और भटकाव से दूर रखते हैं। उन्होंने निगम स्तर पर ऐसे आयोजनों के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं दंगल संयोजक खलीफा अजय यादव ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अखाड़ा संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
यमुना युवक केंद्र के महासचिव विजय शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि संस्था हर वर्ष यह दंगल आयोजित करती है और आने वाले समय में इसे और विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में हर महीने नियमित कुश्ती आयोजनों की योजना बनाई जा रही है, जिससे पहलवानों को निरंतर अभ्यास और प्रतिस्पर्धा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार, अनिल भारद्वाज, भीष्म शर्मा, महेश कपूर, जिला अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान, सुनीता धवन, सरदार जगतार सिंह, जवाहरलाल धवन सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अखाड़ा गुरु और समाजसेवी मौजूद रहे। इस अवसर पर 100 से अधिक समाजसेवियों को शाल, पगड़ी और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
यमुना तट पर आयोजित यह दंगल न केवल एक खेल आयोजन रहा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और परंपरागत खेलों के संरक्षण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।
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