भूपेश बघेल के बयान पर साहू समाज में उबाल, माफी की मांग को लेकर प्रदेशभर में विरोध तेज

बिलासपुर (छ.ग.)

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अरुण साव पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से नाराज समाज ने पुलिस से की शिकायत, 10 दिन का अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक सार्वजनिक टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर दिए गए कथित बयान पर साहू समाज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रदेशभर में विरोध शुरू कर दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे न केवल एक जनप्रतिनिधि का अपमान बताया, बल्कि पूरे समाज की गरिमा से जोड़कर देखा है।

बिलासपुर में साहू समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और लिखित शिकायत सौंपी। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व मुख्यमंत्री अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं दी गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

यह विवाद उस समय सामने आया जब भूपेश बघेल ने हाल ही में बिलासपुर प्रवास के दौरान एक जनसभा में व्यंग्यात्मक अंदाज में उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर टिप्पणी की। बयान के शब्दों और संदर्भ को लेकर साहू समाज का कहना है कि यह टिप्पणी न केवल राजनीतिक आलोचना की सीमा लांघती है, बल्कि सामाजिक अपमान की श्रेणी में आती है।

साहू समाज के जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं का कहना है कि अरुण साव समाज के प्रतिनिधि हैं और संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच से इस तरह की तुलना या कथन समाज की भावनाओं को आहत करता है। जिला साहू संघ के पदाधिकारियों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत या जातिगत टिप्पणी में नहीं बदला जाना चाहिए।

विरोध केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रहा। जशपुर, सक्ती और अन्य जिलों में भी साहू समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपे हैं। जशपुर में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सक्ती जिले में आयोजित प्रेस वार्ता में समाज के नेताओं ने दो टूक कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं दी गई, तो शांतिपूर्ण आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में साहू समाज का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

प्रशासनिक स्तर पर पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच कानून के दायरे में की जाएगी। वहीं, साहू समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सम्मानजनक समाधान नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
06 Jan 2026 By Nitin Trivedi

भूपेश बघेल के बयान पर साहू समाज में उबाल, माफी की मांग को लेकर प्रदेशभर में विरोध तेज

बिलासपुर (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक सार्वजनिक टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर दिए गए कथित बयान पर साहू समाज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रदेशभर में विरोध शुरू कर दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे न केवल एक जनप्रतिनिधि का अपमान बताया, बल्कि पूरे समाज की गरिमा से जोड़कर देखा है।

बिलासपुर में साहू समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और लिखित शिकायत सौंपी। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व मुख्यमंत्री अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं दी गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

यह विवाद उस समय सामने आया जब भूपेश बघेल ने हाल ही में बिलासपुर प्रवास के दौरान एक जनसभा में व्यंग्यात्मक अंदाज में उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर टिप्पणी की। बयान के शब्दों और संदर्भ को लेकर साहू समाज का कहना है कि यह टिप्पणी न केवल राजनीतिक आलोचना की सीमा लांघती है, बल्कि सामाजिक अपमान की श्रेणी में आती है।

साहू समाज के जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं का कहना है कि अरुण साव समाज के प्रतिनिधि हैं और संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच से इस तरह की तुलना या कथन समाज की भावनाओं को आहत करता है। जिला साहू संघ के पदाधिकारियों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत या जातिगत टिप्पणी में नहीं बदला जाना चाहिए।

विरोध केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रहा। जशपुर, सक्ती और अन्य जिलों में भी साहू समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपे हैं। जशपुर में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सक्ती जिले में आयोजित प्रेस वार्ता में समाज के नेताओं ने दो टूक कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं दी गई, तो शांतिपूर्ण आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में साहू समाज का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

प्रशासनिक स्तर पर पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच कानून के दायरे में की जाएगी। वहीं, साहू समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सम्मानजनक समाधान नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।

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