दीवार की घड़ी बन सकती है परेशानी की वजह, गलत दिशा और स्थिति से बढ़ सकती हैं रुकावटें

धर्म डेस्क

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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगी घड़ी समय के साथ-साथ भाग्य की दिशा भी तय करती है, गलत जगह लगाने से नकारात्मक असर की आशंका

घर में दीवार पर लगी घड़ी को अक्सर केवल समय देखने का साधन माना जाता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसका महत्व इससे कहीं अधिक बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, घड़ी न केवल दिनचर्या को नियंत्रित करती है, बल्कि यह घर की ऊर्जा और वहां रहने वालों के जीवन पर भी प्रभाव डाल सकती है। गलत दिशा, खराब स्थिति या अनुपयुक्त डिजाइन की घड़ी व्यक्ति की प्रगति में बाधा बन सकती है।

वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, घर में घड़ी लगाने से पहले दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दक्षिण दिशा में घड़ी लगाना अशुभ माना गया है। इस दिशा को पितरों और यम से जोड़ा जाता है, इसलिए यहां समय देखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की आशंका रहती है। कई वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण दिशा में लगी घड़ी मानसिक तनाव, काम में रुकावट और पारिवारिक असंतुलन का कारण बन सकती है।

इसके विपरीत, उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा को घड़ी के लिए अनुकूल माना गया है। उत्तर दिशा को धन और अवसरों से जोड़कर देखा जाता है, जबकि पूर्व दिशा सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इन दिशाओं में घड़ी लगाने से समय के साथ कार्यों में गति आने और वातावरण में संतुलन बनने की मान्यता है। पश्चिम दिशा में लगी घड़ी भी स्थिरता और अनुशासन को बढ़ावा देती है।

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार पर घड़ी लगाने को भी उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि दरवाजे के ठीक ऊपर या सामने लगी घड़ी घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा को बाधित कर सकती है। इससे आर्थिक नुकसान और पारिवारिक मतभेद बढ़ने की आशंका जताई जाती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घड़ी ऐसी जगह लगाई जाए, जहां घर में प्रवेश करते समय उस पर सहज नजर पड़े, लेकिन वह दक्षिण दिशा में न हो।

घड़ी की स्थिति और हालत भी उतनी ही अहम मानी जाती है। टूटे कांच, खराब डायल या बंद पड़ी घड़ी को घर में रखना वास्तु के अनुसार नकारात्मक संकेत देता है। ऐसी घड़ियां ठहराव और रुकावट का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि घड़ी की बैटरी खत्म हो जाए या वह सही समय न दिखा रही हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाने की सलाह दी जाती है।

घड़ी के आकार को लेकर भी वास्तु में सुझाव दिए गए हैं। गोल, अंडाकार, अष्टभुजाकार या पेंडुलम वाली घड़ियां शुभ मानी जाती हैं। तेज किनारों या असंतुलित आकार वाली घड़ियों से बचने की बात कही जाती है, क्योंकि वे घर के वातावरण में अस्थिरता ला सकती हैं।

समय सेट करने को लेकर भी वास्तु में एक अहम नियम बताया गया है। घड़ी का समय कभी पीछे नहीं होना चाहिए। माना जाता है कि पीछे चलता समय जीवन की गति को धीमा करता है। सही या थोड़ा आगे सेट किया गया समय सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने का संकेत देता है।

कुल मिलाकर, वास्तु शास्त्र के अनुसार दीवार की घड़ी केवल सजावटी वस्तु नहीं है। सही दिशा, उचित स्थान और अच्छी स्थिति में लगी घड़ी घर में संतुलन और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। आज की ताज़ा ख़बरें और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में यह विषय उन लोगों के लिए खास है, जो अपने घर और जीवन में स्थिरता चाहते हैं।

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