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हूतियों की सऊदी बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी, लाल सागर में बढ़ा तनाव
अंतराष्ट्रीय न्यूज
शिपिंग कंपनियों को सऊदी पोर्ट पर माल चढ़ाने-उतारने से बचने को कहा, कई जहाजों ने बदला रास्ता; दूसरी ओर अमेरिका-ईरान संघर्ष में लगातार 11वीं रात हमलों का सिलसिला जारी
मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव अब समुद्री व्यापार के लिए भी नई मुश्किल खड़ी करता दिख रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सऊदी अरब के बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी दी है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने का दावा करते हुए कहा है कि ऐसे जहाज जो सऊदी बंदरगाहों पर माल चढ़ाने या उतारने की गतिविधियों में शामिल होंगे, उन्हें निशाना बनाए जाने का खतरा हो सकता है। इस चेतावनी का असर समुद्री यातायात पर दिखाई देने लगा है। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले आंकड़ों के मुताबिक कई कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों ने लाल सागर में अपना रास्ता बदला है। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में लगातार 11वीं रात भी हमलों की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
हूतियों की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पहले से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बने हुए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करते हुए इसे यमन के खिलाफ लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और नाकेबंदी की प्रतिक्रिया बताया। समूह का दावा है कि सऊदी अरब से जुड़ी समुद्री गतिविधियों को अब निशाने पर रखा जाएगा। चेतावनी केवल सऊदी जहाजों तक सीमित नहीं बताई जा रही, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय जहाजों को भी जोखिम का संकेत दिया गया है जो सऊदी बंदरगाहों से व्यावसायिक संपर्क रखते हैं। इस घोषणा के बाद शिपिंग कंपनियों के सामने सुरक्षा और कारोबारी मार्ग दोनों को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है।
इस धमकी का असर केवल बयान तक सीमित नहीं रहा। समुद्री यातायात के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को कम से कम चार टैंकरों ने लाल सागर में अपनी दिशा बदली। इनमें से दो जहाज स्वेज नहर की ओर मुड़े, जबकि दो अन्य खुले लाल सागर की दिशा में चले गए। एक वाहन ढोने वाला जहाज, जिसने पहले सऊदी अरब के जेद्दा बंदरगाह की ओर जाने का संकेत दिया था, वह भी अदन की खाड़ी में रास्ता बदलता दिखाई दिया। इससे एक दिन पहले सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे तीन टैंकरों ने भी लाल सागर में यू-टर्न लिया था। जहाजों की दिशा में अचानक आए इन बदलावों से साफ है कि शिपिंग कंपनियां खतरे को गंभीरता से ले रही हैं।
हूतियों की चेतावनी का सबसे बड़ा असर सऊदी अरब के तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कारोबार पर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल निर्यातक देशों में शामिल है और उसके पश्चिमी तट पर मौजूद बंदरगाह लाल सागर के रास्ते वैश्विक बाजार से जुड़े हैं। अगर जहाज सुरक्षा कारणों से इन बंदरगाहों से दूरी बनाते हैं या लंबा वैकल्पिक रास्ता चुनते हैं, तो माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं। तेल टैंकरों के लिए रास्ता बदलने का मतलब अतिरिक्त ईंधन खर्च, बीमा लागत में संभावित बढ़ोतरी और डिलीवरी में देरी भी हो सकता है। इसका असर आखिरकार ऊर्जा बाजार तक पहुंच सकता है।
बाब अल-मंदेब इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु है। यह संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसी रास्ते से जहाज स्वेज नहर तक पहुंचते हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का सबसे छोटा प्रमुख समुद्री मार्ग है। यहां सुरक्षा बिगड़ने पर जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता लेना पड़ सकता है। पिछले वर्षों में हूती हमलों के कारण कई बड़ी शिपिंग कंपनियां ऐसा कर चुकी हैं। लंबा रास्ता चुनने से यात्रा में कई दिन जुड़ जाते हैं और माल ढुलाई महंगी हो जाती है।
सऊदी अरब ने हूतियों की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की निंदा की है। रियाद के लिए यह मामला केवल जहाजों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि ऊर्जा निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। हूतियों का कहना है कि उनका कदम यमन पर लंबे समय से चले आ रहे दबाव और हालिया घटनाओं के जवाब में उठाया गया है। दूसरी ओर सऊदी पक्ष इस तरह की धमकी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। हूतियों की घोषणा ने ऐसे समय एक नया मोर्चा खोलने का खतरा पैदा किया है, जब मध्य पूर्व पहले से अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण गंभीर अस्थिरता से गुजर रहा है।
समुद्री तनाव के समानांतर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव भी जारी है। बुधवार तड़के दोनों पक्षों के बीच लगातार 11वीं रात हमलों की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका की ओर से ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी पक्ष से चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह जैसे इलाकों में हमलों की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी सैन्य अभियान से जुड़े दृश्य जारी किए हैं। संघर्ष के लगातार आगे बढ़ने से यह आशंका बढ़ रही है कि सैन्य कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित रहने के बजाय समुद्री मार्गों और आसपास के देशों को भी ज्यादा प्रभावित कर सकती है।
चाबहार और कोनारक का इलाका रणनीतिक रूप से खास माना जाता है। यह ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में अरब सागर और ओमान की खाड़ी के पास स्थित है। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से यहां संपर्क और व्यापार से जुड़ी परियोजनाओं में शामिल रही है। हालांकि किसी सैन्य हमले में वास्तव में कौन-से ठिकाने निशाना बने और कितना नुकसान हुआ, इस पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं। युद्ध जैसी स्थिति में शुरुआती सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल रहती है, इसलिए नुकसान और सैन्य लक्ष्यों से जुड़े दावों को सावधानी से देखा जा रहा है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष और हूतियों की नई धमकी को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखना भी मुश्किल हो रहा है। हूती समूह लंबे समय से ईरान के करीब माना जाता है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ उसकी गतिविधियां लाल सागर में नई सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकती हैं। यदि सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर वास्तविक हमले शुरू होते हैं तो संघर्ष का दायरा तेजी से फैल सकता है। इससे केवल सऊदी अरब और यमन नहीं, बल्कि उन देशों पर भी असर पड़ेगा जिनका तेल और सामान इन समुद्री रास्तों से आता-जाता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है और पश्चिम एशिया उसके प्रमुख ऊर्जा स्रोतों में शामिल है। सऊदी अरब से भारत के लिए तेल लेकर आने वाले टैंकरों के रास्ता बदलने की खबर इस जोखिम को सीधे दिखाती है। Reuters के अनुसार सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे तीन टैंकरों ने हूती चेतावनी के बाद लाल सागर में दिशा बदली। हालांकि किसी जहाज का रास्ता बदलना तत्काल तेल आपूर्ति संकट का संकेत नहीं है, लेकिन यदि ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं तो शिपिंग लागत और डिलीवरी समय पर दबाव बन सकता है।
शिपिंग उद्योग में सबसे पहले असर बीमा और सुरक्षा लागत पर दिखाई दे सकता है। जिस समुद्री इलाके को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, वहां जहाज भेजने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त बीमा प्रीमियम देना पड़ सकता है। जहाजों के चालक दल के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रबंध करने पड़ते हैं। यदि हूतियों की चेतावनी लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियां सऊदी बंदरगाहों के लिए अपने परिचालन की समीक्षा कर सकती हैं। कुछ जहाज पहले ही रास्ता बदल रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह संख्या कितनी बढ़ती है, इस पर वैश्विक व्यापार की नजर रहेगी।
लाल सागर का संकट इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो सकता है क्योंकि मध्य पूर्व का दूसरा प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य भी क्षेत्रीय संघर्ष से प्रभावित होने के जोखिम में रहता है। बाब अल-मंदेब और होर्मुज दोनों ही ऊर्जा और सामान की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि एक ही समय में दोनों क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो कच्चे तेल, एलएनजी और कंटेनर कार्गो की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव तेजी से बढ़ सकता है। हूतियों की नई घोषणा ने इसी दोहरे खतरे की चिंता बढ़ाई है।
हूती समूह पहले भी लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना चुका है। मिसाइलों, ड्रोन और दूसरे हथियारों के इस्तेमाल से हुए हमलों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने जहाजों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के चारों ओर भेजना शुरू किया था। बाद में कुछ कंपनियों ने धीरे-धीरे इस मार्ग पर वापसी की, लेकिन नई धमकी ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस बार चेतावनी खास तौर पर सऊदी बंदरगाहों से संपर्क रखने वाले जहाजों को लेकर है, जिससे खतरे का दायरा अलग तरीके से बढ़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भी हूतियों को चेतावनी दी गई है कि अगर सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकेबंदी को हमलों के जरिए लागू करने की कोशिश हुई तो अमेरिका प्रतिक्रिया दे सकता है। इससे यह संकट और संवेदनशील हो गया है। किसी व्यापारिक जहाज पर हमला होने की स्थिति में अमेरिका की सैन्य प्रतिक्रिया संघर्ष को यमन तक फैला सकती है। पहले भी अमेरिका हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है।
सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर जेद्दा और यानबू जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल सामान्य व्यापार के साथ ऊर्जा से जुड़े परिवहन में भी होता है। अगर अंतरराष्ट्रीय जहाज यहां आने से बचते हैं तो सऊदी अरब को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है। फिलहाल समुद्री यातायात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन जहाजों के रास्ते बदलने की लगातार आ रही खबरों ने जोखिम बढ़ा दिया है।
बुधवार को सामने आए जहाजों के नए रूट से यह भी संकेत मिला कि कंपनियां खतरे का आकलन वास्तविक समय में कर रही हैं। कुछ टैंकरों ने स्वेज की दिशा पकड़ी, जबकि अन्य खुले समुद्र की ओर मुड़ गए। एक दिन पहले भी तीन तेल टैंकरों के यू-टर्न लेने की पुष्टि समुद्री ट्रैकिंग डेटा से हुई थी। हूती समूह ने दावा किया है कि उसकी चेतावनी के कारण कई जहाजों ने अपना रास्ता बदला, हालांकि उसके सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी बीच ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान की जवाबी गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनी हुई है। 11 रातों से जारी हमलों ने सीजफायर की संभावनाओं को पीछे धकेल दिया है। अलग-अलग सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों पर हमलों की खबरें आने के साथ क्षेत्रीय देशों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी पूरे पश्चिम एशिया में फैली है, इसलिए किसी भी जवाबी कार्रवाई का दायरा केवल एक देश तक सीमित नहीं रहने का खतरा बना हुआ है।
हूतियों की धमकी के बाद सबसे तत्काल चिंता लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर है। जहाज मालिक और तेल कंपनियां अब यह देख रही हैं कि सऊदी बंदरगाहों तक पहुंचने में जोखिम कितना है और वैकल्पिक मार्ग आर्थिक रूप से कितने व्यावहारिक होंगे। भारत और चीन के लिए जा रहे सऊदी तेल टैंकरों का रास्ता बदलना इसी बदलती स्थिति का शुरुआती संकेत है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी रहने से समुद्री व्यापार पर दबाव कम होने के बजाय फिलहाल बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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हूतियों की सऊदी बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी, लाल सागर में बढ़ा तनाव
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव अब समुद्री व्यापार के लिए भी नई मुश्किल खड़ी करता दिख रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सऊदी अरब के बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी दी है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने का दावा करते हुए कहा है कि ऐसे जहाज जो सऊदी बंदरगाहों पर माल चढ़ाने या उतारने की गतिविधियों में शामिल होंगे, उन्हें निशाना बनाए जाने का खतरा हो सकता है। इस चेतावनी का असर समुद्री यातायात पर दिखाई देने लगा है। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले आंकड़ों के मुताबिक कई कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों ने लाल सागर में अपना रास्ता बदला है। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में लगातार 11वीं रात भी हमलों की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
हूतियों की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पहले से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बने हुए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करते हुए इसे यमन के खिलाफ लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और नाकेबंदी की प्रतिक्रिया बताया। समूह का दावा है कि सऊदी अरब से जुड़ी समुद्री गतिविधियों को अब निशाने पर रखा जाएगा। चेतावनी केवल सऊदी जहाजों तक सीमित नहीं बताई जा रही, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय जहाजों को भी जोखिम का संकेत दिया गया है जो सऊदी बंदरगाहों से व्यावसायिक संपर्क रखते हैं। इस घोषणा के बाद शिपिंग कंपनियों के सामने सुरक्षा और कारोबारी मार्ग दोनों को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है।
इस धमकी का असर केवल बयान तक सीमित नहीं रहा। समुद्री यातायात के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को कम से कम चार टैंकरों ने लाल सागर में अपनी दिशा बदली। इनमें से दो जहाज स्वेज नहर की ओर मुड़े, जबकि दो अन्य खुले लाल सागर की दिशा में चले गए। एक वाहन ढोने वाला जहाज, जिसने पहले सऊदी अरब के जेद्दा बंदरगाह की ओर जाने का संकेत दिया था, वह भी अदन की खाड़ी में रास्ता बदलता दिखाई दिया। इससे एक दिन पहले सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे तीन टैंकरों ने भी लाल सागर में यू-टर्न लिया था। जहाजों की दिशा में अचानक आए इन बदलावों से साफ है कि शिपिंग कंपनियां खतरे को गंभीरता से ले रही हैं।
हूतियों की चेतावनी का सबसे बड़ा असर सऊदी अरब के तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कारोबार पर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल निर्यातक देशों में शामिल है और उसके पश्चिमी तट पर मौजूद बंदरगाह लाल सागर के रास्ते वैश्विक बाजार से जुड़े हैं। अगर जहाज सुरक्षा कारणों से इन बंदरगाहों से दूरी बनाते हैं या लंबा वैकल्पिक रास्ता चुनते हैं, तो माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं। तेल टैंकरों के लिए रास्ता बदलने का मतलब अतिरिक्त ईंधन खर्च, बीमा लागत में संभावित बढ़ोतरी और डिलीवरी में देरी भी हो सकता है। इसका असर आखिरकार ऊर्जा बाजार तक पहुंच सकता है।
बाब अल-मंदेब इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु है। यह संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसी रास्ते से जहाज स्वेज नहर तक पहुंचते हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का सबसे छोटा प्रमुख समुद्री मार्ग है। यहां सुरक्षा बिगड़ने पर जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता लेना पड़ सकता है। पिछले वर्षों में हूती हमलों के कारण कई बड़ी शिपिंग कंपनियां ऐसा कर चुकी हैं। लंबा रास्ता चुनने से यात्रा में कई दिन जुड़ जाते हैं और माल ढुलाई महंगी हो जाती है।
सऊदी अरब ने हूतियों की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की निंदा की है। रियाद के लिए यह मामला केवल जहाजों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि ऊर्जा निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। हूतियों का कहना है कि उनका कदम यमन पर लंबे समय से चले आ रहे दबाव और हालिया घटनाओं के जवाब में उठाया गया है। दूसरी ओर सऊदी पक्ष इस तरह की धमकी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। हूतियों की घोषणा ने ऐसे समय एक नया मोर्चा खोलने का खतरा पैदा किया है, जब मध्य पूर्व पहले से अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण गंभीर अस्थिरता से गुजर रहा है।
समुद्री तनाव के समानांतर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव भी जारी है। बुधवार तड़के दोनों पक्षों के बीच लगातार 11वीं रात हमलों की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका की ओर से ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी पक्ष से चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह जैसे इलाकों में हमलों की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी सैन्य अभियान से जुड़े दृश्य जारी किए हैं। संघर्ष के लगातार आगे बढ़ने से यह आशंका बढ़ रही है कि सैन्य कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित रहने के बजाय समुद्री मार्गों और आसपास के देशों को भी ज्यादा प्रभावित कर सकती है।
चाबहार और कोनारक का इलाका रणनीतिक रूप से खास माना जाता है। यह ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में अरब सागर और ओमान की खाड़ी के पास स्थित है। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से यहां संपर्क और व्यापार से जुड़ी परियोजनाओं में शामिल रही है। हालांकि किसी सैन्य हमले में वास्तव में कौन-से ठिकाने निशाना बने और कितना नुकसान हुआ, इस पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं। युद्ध जैसी स्थिति में शुरुआती सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल रहती है, इसलिए नुकसान और सैन्य लक्ष्यों से जुड़े दावों को सावधानी से देखा जा रहा है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष और हूतियों की नई धमकी को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखना भी मुश्किल हो रहा है। हूती समूह लंबे समय से ईरान के करीब माना जाता है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ उसकी गतिविधियां लाल सागर में नई सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकती हैं। यदि सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर वास्तविक हमले शुरू होते हैं तो संघर्ष का दायरा तेजी से फैल सकता है। इससे केवल सऊदी अरब और यमन नहीं, बल्कि उन देशों पर भी असर पड़ेगा जिनका तेल और सामान इन समुद्री रास्तों से आता-जाता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है और पश्चिम एशिया उसके प्रमुख ऊर्जा स्रोतों में शामिल है। सऊदी अरब से भारत के लिए तेल लेकर आने वाले टैंकरों के रास्ता बदलने की खबर इस जोखिम को सीधे दिखाती है। Reuters के अनुसार सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे तीन टैंकरों ने हूती चेतावनी के बाद लाल सागर में दिशा बदली। हालांकि किसी जहाज का रास्ता बदलना तत्काल तेल आपूर्ति संकट का संकेत नहीं है, लेकिन यदि ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं तो शिपिंग लागत और डिलीवरी समय पर दबाव बन सकता है।
शिपिंग उद्योग में सबसे पहले असर बीमा और सुरक्षा लागत पर दिखाई दे सकता है। जिस समुद्री इलाके को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, वहां जहाज भेजने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त बीमा प्रीमियम देना पड़ सकता है। जहाजों के चालक दल के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रबंध करने पड़ते हैं। यदि हूतियों की चेतावनी लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियां सऊदी बंदरगाहों के लिए अपने परिचालन की समीक्षा कर सकती हैं। कुछ जहाज पहले ही रास्ता बदल रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह संख्या कितनी बढ़ती है, इस पर वैश्विक व्यापार की नजर रहेगी।
लाल सागर का संकट इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो सकता है क्योंकि मध्य पूर्व का दूसरा प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य भी क्षेत्रीय संघर्ष से प्रभावित होने के जोखिम में रहता है। बाब अल-मंदेब और होर्मुज दोनों ही ऊर्जा और सामान की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि एक ही समय में दोनों क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो कच्चे तेल, एलएनजी और कंटेनर कार्गो की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव तेजी से बढ़ सकता है। हूतियों की नई घोषणा ने इसी दोहरे खतरे की चिंता बढ़ाई है।
हूती समूह पहले भी लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना चुका है। मिसाइलों, ड्रोन और दूसरे हथियारों के इस्तेमाल से हुए हमलों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने जहाजों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के चारों ओर भेजना शुरू किया था। बाद में कुछ कंपनियों ने धीरे-धीरे इस मार्ग पर वापसी की, लेकिन नई धमकी ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस बार चेतावनी खास तौर पर सऊदी बंदरगाहों से संपर्क रखने वाले जहाजों को लेकर है, जिससे खतरे का दायरा अलग तरीके से बढ़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भी हूतियों को चेतावनी दी गई है कि अगर सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकेबंदी को हमलों के जरिए लागू करने की कोशिश हुई तो अमेरिका प्रतिक्रिया दे सकता है। इससे यह संकट और संवेदनशील हो गया है। किसी व्यापारिक जहाज पर हमला होने की स्थिति में अमेरिका की सैन्य प्रतिक्रिया संघर्ष को यमन तक फैला सकती है। पहले भी अमेरिका हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है।
सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर जेद्दा और यानबू जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल सामान्य व्यापार के साथ ऊर्जा से जुड़े परिवहन में भी होता है। अगर अंतरराष्ट्रीय जहाज यहां आने से बचते हैं तो सऊदी अरब को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है। फिलहाल समुद्री यातायात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन जहाजों के रास्ते बदलने की लगातार आ रही खबरों ने जोखिम बढ़ा दिया है।
बुधवार को सामने आए जहाजों के नए रूट से यह भी संकेत मिला कि कंपनियां खतरे का आकलन वास्तविक समय में कर रही हैं। कुछ टैंकरों ने स्वेज की दिशा पकड़ी, जबकि अन्य खुले समुद्र की ओर मुड़ गए। एक दिन पहले भी तीन तेल टैंकरों के यू-टर्न लेने की पुष्टि समुद्री ट्रैकिंग डेटा से हुई थी। हूती समूह ने दावा किया है कि उसकी चेतावनी के कारण कई जहाजों ने अपना रास्ता बदला, हालांकि उसके सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी बीच ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान की जवाबी गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनी हुई है। 11 रातों से जारी हमलों ने सीजफायर की संभावनाओं को पीछे धकेल दिया है। अलग-अलग सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों पर हमलों की खबरें आने के साथ क्षेत्रीय देशों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी पूरे पश्चिम एशिया में फैली है, इसलिए किसी भी जवाबी कार्रवाई का दायरा केवल एक देश तक सीमित नहीं रहने का खतरा बना हुआ है।
हूतियों की धमकी के बाद सबसे तत्काल चिंता लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर है। जहाज मालिक और तेल कंपनियां अब यह देख रही हैं कि सऊदी बंदरगाहों तक पहुंचने में जोखिम कितना है और वैकल्पिक मार्ग आर्थिक रूप से कितने व्यावहारिक होंगे। भारत और चीन के लिए जा रहे सऊदी तेल टैंकरों का रास्ता बदलना इसी बदलती स्थिति का शुरुआती संकेत है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी रहने से समुद्री व्यापार पर दबाव कम होने के बजाय फिलहाल बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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