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ईरान में उबाल, अमेरिका सख्त: ट्रम्प ने ‘रेड लाइन’ चेताई, हिंसा में सैकड़ों की मौत
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान में उबाल, अमेरिका सख्त: ट्रम्प ने ‘रेड लाइन’ चेताई, हिंसा में सैकड़ों की मौत
ईरान में जारी सरकार‑विरोधी प्रदर्शनों ने अब अंतरराष्ट्रीय तनाव का रूप लेना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के दौरान एक “रेड लाइन” के करीब पहुंच चुकी है। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है और उसके पास आगे बढ़ने के लिए कड़े विकल्प मौजूद हैं।
पिछले दो हफ्तों से ईरान के कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन घटनाओं में अब तक 544 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में कई इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि बढ़ती मौतों और गिरफ्तारियों के बीच अमेरिका को पहले कोई ठोस कदम उठाना पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान को लेकर रणनीतिक विकल्पों पर चर्चा तेज है।
ईरान सरकार का रुख इससे बिल्कुल अलग है। तेहरान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को बाहरी ताकतें हवा दे रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमले किए, जबकि संसद नेतृत्व ने चेतावनी दी कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आम नागरिकों की शिकायतें सुनने को तैयार है, लेकिन हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया।
इस बीच, ईरान के बाहर भी हालात गरमाए हुए हैं। अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में ईरानी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई, जबकि लॉस एंजिलिस में एक मार्च के दौरान तनाव की स्थिति बन गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में मौजूदा संकट केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरे आर्थिक असंतोष से जुड़ा है। रिकॉर्ड महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन, बेरोजगारी और प्रस्तावित कर बढ़ोतरी ने आम लोगों की नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया है। यही कारण है कि देश में सत्ता परिवर्तन और वैकल्पिक नेतृत्व की मांग तेज हो रही है।
वर्तमान हालात में अमेरिका‑ईरान संबंधों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। कूटनीति और टकराव के बीच खड़ा यह संकट न केवल मध्य‑पूर्व, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
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