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आज का पंचांग: 1 जून 2025 रविवार
Dharm Desk
स्कंद षष्ठी पर करें भगवान कार्तिकेय की आराधना, भूमि-गहनों की खरीदारी के लिए श्रेष्ठ दिन
आज 1 जून 2025, दिन रविवार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह तिथि भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित स्कंद षष्ठी के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्कंद की उपासना करने से शत्रु बाधा, मानसिक अशांति और पारिवारिक कलह का अंत होता है। यह दिन भूमि, वाहन और आभूषणों की खरीदारी के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है।
आज का पंचांग
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विक्रम संवत | 2081 |
| माह | ज्येष्ठ |
| पक्ष | शुक्ल |
| तिथि | षष्ठी |
| दिन | रविवार |
| नक्षत्र | अश्लेषा |
| योग | ध्रुव |
| करण | कौलव |
| चंद्र राशि | कर्क |
| सूर्य राशि | वृषभ |
| सूर्योदय | सुबह 05:53 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 07:20 बजे |
| चंद्रोदय | सुबह 10:26 बजे |
| चंद्रास्त | देर रात 12:08 बजे (2 जून) |
आज के अशुभ मुहूर्त (वर्जित समय)
-
राहुकाल : शाम 05:39 से 07:20 बजे तक
-
यमगंड काल : दोपहर 12:37 से 02:18 बजे तक
-
गुलिक काल : दोपहर 03:59 से 05:39 बजे तक
-
इन कालों में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
नक्षत्र विशेष : अश्लेषा में क्या करें, क्या न करें?
आज चंद्रमा कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेगा। यह नक्षत्र 16:40 डिग्री से 30 डिग्री तक फैला होता है और इसके स्वामी बुध हैं। अश्लेषा नक्षत्र को मिश्रित फलदायक माना जाता है।
क्या करें:
-
शत्रु पर विजय की योजना
-
कूटनीतिक निर्णय
-
तांत्रिक/गुप्त साधनाएं
-
अनुबंध समाप्त करना
-
मानसिक या आध्यात्मिक तप
क्या न करें:
-
गृह प्रवेश
-
नए व्यवसाय की शुरुआत
-
विवाह या मांगलिक कार्यक्रम
-
निवेश और शुभ खरीदारी का समय दोपहर से पहले उत्तम रहेगा।
स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को युद्ध का देवता माना जाता है। स्कंद षष्ठी के दिन उपवास रखने और पूजा-अर्चना करने से शौर्य, पराक्रम और संतान सुख की प्राप्ति होती है। दक्षिण भारत में विशेष रूप से यह पर्व भक्ति भाव से मनाया जाता है।
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आज का पंचांग: 1 जून 2025 रविवार
Dharm Desk
आज 1 जून 2025, दिन रविवार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह तिथि भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित स्कंद षष्ठी के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्कंद की उपासना करने से शत्रु बाधा, मानसिक अशांति और पारिवारिक कलह का अंत होता है। यह दिन भूमि, वाहन और आभूषणों की खरीदारी के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है।
आज का पंचांग
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विक्रम संवत | 2081 |
| माह | ज्येष्ठ |
| पक्ष | शुक्ल |
| तिथि | षष्ठी |
| दिन | रविवार |
| नक्षत्र | अश्लेषा |
| योग | ध्रुव |
| करण | कौलव |
| चंद्र राशि | कर्क |
| सूर्य राशि | वृषभ |
| सूर्योदय | सुबह 05:53 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 07:20 बजे |
| चंद्रोदय | सुबह 10:26 बजे |
| चंद्रास्त | देर रात 12:08 बजे (2 जून) |
आज के अशुभ मुहूर्त (वर्जित समय)
-
राहुकाल : शाम 05:39 से 07:20 बजे तक
-
यमगंड काल : दोपहर 12:37 से 02:18 बजे तक
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गुलिक काल : दोपहर 03:59 से 05:39 बजे तक
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इन कालों में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
नक्षत्र विशेष : अश्लेषा में क्या करें, क्या न करें?
आज चंद्रमा कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेगा। यह नक्षत्र 16:40 डिग्री से 30 डिग्री तक फैला होता है और इसके स्वामी बुध हैं। अश्लेषा नक्षत्र को मिश्रित फलदायक माना जाता है।
क्या करें:
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शत्रु पर विजय की योजना
-
कूटनीतिक निर्णय
-
तांत्रिक/गुप्त साधनाएं
-
अनुबंध समाप्त करना
-
मानसिक या आध्यात्मिक तप
क्या न करें:
-
गृह प्रवेश
-
नए व्यवसाय की शुरुआत
-
विवाह या मांगलिक कार्यक्रम
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निवेश और शुभ खरीदारी का समय दोपहर से पहले उत्तम रहेगा।
स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को युद्ध का देवता माना जाता है। स्कंद षष्ठी के दिन उपवास रखने और पूजा-अर्चना करने से शौर्य, पराक्रम और संतान सुख की प्राप्ति होती है। दक्षिण भारत में विशेष रूप से यह पर्व भक्ति भाव से मनाया जाता है।
