मप्र में दैवेभो-स्थायीकर्मी व्यवस्था समाप्त, 7 कैटेगरी खत्म

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: तीन आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज, छह जिलों में खुलेंगे वन विज्ञान केंद्र

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन, कार्यभारित और स्थायीकर्मी समेत सात कैटेगरी को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब प्रदेश में केवल तीन श्रेणियां—नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी ही रहेंगी। यह फैसला मंगलवार को मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का अंतर समाप्त किया जा रहा है, क्योंकि दोनों की सेवा शर्तें, वेतन और पेंशन लगभग समान हैं। जिन सात श्रेणियों को खत्म किया गया है, उनमें कार्यरत कर्मचारी अपने मौजूदा सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। उनके सेवानिवृत्त होते ही संबंधित पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। यदि भविष्य में किसी विभाग को आवश्यकता होगी, तो उस पद के स्थान पर नियमित पद सृजित कर भर्ती की जाएगी।

कैबिनेट ने यह भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि कार्यभारित कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। अब तक इस संवर्ग में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। सरकार का कहना है कि इस कदम से लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक असमानता समाप्त होगी।

न्यायालयीन मामलों में भी मिलेगी राहत

सरकार के अनुसार, अलग-अलग कर्मचारी श्रेणियों के कारण न्यायालयों में मामलों की सुनवाई के दौरान भ्रम की स्थिति बनती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालतों को यह बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी कि कर्मचारी किस कैटेगरी का है। इससे बार-बार सुनवाई और प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आएगी।

नियमित और संविदा भर्ती पर जोर

सरकार ने साफ किया है कि आगे की भर्तियों में नियमित और संविदा कर्मचारियों पर ही फोकस रहेगा। आउटसोर्स कर्मियों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाएगा, क्योंकि उनकी सेवाएं निजी एजेंसियों के माध्यम से ली जाती हैं।

तीन आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

कैबिनेट बैठक में नर्मदा घाटी विकास विभाग के तहत अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी गई। इससे अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में 71,967 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा।

अन्य अहम फैसले

भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन व रखरखाव के लिए 90.67 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। वहीं, वन विभाग के प्रस्ताव पर प्रदेश के छह जिलों में वन विज्ञान केंद्र स्थापित करने के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि इंदौर के एमवाय अस्पताल का नवनिर्माण 773 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह 1450 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल होगा, जिसमें नर्सिंग हॉस्टल और ऑडिटोरियम भी शामिल रहेगा।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने विमेन T20 ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाली मध्यप्रदेश की तीन खिलाड़ियों को 25-25 लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।

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16 Dec 2025 By ANKITA

मप्र में दैवेभो-स्थायीकर्मी व्यवस्था समाप्त, 7 कैटेगरी खत्म

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मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन, कार्यभारित और स्थायीकर्मी समेत सात कैटेगरी को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब प्रदेश में केवल तीन श्रेणियां—नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी ही रहेंगी। यह फैसला मंगलवार को मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का अंतर समाप्त किया जा रहा है, क्योंकि दोनों की सेवा शर्तें, वेतन और पेंशन लगभग समान हैं। जिन सात श्रेणियों को खत्म किया गया है, उनमें कार्यरत कर्मचारी अपने मौजूदा सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। उनके सेवानिवृत्त होते ही संबंधित पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। यदि भविष्य में किसी विभाग को आवश्यकता होगी, तो उस पद के स्थान पर नियमित पद सृजित कर भर्ती की जाएगी।

कैबिनेट ने यह भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि कार्यभारित कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। अब तक इस संवर्ग में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। सरकार का कहना है कि इस कदम से लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक असमानता समाप्त होगी।

न्यायालयीन मामलों में भी मिलेगी राहत

सरकार के अनुसार, अलग-अलग कर्मचारी श्रेणियों के कारण न्यायालयों में मामलों की सुनवाई के दौरान भ्रम की स्थिति बनती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालतों को यह बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी कि कर्मचारी किस कैटेगरी का है। इससे बार-बार सुनवाई और प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आएगी।

नियमित और संविदा भर्ती पर जोर

सरकार ने साफ किया है कि आगे की भर्तियों में नियमित और संविदा कर्मचारियों पर ही फोकस रहेगा। आउटसोर्स कर्मियों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाएगा, क्योंकि उनकी सेवाएं निजी एजेंसियों के माध्यम से ली जाती हैं।

तीन आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

कैबिनेट बैठक में नर्मदा घाटी विकास विभाग के तहत अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी गई। इससे अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में 71,967 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा।

अन्य अहम फैसले

भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन व रखरखाव के लिए 90.67 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। वहीं, वन विभाग के प्रस्ताव पर प्रदेश के छह जिलों में वन विज्ञान केंद्र स्थापित करने के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि इंदौर के एमवाय अस्पताल का नवनिर्माण 773 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह 1450 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल होगा, जिसमें नर्सिंग हॉस्टल और ऑडिटोरियम भी शामिल रहेगा।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने विमेन T20 ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाली मध्यप्रदेश की तीन खिलाड़ियों को 25-25 लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।

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