महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ पर उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने तीखा पलटवार किया है। दुर्ग स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कांग्रेस पर ग्रामीणों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने किसी योजना का नाम नहीं बदला, बल्कि उसके कार्य स्वरूप में सुधार किया है।
विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि हाल ही में लागू किए गए विकसित भारत–ग्राम-जी अधिनियम 2025 का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मनरेगा के तहत सीमित और अस्थायी कार्य होते रहे हैं, जिससे गांवों में स्थायी विकास नहीं दिखा। सरकार अब इस स्थिति को बदलना चाहती है।
गृह मंत्री ने कहा कि जब हर वर्ष इस योजना पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो रही है और आने वाले समय में यह खर्च और बढ़ने वाला है, तो गांवों में बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा दिखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतना सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तो सड़कों, जल संरचनाओं, आजीविका संसाधनों और सुरक्षा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता क्यों न दी जाए।
कांग्रेस द्वारा 5 जनवरी से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि यह विरोध वास्तविक जनहित से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक जब ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है, तब उसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक गांधी के नाम पर योजनाएं चलाईं, लेकिन उनके विचारों के अनुरूप ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस काम नहीं किया। शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार गांवों को केवल रोजगार केंद्र नहीं, बल्कि विकास केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।
योजना की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नए अधिनियम के तहत ग्रामीण श्रमिकों को अब 125 दिन का रोजगार कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है, जो पहले की तुलना में अधिक है। इसके अलावा मजदूरी भुगतान की समय-सीमा तय की गई है। सात दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने की स्थिति में श्रमिकों को अतिरिक्त राशि दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान एक अन्य सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री ने दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ से जुड़े एक सोशल मीडिया स्टेटस का संज्ञान लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन जानकारी मिलने पर इसकी जांच कराई जाएगी।
फिलहाल मनरेगा और नए ग्रामीण अधिनियम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
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