छत्तीसगढ़ के भिलाई से जुड़ी लेखिका शालिनी वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण साहित्यिक पहचान मिली है। उनकी पुस्तक ‘फीफा की धूम’ का विमोचन 11 जनवरी, विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर कतर स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित एक विशेष समारोह में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण भारत के राजदूत विपुल ने किया।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के उत्सव के रूप में सामने आया। समारोह में कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्य, शिक्षाविद्, साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान भारतीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा।
‘फीफा की धूम’ पुस्तक खेल, समाज और वैश्विक घटनाक्रमों को हिंदी साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास है। पुस्तक का विषय अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन फीफा से जुड़ा होने के साथ-साथ प्रवासी भारतीय दृष्टिकोण को भी सामने लाता है। साहित्यिक जानकारों के अनुसार, यह कृति हिंदी पाठकों को वैश्विक विषयों से जोड़ने का सफल प्रयास करती है।
लेखिका शालिनी वर्मा, मूल रूप से भिलाई (छत्तीसगढ़) की निवासी हैं और पिछले 22 वर्षों से दोहा, कतर में रहकर हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे प्रवासी भारतीय साहित्यकार, संपादक और भाषाविद् के रूप में जानी जाती हैं। विदेश में रहते हुए भी उन्होंने हिंदी लेखन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से निरंतर जुड़ाव बनाए रखा है।
शालिनी वर्मा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत रही हैं। वे न केवल साहित्य लेखन से जुड़ी हैं, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। खाड़ी देशों में हिंदी से जुड़े कई आयोजनों में उनकी भागीदारी उल्लेखनीय रही है।
पुस्तक ‘फीफा की धूम’ का लोकार्पण भारतीय वाणिज्य दूतावास, दुबई में भी एक अलग समारोह के माध्यम से किया गया, जिससे पुस्तक की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और व्यापक हो गई। यह आयोजन प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच हिंदी साहित्य की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रवासी लेखकों की रचनाएं हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और वैश्विक अनुभव प्रदान करती हैं। शालिनी वर्मा का लेखन इसी दिशा में एक सशक्त उदाहरण है, जो भारत से बाहर रहते हुए भी भारतीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत बनाए रखता है।
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