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क्या भारत की क्रिप्टो टैक्स नीति में बदलाव की जरूरत है?
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हाल ही में थाईलैंड सरकार ने क्रिप्टो एसेट्स पर बड़ा कदम उठाया है। उसने 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2029 तक क्रिप्टो बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर पाँच साल की टैक्स छूट की घोषणा की।
यह बदलाव पुराने टैक्स ढांचे को बदलता है, जिसमें कर दरें 35% तक हो सकती थीं। ध्यान रहे कि यह छूट केवल सरकारी पंजीकृत एक्सचेंजों के माध्यम से किए गए लेनदेन पर ही लागू होगी। इसका उद्देश्य अनधिकृत विदेशी एक्सचेंजों को रोकना और निवेशकों को सुरक्षित, विनियमित प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित करना है।
थाईलैंड का यह कदम केवल एक उदाहरण नहीं है। इंडोनेशिया में घरेलू एक्सचेंजों पर क्रिप्टो ट्रेडिंग पर सिर्फ 0.21% पूंजीगत लाभ कर लगता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर यह दर 1% है। सिंगापुर, मलेशिया और यूएई में व्यक्तिगत निवेशकों को इस लाभ पर टैक्स नहीं देना पड़ता। जर्मनी और पुर्तगाल में अगर निवेशक क्रिप्टो को एक वर्ष से अधिक समय तक रखते हैं तो उन्हें कर नहीं देना होता। ब्राज़ील में प्रगतिशील कर दरें 15% से 22.5% तक हैं और निवेशक अपने घाटे को आगे समायोजित कर सकते हैं।
दूसरी ओर, भारत में क्रिप्टो एसेट्स की बिक्री पर 30% टैक्स लगाया जाता है। इसके अलावा, निवेशक अपने घाटे को समायोजित नहीं कर सकते और हर लेनदेन पर 1% TDS भी लागू है। मौजूदा नियम घरेलू और विदेशी प्लेटफॉर्म में कोई अंतर नहीं करते। इसका परिणाम यह हुआ कि 2022 के बाद से भारतीय एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेज गिरावट आई है। रिपोर्टों के अनुसार, 90% से अधिक क्रिप्टो वॉल्यूम ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गया है।
भारत सरकार ने 2023 में PMLA के तहत क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं के लिए रिपोर्टिंग दिशानिर्देश जारी किए, लेकिन कई एक्सचेंज अभी भी पंजीकृत नहीं हैं। FIU-India ने हाल ही में 25 प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया।
वास्तव में, कड़े कर नियम निवेशकों को अनियंत्रित ऑफशोर प्लेटफॉर्म की ओर धकेल रहे हैं। थाईलैंड का मॉडल भारत के लिए उपयोगी सबक हो सकता है। यदि सरकार घरेलू एक्सचेंजों के लेनदेन पर कर में राहत देती है, तो यह निवेशकों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाएगा, डेटा संग्रह आसान होगा और निगरानी बेहतर होगी।
2026 का केंद्रीय बजट भारत के लिए एक अवसर है कि वह वैश्विक रुझानों का अध्ययन करे और क्रिप्टो टैक्स नीति में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे निवेशक और देश दोनों लाभान्वित हों।
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यह बदलाव पुराने टैक्स ढांचे को बदलता है, जिसमें कर दरें 35% तक हो सकती थीं। ध्यान रहे कि यह छूट केवल सरकारी पंजीकृत एक्सचेंजों के माध्यम से किए गए लेनदेन पर ही लागू होगी। इसका उद्देश्य अनधिकृत विदेशी एक्सचेंजों को रोकना और निवेशकों को सुरक्षित, विनियमित प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित करना है।
थाईलैंड का यह कदम केवल एक उदाहरण नहीं है। इंडोनेशिया में घरेलू एक्सचेंजों पर क्रिप्टो ट्रेडिंग पर सिर्फ 0.21% पूंजीगत लाभ कर लगता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर यह दर 1% है। सिंगापुर, मलेशिया और यूएई में व्यक्तिगत निवेशकों को इस लाभ पर टैक्स नहीं देना पड़ता। जर्मनी और पुर्तगाल में अगर निवेशक क्रिप्टो को एक वर्ष से अधिक समय तक रखते हैं तो उन्हें कर नहीं देना होता। ब्राज़ील में प्रगतिशील कर दरें 15% से 22.5% तक हैं और निवेशक अपने घाटे को आगे समायोजित कर सकते हैं।
दूसरी ओर, भारत में क्रिप्टो एसेट्स की बिक्री पर 30% टैक्स लगाया जाता है। इसके अलावा, निवेशक अपने घाटे को समायोजित नहीं कर सकते और हर लेनदेन पर 1% TDS भी लागू है। मौजूदा नियम घरेलू और विदेशी प्लेटफॉर्म में कोई अंतर नहीं करते। इसका परिणाम यह हुआ कि 2022 के बाद से भारतीय एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेज गिरावट आई है। रिपोर्टों के अनुसार, 90% से अधिक क्रिप्टो वॉल्यूम ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गया है।
भारत सरकार ने 2023 में PMLA के तहत क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं के लिए रिपोर्टिंग दिशानिर्देश जारी किए, लेकिन कई एक्सचेंज अभी भी पंजीकृत नहीं हैं। FIU-India ने हाल ही में 25 प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया।
वास्तव में, कड़े कर नियम निवेशकों को अनियंत्रित ऑफशोर प्लेटफॉर्म की ओर धकेल रहे हैं। थाईलैंड का मॉडल भारत के लिए उपयोगी सबक हो सकता है। यदि सरकार घरेलू एक्सचेंजों के लेनदेन पर कर में राहत देती है, तो यह निवेशकों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाएगा, डेटा संग्रह आसान होगा और निगरानी बेहतर होगी।
2026 का केंद्रीय बजट भारत के लिए एक अवसर है कि वह वैश्विक रुझानों का अध्ययन करे और क्रिप्टो टैक्स नीति में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे निवेशक और देश दोनों लाभान्वित हों।
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