हिंदी साहित्य के क्षेत्र में रायपुर को एक और उल्लेखनीय उपलब्धि उस समय मिली, जब वरिष्ठ पत्रकार और लेखक ब्रह्मवीर सिंह के नए उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का भव्य विमोचन विश्व पुस्तक मेला-2026 में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण सुप्रसिद्ध लेखिका चित्रा मुद्गल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने पाठकों से मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से दूरी बनाकर पुस्तकों की ओर लौटने की अपील की।
‘प्रत्याघात’ लेखक की चर्चित कृति ‘बुत मरते नहीं’ का अगला भाग है। यह उपन्यास पहले भाग में सामने आए सामाजिक अन्याय, नैतिक द्वंद्व और असत्य की जीत से जुड़े प्रश्नों को आगे बढ़ाते हुए न्याय और आत्मसंघर्ष की कहानी कहता है। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन द्वारा किया गया है।
लोकार्पण समारोह में पद्मश्री से सम्मानित कवि डॉ. सुनील जोगी, लेखक-कवि एवं दैनिक हिंदुस्तान के प्रबंध संपादक प्रताप सोमवंशी और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, पत्रकारिता और समकालीन समाज के आपसी संबंधों पर गहन चर्चा हुई।
चित्रा मुद्गल ने अपने संबोधन में कहा कि किताबें केवल विचारों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की चेतना और संवेदनशीलता को बचाए रखने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि लगातार स्क्रीन पर निर्भरता पाठकों को एकांगी बना रही है, जबकि साहित्य मनुष्य को भीतर से समृद्ध करता है।
उपन्यास के विषय में बात करते हुए ब्रह्मवीर सिंह ने कहा कि ‘बुत मरते नहीं’ के बाद पाठकों के मन में यह प्रश्न था कि असत्य की जीत का कोई प्रतिकार क्यों नहीं दिखा। उसी सवाल का उत्तर ‘प्रत्याघात’ है। उन्होंने कहा कि यह उन लोगों की कहानी है, जो निराशा, अवसाद और हार की भावना से गुजरते हैं, लेकिन पूरी तरह टूटते नहीं। लेखक के अनुसार, यह उपन्यास सत्य के साथ खड़े रहने की कठिन राह और उसके सामाजिक प्रभावों को सामने लाता है।
प्रताप सोमवंशी ने उपन्यास की भाषा और संवेदना की प्रशंसा करते हुए कहा कि पत्रकारों के पास अनुभवों की एक व्यापक दुनिया होती है, जो साहित्य को गहराई देती है। उन्होंने पत्रकारों से समय निकालकर रचनात्मक लेखन करने का आग्रह किया।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि ‘प्रत्याघात’ ब्रह्मवीर सिंह को एक संवेदनशील साहित्यकार के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने रायपुर में पत्रकारिता के क्षेत्र में अर्जित लेखक की साख को इस साहित्यिक उपलब्धि का आधार बताया।
कवि डॉ. सुनील जोगी ने कहा कि उपन्यास वर्तमान समय में टूटते रिश्तों और खत्म होती संवेदनाओं के बीच जीवन के अर्थ की खोज करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कृति पाठकों को समरसता और जीवंतता से जोड़ने का काम करेगी।
प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘प्रत्याघात’ भी लेखक की पूर्व कृतियों की तरह पाठकों के बीच व्यापक स्वीकृति और चर्चा हासिल करेगा।
--------------------------------------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
