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जनगणना 2027 की तैयारी तेज: जम्मू-कश्मीर में जून 2026 से हाउस लिस्टिंग, पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया
डिजिटल डेस्क
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, स्व-गणना और जाति गणना सहित कई अहम फैसले
जम्मू-कश्मीर में जनगणना 2027 की तैयारियों ने औपचारिक रफ्तार पकड़ ली है। केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आज हुई उच्चस्तरीय बैठक में जनगणना के रोडमैप, समय-सीमा और मानव संसाधन ढांचे को अंतिम रूप दे दिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने की। इस दौरान यह साफ किया गया कि जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी दी जाएगी।
बैठक में तय हुआ कि पूरे जम्मू-कश्मीर में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) का आयोजन 1 जून से 30 जून 2026 तक किया जाएगा। इसके लिए 15 दिन पहले स्व-गणना प्रक्रिया शुरू होगी। इस संबंध में आवश्यक अधिसूचना 31 जनवरी 2026 तक जारी कर दी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि घर-घर की जानकारी सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से एकत्र की जाए।
मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे जनगणना संचालन में पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और जनगणना संचालन निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय ही इस व्यापक प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (योजना), सभी प्रशासनिक सचिव, संभागीय आयुक्त, जिलों के उपायुक्त और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जनगणना संचालन निदेशक अमित शर्मा ने बैठक में जनगणना 2027 की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) लागू की जाएगी। इसके अलावा, पहली बार जाति गणना को भी जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण, स्व-गणना, हाउस लिस्टिंग और जनसंख्या गणना के चरणों को स्पष्ट समय-सीमा के साथ लागू किया जाएगा।
आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर बैठक में विशेष जोर दिया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (योजना) को गांवों, तहसीलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों से जुड़े आंकड़ों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए। वहीं, आवास एवं शहरी विकास विभाग को स्लम क्षेत्रों से संबंधित विवरण समय पर जनगणना निदेशालय को सौंपने के लिए कहा गया।
मैदानी स्तर पर काम को मजबूत करने के लिए जिला, चार्ज और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर अतिरिक्त मानव संसाधन की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उपायुक्तों को जिला स्तरीय जनगणना प्रकोष्ठ गठित करने और मास्टर ट्रेनर, पर्यवेक्षक व गणनाकर्ताओं की पहचान समय रहते करने के निर्देश दिए गए।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके तहत पंपलेट, पोस्टर, होर्डिंग और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जनगणना 2027 से जम्मू-कश्मीर के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक आंकड़ों को नई दिशा मिलेगी। इससे विकास योजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी। आने वाले महीनों में प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारियों पर प्रशासन का विशेष फोकस रहेगा।
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