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कोरबा में अमानवीय घटना: तीन दिन से कुत्ते के सिर में फंसा रहा प्लास्टिक का डिब्बा, रेस्क्यू टीम ने बचाई जान
कोरबा (छ.ग.)
हेलीपैड से कॉलोनी तक भूखा-प्यासा भटकता रहा डॉग, देर रात रेस्क्यू के बाद मिली राहत
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आवारा कुत्ते के सिर में पिछले तीन से चार दिनों से प्लास्टिक का डिब्बा फंसा हुआ था। डिब्बे के कारण वह न तो कुछ खा पा रहा था और न ही पानी पी पा रहा था। मंगलवार देर रात पशु रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर उसके सिर से डिब्बा निकाल दिया, जिससे उसकी जान बच सकी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कुत्ता पिछले कई दिनों से हेलीपैड क्षेत्र, अटल आवास और मुड़ापार आवास कॉलोनी के आसपास भटकता देखा जा रहा था। उसके सिर में फंसे डिब्बे को देखकर लोग परेशान थे, लेकिन कुत्ता डर के कारण किसी को पास नहीं आने दे रहा था। माना जा रहा है कि किसी असामाजिक तत्व ने खिलाने के बहाने कुत्ते के सिर पर यह डिब्बा फंसा दिया, जो बाद में निकल नहीं सका।
रेस्क्यू से जुड़े संगठन आरसीआरएस (RCRS) के अध्यक्ष अविनाश यादव ने बताया कि कुत्ते को बचाने के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए थे, लेकिन हर बार वह भाग जाता था। मंगलवार शाम को सूचना मिलने के बाद टीम ने एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान में टीम के सदस्य अतुल बेला, सोनू शाह और सुमीत शामिल थे।
करीब एक घंटे तक इलाके में तलाश के बाद कुत्ता पीएम आवास के पीछे जंगल की ओर भागता मिला। अंधेरे और झाड़ियों के बीच उसे पकड़ना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने सतर्कता और धैर्य के साथ उसे सुरक्षित तरीके से काबू में लिया। इसके बाद सावधानीपूर्वक उसके सिर में फंसे प्लास्टिक के डिब्बे को निकाला गया।
डिब्बा निकलते ही कुत्ते ने राहत की सांस ली और तुरंत जंगल की ओर दौड़ गया। रेस्क्यू टीम का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती, तो भूख, प्यास और घुटन के कारण कुत्ते की हालत गंभीर हो सकती थी और उसकी जान भी जा सकती थी।
इस घटना के बाद पशु प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई क्रूरता का मामला हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बेजुबान के साथ इस तरह का व्यवहार न हो।
आज की ताज़ा ख़बरें और भारत समाचार अपडेट में शामिल यह पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी एक बार फिर समाज को आईना दिखाती है। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा जानवरों के प्रति थोड़ी सी संवेदनशीलता और समय पर मदद कई जिंदगियां बचा सकती है। कोरबा की यह घटना मानवता और जिम्मेदारी की अहम सीख भी देती है।
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आवारा कुत्ते के सिर में पिछले तीन से चार दिनों से प्लास्टिक का डिब्बा फंसा हुआ था। डिब्बे के कारण वह न तो कुछ खा पा रहा था और न ही पानी पी पा रहा था। मंगलवार देर रात पशु रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर उसके सिर से डिब्बा निकाल दिया, जिससे उसकी जान बच सकी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कुत्ता पिछले कई दिनों से हेलीपैड क्षेत्र, अटल आवास और मुड़ापार आवास कॉलोनी के आसपास भटकता देखा जा रहा था। उसके सिर में फंसे डिब्बे को देखकर लोग परेशान थे, लेकिन कुत्ता डर के कारण किसी को पास नहीं आने दे रहा था। माना जा रहा है कि किसी असामाजिक तत्व ने खिलाने के बहाने कुत्ते के सिर पर यह डिब्बा फंसा दिया, जो बाद में निकल नहीं सका।
रेस्क्यू से जुड़े संगठन आरसीआरएस (RCRS) के अध्यक्ष अविनाश यादव ने बताया कि कुत्ते को बचाने के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए थे, लेकिन हर बार वह भाग जाता था। मंगलवार शाम को सूचना मिलने के बाद टीम ने एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान में टीम के सदस्य अतुल बेला, सोनू शाह और सुमीत शामिल थे।
करीब एक घंटे तक इलाके में तलाश के बाद कुत्ता पीएम आवास के पीछे जंगल की ओर भागता मिला। अंधेरे और झाड़ियों के बीच उसे पकड़ना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने सतर्कता और धैर्य के साथ उसे सुरक्षित तरीके से काबू में लिया। इसके बाद सावधानीपूर्वक उसके सिर में फंसे प्लास्टिक के डिब्बे को निकाला गया।
डिब्बा निकलते ही कुत्ते ने राहत की सांस ली और तुरंत जंगल की ओर दौड़ गया। रेस्क्यू टीम का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती, तो भूख, प्यास और घुटन के कारण कुत्ते की हालत गंभीर हो सकती थी और उसकी जान भी जा सकती थी।
इस घटना के बाद पशु प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई क्रूरता का मामला हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बेजुबान के साथ इस तरह का व्यवहार न हो।
आज की ताज़ा ख़बरें और भारत समाचार अपडेट में शामिल यह पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी एक बार फिर समाज को आईना दिखाती है। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा जानवरों के प्रति थोड़ी सी संवेदनशीलता और समय पर मदद कई जिंदगियां बचा सकती है। कोरबा की यह घटना मानवता और जिम्मेदारी की अहम सीख भी देती है।
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