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स्मार्ट तकनीकों से सशक्त होगी वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था
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पतंजलि विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, एआई, टेलीमेडिसिन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन
विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं और प्रभावी प्रबंधन प्रणाली को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पतंजलि विश्वविद्यालय में “स्वास्थ्य सेवा एवं प्रबंधन में स्मार्ट तकनीकों का एकीकरण” विषय पर त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी 15 से 17 जनवरी तक पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन एवं विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न होगी।
इस वैश्विक संगोष्ठी का आयोजन पतंजलि विश्वविद्यालय और आईआईटी रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (AIMT), ग्लोबल नॉलेज फाउंडेशन (अमेरिका), भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), देहरादून तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर (UMES) के बिजनेस, मैनेजमेंट एवं अकाउंटिंग विभाग की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, धन्वंतरि वंदना और सांस्कृतिक समूहगान के साथ हुआ। पूज्य आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण जी ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया, इसके पश्चात संगोष्ठी की सार-पुस्तिका का लोकार्पण किया गया।
सनातन संस्कृति वैश्विक चेतना का आधार: आचार्य बालकृष्ण
अपने प्रेरक संबोधन में आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा दीर्घायु, स्वास्थ्य और ज्ञान को जीवन का मूल आधार मानती है। ‘सहस्त्र चंद्र दर्शन’ जैसी अवधारणाएं भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सोच को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि आज सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक मंच पर पुनः प्रतिष्ठित हो रहा है और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना पूरी दुनिया को जोड़ने का कार्य कर रही है।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि वियरेबल सेंसर, स्मार्ट मेडिकल डिवाइस और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से स्वास्थ्य डेटा का संग्रह और विश्लेषण संभव हो रहा है, जिससे रोग निदान और उपचार अधिक सटीक बन रहा है।
एआई और डिजिटल हेल्थ भविष्य की जरूरत
डॉ. देव शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चिकित्सा प्रणाली व्यक्तिगत उपचार चयन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। डिजिटल हेल्थ मैनेजमेंट, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट एनालिटिक्स के बिना आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि एआई आज जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसके उपयोग में नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में पतंजलि के प्रयासों की सराहना की।
गुणवत्ता और मानकीकरण पर जोर
मुख्य अतिथि सचिन चौधरी (भारतीय मानक ब्यूरो) ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण सर्वोपरि है। BIS देशभर में मानकों के माध्यम से सुरक्षित और विश्वसनीय स्वास्थ्य ढांचा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य और एआई को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए वैश्विक स्वास्थ्य सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
अनुसंधान और आत्मनिर्भर भारत की दिशा
पतंजलि हर्बल रिसर्च की अनुसंधान प्रमुख डॉ. वेदप्रिया आर्या ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पतंजलि एग्रीटेक, मृदा परीक्षण, कृषि उद्यमिता और एआई आधारित अनुसंधान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में जुटा है।
कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत कटियार, डॉ. कनक सोनी, डॉ. सविता सहित अनेक विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही।
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