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केरल तट पर रेस्क्यू के लिए चीन ने भारत को कहा शुक्रिया, बोला- मदद हमेशा याद रहेगी
अंतराष्ट्रीय न्यूज
PLA की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में चीनी सैन्य राजनयिक ने भारतीय बचाव अभियान की सराहना की; 2025 में MV Wan Hai 503 में विस्फोट और आग के बाद बचाए गए थे 18 क्रू सदस्य
भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक चले सीमा तनाव के बीच नई दिल्ली से सहयोग का एक अलग संदेश सामने आया है। भारत में चीन के सैन्य राजनयिक यू जियान ने पिछले साल केरल तट के पास समुद्र में हुए एक बड़े बचाव अभियान को याद करते हुए भारतीय पक्ष का आभार जताया है। मंगलवार को नई दिल्ली में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम में उन्होंने जून 2025 में कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 में लगी भीषण आग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों ने संकट में फंसे चीनी नागरिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और चीन इस मानवीय सहायता को याद रखेगा। यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है जब पूर्वी लद्दाख में वर्षों तक चले तनाव के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशें कर रहे हैं।
यह घटना 9 जून 2025 की है। सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 श्रीलंका के कोलंबो से महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह की तरफ जा रहा था। केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर जहाज पर विस्फोट हुआ और कुछ ही देर में कंटेनर वाले हिस्से में भीषण आग फैल गई। स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। जहाज पर कुल 22 क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें आठ चीनी, छह ताइवान के, पांच म्यांमार और तीन इंडोनेशिया के नागरिक थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने तत्काल अभियान शुरू किया और कुल 18 लोगों को समुद्र से सुरक्षित निकाल लिया, जबकि चार क्रू सदस्य लापता रहे। पांच लोगों को चोटें आई थीं और कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इसी ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए चीनी सैन्य राजनयिक ने भारतीय पक्ष के प्रयासों की तारीफ की। उनके बयान में मानवीय सहयोग को दोनों देशों के संबंधों के सकारात्मक उदाहरण के तौर पर पेश किया गया। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार जहाज पर कुल 14 चीनी और ताइवानी नागरिक थे—आठ मुख्यभूमि चीन से और छह ताइवान से। हादसे के तुरंत बाद नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने भी भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की त्वरित और पेशेवर कार्रवाई के लिए आभार जताया था। इसलिए मौजूदा बयान उस पुराने घटनाक्रम को दोबारा याद करने और भारत की मदद को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।
MV Wan Hai 503 पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। विस्फोट के बाद आग जहाज के बीच वाले हिस्से से कंटेनर बे तक फैल गई थी और लगातार धुआं निकल रहा था। कई कंटेनर समुद्र में गिर गए थे। जहाज एक तरफ करीब 10 से 15 डिग्री तक झुक गया था, जिससे उसके पलटने और समुद्री प्रदूषण का खतरा बढ़ गया। कुछ कंटेनरों में खतरनाक सामग्री होने की आशंका के कारण बचाव दल को काफी सावधानी से काम करना पड़ा। भारतीय तटरक्षक बल ने एक साथ खोज, अग्निशमन और जहाज को सुरक्षित रखने का अभियान चलाया। ICG के जहाज समुद्र प्रहरी, सचेत और समर्थ समेत कई संसाधनों को मौके पर लगाया गया था।
घटना की सूचना मिलने के बाद भारतीय एजेंसियों ने आसपास मौजूद जहाजों और विमानों को तुरंत सक्रिय किया था। नौसेना के INS Surat ने समुद्र से बचाए गए क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। 18 लोगों को बचाने के बाद उन्हें न्यू मैंगलोर पोर्ट लाया गया। उस समय भी जहाज पर आग पूरी तरह शांत नहीं हुई थी और कई दिनों तक ऑपरेशन जारी रहा। भारतीय तटरक्षक जहाज लगातार पानी की बौछार कर आग को नियंत्रित करने और जहाज के दूसरे हिस्सों तक फैलने से रोकने की कोशिश करते रहे।
जहाज में बड़ी मात्रा में ईंधन और सैकड़ों कंटेनर मौजूद होने के कारण मामला केवल चालक दल के रेस्क्यू तक सीमित नहीं था। आग के साथ तेल रिसाव और खतरनाक सामग्री के समुद्र में पहुंचने का खतरा भी था। भारतीय समुद्री एजेंसियों ने तटीय इलाकों पर संभावित असर की निगरानी शुरू कर दी थी। समुद्र में गिरे कंटेनर जहाजों और मछुआरों के लिए भी खतरा बन सकते थे। इसी वजह से जहाज को आबादी वाले तटीय क्षेत्र की ओर बहने से रोकना ऑपरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था।
हादसे के अगले ही दिन चीन की तरफ से भारतीय बचाव अभियान की सराहना सामने आई थी। चीनी दूतावास की तत्कालीन प्रवक्ता यू जिंग ने कहा था कि जहाज पर मौजूद 22 लोगों में 14 चीनी और ताइवानी नागरिक थे। उन्होंने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की तेजी से की गई कार्रवाई को पेशेवर बताते हुए धन्यवाद दिया था। साथ ही लापता लोगों की खोज सफल होने और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई गई थी। ताइवान की तरफ से भी भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड को रेस्क्यू के लिए धन्यवाद दिया गया था।
करीब एक साल बाद PLA के कार्यक्रम में इस घटना को फिर याद किया जाना इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों का सबसे बड़ा मुद्दा सीमा विवाद रहा है। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 सैनिकों की जान गई थी। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की। इस घटना के बाद द्विपक्षीय संबंध दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे और वास्तविक नियंत्रण रेखा के कई इलाकों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात कर दिए थे।
भारत का रुख लगातार यह रहा कि सीमा पर शांति के बिना दोनों देशों के व्यापक संबंध सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकते। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक के कुछ लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। इसके बाद सैनिकों के पीछे हटने और पुराने गश्ती अधिकारों को बहाल करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी बदलाव के बाद भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद भी बढ़ना शुरू हुआ।
अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने मतभेदों को संभालने और सीमा पर शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। इसके बाद विदेश मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर और दूसरे कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत बढ़ी। लोगों के बीच संपर्क बहाल करने से जुड़े मुद्दों पर भी धीरे-धीरे कदम उठाए गए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही। सीमा तनाव के कारण वर्षों तक बंद रही यात्रा को दोबारा शुरू करने पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई। सीधी हवाई सेवाओं और वीजा व्यवस्था को सामान्य करने पर भी बातचीत आगे बढ़ी। इन कदमों को दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में व्यावहारिक प्रयास के रूप में देखा गया। हालांकि सीमा से जुड़े सभी विवाद खत्म नहीं हुए हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बनी हुई है।
ऐसे माहौल में चीनी सैन्य राजनयिक की तरफ से भारतीय सेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की खुले तौर पर सराहना कूटनीतिक रूप से भी ध्यान खींचती है। समुद्र में किसी जहाज के संकट में फंसने पर चालक दल की राष्ट्रीयता से अलग हटकर बचाव करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। MV Wan Hai 503 के मामले में भी भारतीय एजेंसियों ने संकट संदेश मिलते ही ऑपरेशन शुरू किया था। आग, विस्फोट और समुद्र में गिरते कंटेनरों के बावजूद 18 लोगों को सुरक्षित निकालना अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
हादसे के बाद कई दिनों तक जहाज को सुरक्षित रखने का काम चलता रहा था। तटरक्षक बल ने आग को नियंत्रित करने के साथ जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी। हेलिकॉप्टर और विमान भी अभियान में लगाए गए। 13 जून को विशेष बचाव दल को जहाज पर उतारने की कार्रवाई की गई थी, ताकि अंदर की स्थिति का आकलन किया जा सके और जहाज को नियंत्रित करने में मदद मिले। आग से कमजोर हो चुके जहाज पर चढ़ना अपने आप में जोखिम भरा था।
MV Wan Hai 503 पर 2,000 टन से ज्यादा ईंधन और बड़ी संख्या में कंटेनर होने की खबरों ने उस समय केरल के तटीय इलाकों में पर्यावरण संबंधी चिंता भी बढ़ा दी थी। समुद्र में किसी बड़े तेल रिसाव की स्थिति में मछली पकड़ने, समुद्री जीवों और तटीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता था। भारतीय एजेंसियों ने इसी वजह से रेस्क्यू के बाद भी ऑपरेशन बंद नहीं किया और जहाज को तट की ओर बहने से रोकने के प्रयास जारी रखे।
भारत और चीन के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्राकृतिक आपदा, समुद्री संकट और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मामलों में सहयोग की गुंजाइश बनी रहती है। चीनी पक्ष की ओर से एक साल पुराने रेस्क्यू ऑपरेशन को PLA के आधिकारिक कार्यक्रम में याद किया जाना इसी मानवीय सहयोग की तरफ इशारा करता है। कार्यक्रम में भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार का भी उल्लेख किया गया और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका की बात कही गई।
नई दिल्ली और बीजिंग के बीच फिलहाल संबंधों को सामान्य करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। सीमा पर सैन्य स्थिति को स्थिर रखना इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। इसके साथ व्यापार, लोगों की आवाजाही, धार्मिक यात्रा, हवाई संपर्क और राजनयिक संवाद भी एजेंडे में हैं। चीन के सैन्य राजनयिक का बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास बहाली भी संबंधों की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जून 2025 के हादसे में भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की कार्रवाई को उस समय चीन और ताइवान दोनों ने सराहा था। अब लगभग एक साल बाद नई दिल्ली में चीनी सैन्य कार्यक्रम के दौरान उसी बचाव अभियान का दोबारा जिक्र हुआ है। MV Wan Hai 503 पर सवार 22 क्रू सदस्यों में से 18 को सुरक्षित निकाला गया था, जबकि चार लापता रहे थे। आग और विस्फोट के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन कई दिनों तक चला और भारतीय समुद्री एजेंसियां जहाज को तट से दूर रखने तथा संभावित पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के काम में लगी रही थीं।
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भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक चले सीमा तनाव के बीच नई दिल्ली से सहयोग का एक अलग संदेश सामने आया है। भारत में चीन के सैन्य राजनयिक यू जियान ने पिछले साल केरल तट के पास समुद्र में हुए एक बड़े बचाव अभियान को याद करते हुए भारतीय पक्ष का आभार जताया है। मंगलवार को नई दिल्ली में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम में उन्होंने जून 2025 में कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 में लगी भीषण आग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों ने संकट में फंसे चीनी नागरिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और चीन इस मानवीय सहायता को याद रखेगा। यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है जब पूर्वी लद्दाख में वर्षों तक चले तनाव के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशें कर रहे हैं।
यह घटना 9 जून 2025 की है। सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 श्रीलंका के कोलंबो से महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह की तरफ जा रहा था। केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर जहाज पर विस्फोट हुआ और कुछ ही देर में कंटेनर वाले हिस्से में भीषण आग फैल गई। स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। जहाज पर कुल 22 क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें आठ चीनी, छह ताइवान के, पांच म्यांमार और तीन इंडोनेशिया के नागरिक थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने तत्काल अभियान शुरू किया और कुल 18 लोगों को समुद्र से सुरक्षित निकाल लिया, जबकि चार क्रू सदस्य लापता रहे। पांच लोगों को चोटें आई थीं और कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इसी ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए चीनी सैन्य राजनयिक ने भारतीय पक्ष के प्रयासों की तारीफ की। उनके बयान में मानवीय सहयोग को दोनों देशों के संबंधों के सकारात्मक उदाहरण के तौर पर पेश किया गया। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार जहाज पर कुल 14 चीनी और ताइवानी नागरिक थे—आठ मुख्यभूमि चीन से और छह ताइवान से। हादसे के तुरंत बाद नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने भी भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की त्वरित और पेशेवर कार्रवाई के लिए आभार जताया था। इसलिए मौजूदा बयान उस पुराने घटनाक्रम को दोबारा याद करने और भारत की मदद को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।
MV Wan Hai 503 पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। विस्फोट के बाद आग जहाज के बीच वाले हिस्से से कंटेनर बे तक फैल गई थी और लगातार धुआं निकल रहा था। कई कंटेनर समुद्र में गिर गए थे। जहाज एक तरफ करीब 10 से 15 डिग्री तक झुक गया था, जिससे उसके पलटने और समुद्री प्रदूषण का खतरा बढ़ गया। कुछ कंटेनरों में खतरनाक सामग्री होने की आशंका के कारण बचाव दल को काफी सावधानी से काम करना पड़ा। भारतीय तटरक्षक बल ने एक साथ खोज, अग्निशमन और जहाज को सुरक्षित रखने का अभियान चलाया। ICG के जहाज समुद्र प्रहरी, सचेत और समर्थ समेत कई संसाधनों को मौके पर लगाया गया था।
घटना की सूचना मिलने के बाद भारतीय एजेंसियों ने आसपास मौजूद जहाजों और विमानों को तुरंत सक्रिय किया था। नौसेना के INS Surat ने समुद्र से बचाए गए क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। 18 लोगों को बचाने के बाद उन्हें न्यू मैंगलोर पोर्ट लाया गया। उस समय भी जहाज पर आग पूरी तरह शांत नहीं हुई थी और कई दिनों तक ऑपरेशन जारी रहा। भारतीय तटरक्षक जहाज लगातार पानी की बौछार कर आग को नियंत्रित करने और जहाज के दूसरे हिस्सों तक फैलने से रोकने की कोशिश करते रहे।
जहाज में बड़ी मात्रा में ईंधन और सैकड़ों कंटेनर मौजूद होने के कारण मामला केवल चालक दल के रेस्क्यू तक सीमित नहीं था। आग के साथ तेल रिसाव और खतरनाक सामग्री के समुद्र में पहुंचने का खतरा भी था। भारतीय समुद्री एजेंसियों ने तटीय इलाकों पर संभावित असर की निगरानी शुरू कर दी थी। समुद्र में गिरे कंटेनर जहाजों और मछुआरों के लिए भी खतरा बन सकते थे। इसी वजह से जहाज को आबादी वाले तटीय क्षेत्र की ओर बहने से रोकना ऑपरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था।
हादसे के अगले ही दिन चीन की तरफ से भारतीय बचाव अभियान की सराहना सामने आई थी। चीनी दूतावास की तत्कालीन प्रवक्ता यू जिंग ने कहा था कि जहाज पर मौजूद 22 लोगों में 14 चीनी और ताइवानी नागरिक थे। उन्होंने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की तेजी से की गई कार्रवाई को पेशेवर बताते हुए धन्यवाद दिया था। साथ ही लापता लोगों की खोज सफल होने और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई गई थी। ताइवान की तरफ से भी भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड को रेस्क्यू के लिए धन्यवाद दिया गया था।
करीब एक साल बाद PLA के कार्यक्रम में इस घटना को फिर याद किया जाना इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों का सबसे बड़ा मुद्दा सीमा विवाद रहा है। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 सैनिकों की जान गई थी। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की। इस घटना के बाद द्विपक्षीय संबंध दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे और वास्तविक नियंत्रण रेखा के कई इलाकों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात कर दिए थे।
भारत का रुख लगातार यह रहा कि सीमा पर शांति के बिना दोनों देशों के व्यापक संबंध सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकते। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक के कुछ लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। इसके बाद सैनिकों के पीछे हटने और पुराने गश्ती अधिकारों को बहाल करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी बदलाव के बाद भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद भी बढ़ना शुरू हुआ।
अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने मतभेदों को संभालने और सीमा पर शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। इसके बाद विदेश मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर और दूसरे कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत बढ़ी। लोगों के बीच संपर्क बहाल करने से जुड़े मुद्दों पर भी धीरे-धीरे कदम उठाए गए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही। सीमा तनाव के कारण वर्षों तक बंद रही यात्रा को दोबारा शुरू करने पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई। सीधी हवाई सेवाओं और वीजा व्यवस्था को सामान्य करने पर भी बातचीत आगे बढ़ी। इन कदमों को दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में व्यावहारिक प्रयास के रूप में देखा गया। हालांकि सीमा से जुड़े सभी विवाद खत्म नहीं हुए हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बनी हुई है।
ऐसे माहौल में चीनी सैन्य राजनयिक की तरफ से भारतीय सेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की खुले तौर पर सराहना कूटनीतिक रूप से भी ध्यान खींचती है। समुद्र में किसी जहाज के संकट में फंसने पर चालक दल की राष्ट्रीयता से अलग हटकर बचाव करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। MV Wan Hai 503 के मामले में भी भारतीय एजेंसियों ने संकट संदेश मिलते ही ऑपरेशन शुरू किया था। आग, विस्फोट और समुद्र में गिरते कंटेनरों के बावजूद 18 लोगों को सुरक्षित निकालना अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
हादसे के बाद कई दिनों तक जहाज को सुरक्षित रखने का काम चलता रहा था। तटरक्षक बल ने आग को नियंत्रित करने के साथ जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी। हेलिकॉप्टर और विमान भी अभियान में लगाए गए। 13 जून को विशेष बचाव दल को जहाज पर उतारने की कार्रवाई की गई थी, ताकि अंदर की स्थिति का आकलन किया जा सके और जहाज को नियंत्रित करने में मदद मिले। आग से कमजोर हो चुके जहाज पर चढ़ना अपने आप में जोखिम भरा था।
MV Wan Hai 503 पर 2,000 टन से ज्यादा ईंधन और बड़ी संख्या में कंटेनर होने की खबरों ने उस समय केरल के तटीय इलाकों में पर्यावरण संबंधी चिंता भी बढ़ा दी थी। समुद्र में किसी बड़े तेल रिसाव की स्थिति में मछली पकड़ने, समुद्री जीवों और तटीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता था। भारतीय एजेंसियों ने इसी वजह से रेस्क्यू के बाद भी ऑपरेशन बंद नहीं किया और जहाज को तट की ओर बहने से रोकने के प्रयास जारी रखे।
भारत और चीन के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्राकृतिक आपदा, समुद्री संकट और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मामलों में सहयोग की गुंजाइश बनी रहती है। चीनी पक्ष की ओर से एक साल पुराने रेस्क्यू ऑपरेशन को PLA के आधिकारिक कार्यक्रम में याद किया जाना इसी मानवीय सहयोग की तरफ इशारा करता है। कार्यक्रम में भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार का भी उल्लेख किया गया और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका की बात कही गई।
नई दिल्ली और बीजिंग के बीच फिलहाल संबंधों को सामान्य करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। सीमा पर सैन्य स्थिति को स्थिर रखना इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। इसके साथ व्यापार, लोगों की आवाजाही, धार्मिक यात्रा, हवाई संपर्क और राजनयिक संवाद भी एजेंडे में हैं। चीन के सैन्य राजनयिक का बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास बहाली भी संबंधों की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जून 2025 के हादसे में भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की कार्रवाई को उस समय चीन और ताइवान दोनों ने सराहा था। अब लगभग एक साल बाद नई दिल्ली में चीनी सैन्य कार्यक्रम के दौरान उसी बचाव अभियान का दोबारा जिक्र हुआ है। MV Wan Hai 503 पर सवार 22 क्रू सदस्यों में से 18 को सुरक्षित निकाला गया था, जबकि चार लापता रहे थे। आग और विस्फोट के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन कई दिनों तक चला और भारतीय समुद्री एजेंसियां जहाज को तट से दूर रखने तथा संभावित पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के काम में लगी रही थीं।
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