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केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक ने की साधारण बस में यात्रा, कहा – जनसेवक का फर्ज है जनता के बीच रहना
Niwari, MP
देश की राजनीति में जब वीवीआईपी संस्कृति पर बहस चल रही है, ऐसे समय में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक का एक सादगीभरा कदम चर्चा का विषय बन गया है। रविवार को मंत्री खटीक टीकमगढ़ से पृथ्वीपुर तक का सफर अनुराग ट्रेवल्स की एक साधारण बस में कर आम जनता के बीच एक सशक्त संदेश दे गए।
टिकट लेने पर अड़े मंत्री, कंडक्टर ने किया मना तो बोले – मैं भी यात्री हूं
बस में सवार होते ही मंत्री खटीक ने टिकट कटवाने की इच्छा जताई। जब कंडक्टर ने उन्हें पहचानकर टिकट देने से इनकार किया तो मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा – “मैं भी इस बस में एक यात्री हूं, मुझे भी टिकट लेना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने नियमानुसार अपना किराया चुकाकर टिकट लिया।
जनता के बीच सहजता से रहना जरूरी: खटीक
सफर के दौरान मीडिया से बात करते हुए मंत्री खटीक ने कहा, "जब आप आमजन की तरह यात्रा करते हैं, तो समाज की हकीकत और जमीनी सच्चाई को नजदीक से समझने का मौका मिलता है। इससे जनता का भरोसा भी बढ़ता है कि उनका प्रतिनिधि उनके साथ खड़ा है।"
साइकिल पंचर बनाने से संसद तक का सफर
डॉ. खटीक का जीवन हमेशा से संघर्षों और सादगी का उदाहरण रहा है। एक समय था जब वे सागर में अपने पिता के साथ साइकिल और स्कूटर पंचर बनाने का काम करते थे। उनके पास एक पुराना स्कूटर था, जिससे वे अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करते थे। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान वे 16 महीने तक सागर और जबलपुर जेल में भी बंद रहे।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक ने की साधारण बस में यात्रा, कहा – जनसेवक का फर्ज है जनता के बीच रहना
Niwari, MP
टिकट लेने पर अड़े मंत्री, कंडक्टर ने किया मना तो बोले – मैं भी यात्री हूं
बस में सवार होते ही मंत्री खटीक ने टिकट कटवाने की इच्छा जताई। जब कंडक्टर ने उन्हें पहचानकर टिकट देने से इनकार किया तो मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा – “मैं भी इस बस में एक यात्री हूं, मुझे भी टिकट लेना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने नियमानुसार अपना किराया चुकाकर टिकट लिया।
जनता के बीच सहजता से रहना जरूरी: खटीक
सफर के दौरान मीडिया से बात करते हुए मंत्री खटीक ने कहा, "जब आप आमजन की तरह यात्रा करते हैं, तो समाज की हकीकत और जमीनी सच्चाई को नजदीक से समझने का मौका मिलता है। इससे जनता का भरोसा भी बढ़ता है कि उनका प्रतिनिधि उनके साथ खड़ा है।"
साइकिल पंचर बनाने से संसद तक का सफर
डॉ. खटीक का जीवन हमेशा से संघर्षों और सादगी का उदाहरण रहा है। एक समय था जब वे सागर में अपने पिता के साथ साइकिल और स्कूटर पंचर बनाने का काम करते थे। उनके पास एक पुराना स्कूटर था, जिससे वे अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करते थे। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान वे 16 महीने तक सागर और जबलपुर जेल में भी बंद रहे।
