कवयित्री नीलम सक्सेना चंद्रा की पुस्तक ‘मेरी आँखों का महताब’ पाठकों के बीच लोकप्रिय, समकालीन हिंदी कविता में बनी चर्चा का विषय

डिजिटल डेस्क

On

संवेदनशील विषय-वस्तु और संवादात्मक भाषा के कारण कविता-संग्रह को मिल रहा व्यापक पाठक समर्थन

समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय कवयित्री एवं लेखिका नीलम सक्सेना चंद्रा का कविता-संग्रह ‘मेरी आँखों का महताब’ लगातार पाठकों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। साहित्यिक मंचों और पाठक समुदायों में यह संग्रह चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रकाशन के बाद से इसे मिल रही पाठकीय प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि संवेदनशील और जीवन से जुड़ी कविता आज भी पाठकों के बीच स्वीकार्य है।

image (5)यह पुस्तक करीब पचास नज़्मों का संग्रह है, जिसमें जीवन के विविध अनुभवों—दुख, अकेलापन, संघर्ष, उम्मीद और आत्मसंघर्ष—को सरल और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत किया गया है। आलोचकों के अनुसार, संग्रह की खासियत यह है कि यह न तो यथार्थ से विमुख होता है और न ही पाठक को निराशा में छोड़ता है। कविताएँ जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच आशा और संतुलन की बात करती हैं।

‘मेरी आँखों का महताब’ शीर्षक को लेकर साहित्यिक हलकों में विशेष चर्चा रही है। महताब, यानी चाँद, यहाँ अंधेरे में रोशनी का प्रतीक बनकर उभरता है। संग्रह की कई कविताओं में यह भाव बार-बार सामने आता है कि संघर्ष के बीच भी आगे बढ़ने का रास्ता मौजूद है। पाठकों का कहना है कि इसी सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण वे इन कविताओं से खुद को जोड़ पाते हैं।

इस कविता-संग्रह का विमोचन पहले लिटफेस्ट 3.0 के दौरान पुणे स्थित यशदा (YASHADA) में किया गया था। इसके बाद विभिन्न साहित्यिक आयोजनों और डिजिटल मंचों पर इसकी चर्चा बढ़ी। किताब को लेकर सोशल मीडिया पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं, जहां कई पाठकों ने इसे “ठहराव देने वाली कविता” बताया है।

नीलम सक्सेना चंद्रा की लेखन-शैली को संवादात्मक माना जाता है। उनकी कविताएँ पाठक से सीधे संवाद करती हैं, न कि उपदेशात्मक लहजे में बात करती हैं। साहित्य समीक्षकों का कहना है कि यही शैली उन्हें समकालीन कवियों की भीड़ से अलग पहचान देती है। संग्रह में शामिल कविताएँ रोज़मर्रा के अनुभवों को केंद्र में रखती हैं, जिससे पाठक उनमें अपने जीवन की झलक देख पाते हैं।

लेखिका का साहित्यिक योगदान भी व्यापक रहा है। अब तक उनके 7 उपन्यास, 9 कहानी-संग्रह, 49 कविता-संग्रह और 16 बाल-साहित्य की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएँ देश-विदेश की कई पत्रिकाओं और साहित्यिक जर्नल्स में प्रकाशित हुई हैं। वर्ष 2015 में एक वर्ष में सर्वाधिक प्रकाशनों के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था।

डिजिटल माध्यमों पर भी नीलम सक्सेना चंद्रा की सक्रियता बनी हुई है। उनके काव्य-पाठ और लाइव सत्रों को सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है। वे साहित्य अकादमी, जश्न-ए-अदब और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर चुकी हैं।

साहित्यिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेरी आँखों का महताब’ की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि आज का पाठक तेज़ सूचना प्रवाह के बीच भी ऐसी रचनाएँ चाहता है, जो उसे भीतर झांकने का अवसर दें। समकालीन हिंदी कविता में यह संग्रह एक शांत, संतुलित और संवेदनशील स्वर के रूप में अपनी जगह बना रहा है। http://neelamsaxenachandra.com/

----------------------------------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

 
 
 

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
31 Dec 2025 By Nitin Trivedi

कवयित्री नीलम सक्सेना चंद्रा की पुस्तक ‘मेरी आँखों का महताब’ पाठकों के बीच लोकप्रिय, समकालीन हिंदी कविता में बनी चर्चा का विषय

डिजिटल डेस्क

समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय कवयित्री एवं लेखिका नीलम सक्सेना चंद्रा का कविता-संग्रह ‘मेरी आँखों का महताब’ लगातार पाठकों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। साहित्यिक मंचों और पाठक समुदायों में यह संग्रह चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रकाशन के बाद से इसे मिल रही पाठकीय प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि संवेदनशील और जीवन से जुड़ी कविता आज भी पाठकों के बीच स्वीकार्य है।

image (5)यह पुस्तक करीब पचास नज़्मों का संग्रह है, जिसमें जीवन के विविध अनुभवों—दुख, अकेलापन, संघर्ष, उम्मीद और आत्मसंघर्ष—को सरल और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत किया गया है। आलोचकों के अनुसार, संग्रह की खासियत यह है कि यह न तो यथार्थ से विमुख होता है और न ही पाठक को निराशा में छोड़ता है। कविताएँ जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच आशा और संतुलन की बात करती हैं।

‘मेरी आँखों का महताब’ शीर्षक को लेकर साहित्यिक हलकों में विशेष चर्चा रही है। महताब, यानी चाँद, यहाँ अंधेरे में रोशनी का प्रतीक बनकर उभरता है। संग्रह की कई कविताओं में यह भाव बार-बार सामने आता है कि संघर्ष के बीच भी आगे बढ़ने का रास्ता मौजूद है। पाठकों का कहना है कि इसी सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण वे इन कविताओं से खुद को जोड़ पाते हैं।

इस कविता-संग्रह का विमोचन पहले लिटफेस्ट 3.0 के दौरान पुणे स्थित यशदा (YASHADA) में किया गया था। इसके बाद विभिन्न साहित्यिक आयोजनों और डिजिटल मंचों पर इसकी चर्चा बढ़ी। किताब को लेकर सोशल मीडिया पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं, जहां कई पाठकों ने इसे “ठहराव देने वाली कविता” बताया है।

नीलम सक्सेना चंद्रा की लेखन-शैली को संवादात्मक माना जाता है। उनकी कविताएँ पाठक से सीधे संवाद करती हैं, न कि उपदेशात्मक लहजे में बात करती हैं। साहित्य समीक्षकों का कहना है कि यही शैली उन्हें समकालीन कवियों की भीड़ से अलग पहचान देती है। संग्रह में शामिल कविताएँ रोज़मर्रा के अनुभवों को केंद्र में रखती हैं, जिससे पाठक उनमें अपने जीवन की झलक देख पाते हैं।

लेखिका का साहित्यिक योगदान भी व्यापक रहा है। अब तक उनके 7 उपन्यास, 9 कहानी-संग्रह, 49 कविता-संग्रह और 16 बाल-साहित्य की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएँ देश-विदेश की कई पत्रिकाओं और साहित्यिक जर्नल्स में प्रकाशित हुई हैं। वर्ष 2015 में एक वर्ष में सर्वाधिक प्रकाशनों के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था।

डिजिटल माध्यमों पर भी नीलम सक्सेना चंद्रा की सक्रियता बनी हुई है। उनके काव्य-पाठ और लाइव सत्रों को सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है। वे साहित्य अकादमी, जश्न-ए-अदब और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर चुकी हैं।

साहित्यिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेरी आँखों का महताब’ की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि आज का पाठक तेज़ सूचना प्रवाह के बीच भी ऐसी रचनाएँ चाहता है, जो उसे भीतर झांकने का अवसर दें। समकालीन हिंदी कविता में यह संग्रह एक शांत, संतुलित और संवेदनशील स्वर के रूप में अपनी जगह बना रहा है। http://neelamsaxenachandra.com/

----------------------------------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

 
 
 
https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6955040ab233f/article-41679

खबरें और भी हैं

छिंदवाड़ा से शुरू होगा CM मोहन यादव का जन-विश्वास दौरा, शिकायतकर्ताओं से सीधे करेंगे बात

टाप न्यूज

छिंदवाड़ा से शुरू होगा CM मोहन यादव का जन-विश्वास दौरा, शिकायतकर्ताओं से सीधे करेंगे बात

7 अगस्त को जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री, CM हेल्पलाइन की चुनिंदा शिकायतों पर जानेंगे कार्रवाई की...
मध्य प्रदेश 
छिंदवाड़ा से शुरू होगा CM मोहन यादव का जन-विश्वास दौरा, शिकायतकर्ताओं से सीधे करेंगे बात

शिव मंदिर में सनग्लासेज पहनकर पूजा करने पर ट्रोल हुईं भूमि पेडनेकर, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने पहुंचीं अभिनेत्री ने पूजा के दौरान नहीं उतारा काला चश्मा, वीडियो सामने आने...
बालीवुड 
शिव मंदिर में सनग्लासेज पहनकर पूजा करने पर ट्रोल हुईं भूमि पेडनेकर, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

‘रामायण’ ट्रेलर की चर्चा के बीच सीता बनीं कंगना की पुरानी तस्वीर वायरल, पोस्ट में लिबरल्स पर कसा तंज

स्कूल के नाटक में माता सीता का किरदार निभा चुकी हैं कंगना रनोट; पुरानी तस्वीर में आशीर्वाद की मुद्रा में...
बालीवुड 
‘रामायण’ ट्रेलर की चर्चा के बीच सीता बनीं कंगना की पुरानी तस्वीर वायरल, पोस्ट में लिबरल्स पर कसा तंज

टीम इंडिया की ऑरेंज हॉकी जर्सी पर बढ़ा विवाद, खिलाड़ियों की सहमति के दावे पर उठे सवाल

वर्ल्ड कप से पहले बदला भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग; रिपोर्ट में खिलाड़ी ने कहा- हमसे नहीं मांगी...
स्पोर्ट्स 
टीम इंडिया की ऑरेंज हॉकी जर्सी पर बढ़ा विवाद, खिलाड़ियों की सहमति के दावे पर उठे सवाल

बिजनेस

त्वचा के अनुकूल मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग, डॉक्टरों ने सामग्री (Ingredients) पर ध्यान देने की दी सलाह त्वचा के अनुकूल मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग, डॉक्टरों ने सामग्री (Ingredients) पर ध्यान देने की दी सलाह
  महिलाओं की मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़ी देखभाल अब केवल अधिक अवशोषण (Absorbency) और लीकेज से सुरक्षा तक सीमित
पीएम मोदी के कथित एडिटेड वीडियो मामले में कार्रवाई तेज, मेटा इंडिया हेड समेत कई पर FIR दर्ज
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सपाट शुरुआत, ऑटो और IT शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा
टेलीग्राम फाउंडर पर रूस का बड़ा एक्शन, अडाणी एंटरप्राइजेज को ₹1,160 करोड़ का घाटा; WhatsApp Web पर आया नया फीचर
शाहरुख खान का नया परफ्यूम बना लोगों का नया फेवरेट, Gen Z से मिल रहे हैं जबरदस्त रिव्यूज़... आखिर कौन सा है ये ब्रांड?
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.