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बिलासपुर में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई: 40 से ज्यादा अवैध मकान ध्वस्त, सड़क-नाला परियोजना का रास्ता साफ
बिलासपुर (छ.ग.)
अरपा पार बंधवापारा क्षेत्र में नगर निगम की कार्रवाई, विरोध के बीच पुलिस तैनात; प्रभावित परिवारों को पीएम आवास योजना में मिला पुनर्वास
बिलासपुर शहर में लंबे समय से अटकी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम ने बुधवार को अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। अरपा पार एसईसीएल इंदिरा विहार कॉलोनी से सटे बंधवापारा बंसोड़ मोहल्ले में निगम अमले ने पुलिस बल की मौजूदगी में 40 से अधिक अवैध मकानों को ढहा दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ देर तक स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया, हालांकि स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए प्रशासन ने अभियान पूरा किया।
कार्रवाई सुबह करीब आठ बजे शुरू होनी थी, लेकिन पुलिस बल समय पर नहीं पहुंचने के कारण निगम की टीम को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान रहवासियों ने मकान खाली करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। लगभग नौ बजे पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद विरोध शांत हुआ और बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बंधवापारा इलाके में वर्षों से किए गए अतिक्रमण के कारण नाले के विस्तार और सड़क चौड़ीकरण का कार्य रुका हुआ था। स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में इसी वजह से क्षेत्र में गंभीर जलभराव की समस्या होती थी, जिससे आसपास के वार्डों में जनजीवन प्रभावित होता रहा है।
नगर निगम का दावा है कि मौके पर कुल 80 से अधिक पक्के निर्माण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से एक बड़े हिस्से को पहले ही खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। बुधवार की कार्रवाई उसी क्रम का हिस्सा थी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, 60 से ज्यादा परिवारों से पहले ही सहमति ली गई थी और उन्हें इमलीभाठा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों का आवंटन किया गया है। बुधवार को जिन 40 परिवारों के मकान हटाए गए, उन्हें पहले से आवंटित घरों में शिफ्ट किया गया।
इन परिवारों द्वारा पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं और आवश्यक शुल्क भी जमा कराया जा चुका था। निगम की ओर से शिफ्टिंग के लिए वाहन और श्रमिकों की भी व्यवस्था की गई थी।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने अपने मकानों को बचाने की कोशिश करते हुए विरोध किया और सामान हटाने के लिए और समय मांगा। मौके पर मौजूद जोन स्तर के अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को सितंबर से अब तक कई बार नोटिस दिए जा चुके थे और तीन से अधिक बार मोहलत भी दी गई थी। इसके बावजूद तय समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद कार्रवाई जरूरी हो गई।
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, पूरे क्षेत्र को खाली कराने और मलबा हटाने में अभी एक-दो दिन और लग सकते हैं। अतिक्रमण मुक्त हुई करीब दो एकड़ भूमि पर उद्यान विकसित करने, नाले के विस्तार और सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए जल्द ही तकनीकी आकलन और लागत का अनुमान तैयार किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के तहत की गई है, ताकि शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और बारिश के दौरान होने वाली समस्याओं से नागरिकों को राहत मिल सके।
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बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर शहर में लंबे समय से अटकी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम ने बुधवार को अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। अरपा पार एसईसीएल इंदिरा विहार कॉलोनी से सटे बंधवापारा बंसोड़ मोहल्ले में निगम अमले ने पुलिस बल की मौजूदगी में 40 से अधिक अवैध मकानों को ढहा दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ देर तक स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया, हालांकि स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए प्रशासन ने अभियान पूरा किया।
कार्रवाई सुबह करीब आठ बजे शुरू होनी थी, लेकिन पुलिस बल समय पर नहीं पहुंचने के कारण निगम की टीम को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान रहवासियों ने मकान खाली करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। लगभग नौ बजे पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद विरोध शांत हुआ और बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बंधवापारा इलाके में वर्षों से किए गए अतिक्रमण के कारण नाले के विस्तार और सड़क चौड़ीकरण का कार्य रुका हुआ था। स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में इसी वजह से क्षेत्र में गंभीर जलभराव की समस्या होती थी, जिससे आसपास के वार्डों में जनजीवन प्रभावित होता रहा है।
नगर निगम का दावा है कि मौके पर कुल 80 से अधिक पक्के निर्माण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से एक बड़े हिस्से को पहले ही खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। बुधवार की कार्रवाई उसी क्रम का हिस्सा थी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, 60 से ज्यादा परिवारों से पहले ही सहमति ली गई थी और उन्हें इमलीभाठा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों का आवंटन किया गया है। बुधवार को जिन 40 परिवारों के मकान हटाए गए, उन्हें पहले से आवंटित घरों में शिफ्ट किया गया।
इन परिवारों द्वारा पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं और आवश्यक शुल्क भी जमा कराया जा चुका था। निगम की ओर से शिफ्टिंग के लिए वाहन और श्रमिकों की भी व्यवस्था की गई थी।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने अपने मकानों को बचाने की कोशिश करते हुए विरोध किया और सामान हटाने के लिए और समय मांगा। मौके पर मौजूद जोन स्तर के अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को सितंबर से अब तक कई बार नोटिस दिए जा चुके थे और तीन से अधिक बार मोहलत भी दी गई थी। इसके बावजूद तय समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद कार्रवाई जरूरी हो गई।
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, पूरे क्षेत्र को खाली कराने और मलबा हटाने में अभी एक-दो दिन और लग सकते हैं। अतिक्रमण मुक्त हुई करीब दो एकड़ भूमि पर उद्यान विकसित करने, नाले के विस्तार और सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए जल्द ही तकनीकी आकलन और लागत का अनुमान तैयार किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के तहत की गई है, ताकि शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और बारिश के दौरान होने वाली समस्याओं से नागरिकों को राहत मिल सके।
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