- Hindi News
- देश विदेश
- संसद में PM मोदी से मिले शरद पवार, सुप्रिया सुले भी रहीं साथ
संसद में PM मोदी से मिले शरद पवार, सुप्रिया सुले भी रहीं साथ
Digital Desk
करीब 20 मिनट की मुलाकात में प्रधानमंत्री को सौंपा पत्र, एक दिन पहले CJP के प्रदर्शनकारियों से मिले थे पवार; NDA से नजदीकी की अटकलों के बीच बैठक पर बढ़ी सियासी चर्चा
संसद के मानसून सत्र के बीच बुधवार को दिल्ली में एक ऐसी राजनीतिक मुलाकात हुई, जिसने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई चर्चा छेड़ दी। NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन में मुलाकात की। उनके साथ बारामती से सांसद और उनकी बेटी सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं। सामने आई जानकारी के मुताबिक बैठक करीब 20 मिनट चली और इस दौरान पवार ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी सौंपा। दोनों नेताओं के बीच किन-किन विषयों पर विस्तार से बात हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि NCP (SP) की ओर से कहा गया कि पवार ने एक दिन पहले जंतर-मंतर पर मिले प्रदर्शनकारियों की मांगें प्रधानमंत्री तक पहुंचाईं। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब शरद पवार की पार्टी और भाजपा के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकी को लेकर पहले से अटकलें चल रही हैं।
संसद भवन में हुई मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं। प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार और सुप्रिया सुले का स्वागत किया। मुलाकात का अंदाज सहज दिखाई दिया, लेकिन राजनीति में तस्वीरों के भी अपने मायने निकाले जाते हैं। खासकर तब, जब महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से NCP (SP) के भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हों। यही वजह रही कि बैठक की खबर सामने आते ही इसे केवल सामान्य राजनीतिक या संसदीय मुलाकात मानने के बजाय संभावित नए समीकरणों से जोड़कर भी देखा जाने लगा। फिलहाल पवार या उनकी पार्टी ने NDA में जाने की कोई घोषणा नहीं की है। पार्टी इससे पहले भी ऐसी अटकलों को खारिज करती रही है।
इस मुलाकात का एक दूसरा पहलू भी है। शरद पवार मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां CJP से जुड़ा प्रदर्शन चल रहा था। उनके साथ सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं। वहां उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी। प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। पवार ने वहां मौजूद लोगों की शिकायतें और मांगें सुनी थीं। इसके ठीक अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात होने के कारण दोनों घटनाक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
NCP (SP) की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ बैठक में पवार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों और उनकी शिकायतों को भी रखा। यानी मुलाकात को केवल संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं है। एक दिन पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात और अगले दिन प्रधानमंत्री तक उनकी बात पहुंचाना बैठक का एक स्पष्ट संदर्भ बताया गया है। हालांकि प्रधानमंत्री और पवार के बीच इसके अलावा राजनीतिक या अन्य मुद्दों पर कोई बातचीत हुई या नहीं, इसका विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा की बड़ी वजह हाल के कुछ घटनाक्रम भी हैं। महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) और भाजपा के बीच रिश्तों को लेकर पिछले कुछ समय से तरह-तरह की अटकलें लगती रही हैं। हाल में पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दी थी। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया समीकरण तैयार हो रहा है। हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन या NDA में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सुप्रिया सुले के हालिया बयानों को भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा गया। परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर उन्होंने कहा था कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान अनुपात में बढ़ोतरी की व्यवस्था होती है तो विरोध का कारण कम हो सकता है। उनके इस रुख को कुछ राजनीतिक हलकों ने केंद्र सरकार के प्रति नरमी के संकेत के रूप में देखा। बाद में सुले ने साफ किया कि पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम आधिकारिक फैसला नहीं लिया है और समर्थन से जुड़ी खबरों को उन्होंने बेबुनियाद बताया।
शरद पवार भारतीय राजनीति के उन नेताओं में रहे हैं जिनके लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं से संवाद बने रहे हैं। वैचारिक और चुनावी विरोध के बावजूद वह अलग-अलग दलों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार के बीच भी पहले कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा अन्य मौकों पर बातचीत हुई है। इसलिए दोनों नेताओं की हर मुलाकात को गठबंधन की दिशा में कदम मान लेना जल्दबाजी होगी। फिर भी मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों ने बुधवार की बैठक को सामान्य मुलाकात से कहीं ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलावों से गुजरी है। पहले शिवसेना में विभाजन हुआ और फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी दो हिस्सों में बंट गई। एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में NCP (SP) के रूप में आगे बढ़ा, जबकि दूसरा खेमा अलग राजनीतिक रास्ते पर चला गया। इन बदलावों के बाद राज्य में गठबंधन की राजनीति काफी जटिल हो चुकी है। ऐसे माहौल में किसी भी बड़े नेता की भाजपा नेतृत्व से मुलाकात तुरंत राजनीतिक अटकलों को जन्म देती है।
शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक रिश्तों में विरोध और व्यक्तिगत संवाद दोनों साथ-साथ दिखाई देते रहे हैं। चुनावी मंचों पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना की है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ। सुप्रिया सुले भी पहले यह कह चुकी हैं कि लोकतंत्र में बातचीत महत्वपूर्ण है। 2023 में भी उन्होंने शरद पवार और मोदी के एक कार्यक्रम में साथ आने को लेकर कहा था कि प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं और लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए।
मौजूदा बैठक को लेकर NDA में शामिल होने की अटकलें इसलिए भी तेज हैं क्योंकि महाराष्ट्र के विपक्षी खेमे में पिछले कुछ समय से राजनीतिक भरोसे को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं की टिप्पणियों के बाद भी NCP (SP) के अगले कदम को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि पार्टी की ओर से ऐसे दावों को नकारते हुए विपक्ष में बने रहने की बात कही गई। इसलिए बुधवार की मुलाकात को किसी औपचारिक राजनीतिक बदलाव की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शरद पवार की मौजूदगी ने एक अलग राजनीतिक संदेश दिया था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सीधे बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिजीत दीपके ने आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बारे में उन्हें जानकारी दी थी। पवार ने मुद्दे को उचित स्तर तक पहुंचाने की बात कही थी। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात हुई और पार्टी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की बातें मोदी तक पहुंचाई गईं।
संसद का मानसून सत्र चलने के कारण दिल्ली में अलग-अलग दलों के नेताओं की मुलाकातें लगातार हो रही हैं। कई महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच बातचीत भी चलती रहती है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का प्रधानमंत्री से मिलना असामान्य नहीं है। लेकिन शरद पवार का राजनीतिक कद, महाराष्ट्र के बदलते समीकरण और NCP (SP) को लेकर हाल में चली चर्चाओं ने इस बैठक को खास बना दिया।
सुप्रिया सुले का बैठक में मौजूद रहना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह लोकसभा में बारामती का प्रतिनिधित्व करती हैं और NCP (SP) के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। पार्टी के संसदीय मामलों और संगठन में उनकी भूमिका अहम है। हाल के दिनों में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके बयानों को भी पार्टी की आगे की रणनीति के संकेत के तौर पर देखा गया है। हालांकि उन्होंने बार-बार यह कहा है कि राजनीतिक मुलाकातों के आधार पर गठबंधन या पार्टी बदलने जैसी अटकलें नहीं लगाई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और पवार के बीच बुधवार की बातचीत का विस्तृत आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है। उपलब्ध जानकारी में पवार की ओर से पत्र सौंपे जाने और प्रदर्शनकारियों की मांगों को सामने रखने की बात प्रमुख है। बैठक करीब 20 मिनट तक चली। इसके बाद भी किसी पक्ष ने NDA में शामिल होने या नए राजनीतिक गठबंधन से जुड़ी कोई घोषणा नहीं की। ऐसे में फिलहाल इसे राजनीतिक संवाद और मुद्दों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने वाली मुलाकात के रूप में ही तथ्यात्मक तौर पर देखा जा सकता है।
महाराष्ट्र में आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से NCP (SP) की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। जयंत पाटिल की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात, परिसीमन जैसे मुद्दों पर सुप्रिया सुले के बयान और अब शरद पवार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात—इन घटनाओं ने अटकलों को जरूर बढ़ाया है। दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व ने अभी तक भाजपा या NDA के साथ जाने का कोई फैसला घोषित नहीं किया है। बुधवार की बैठक के बाद भी दोनों नेताओं के बीच हुई पूरी बातचीत सार्वजनिक नहीं की गई है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
संसद में PM मोदी से मिले शरद पवार, सुप्रिया सुले भी रहीं साथ
Digital Desk
संसद के मानसून सत्र के बीच बुधवार को दिल्ली में एक ऐसी राजनीतिक मुलाकात हुई, जिसने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई चर्चा छेड़ दी। NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन में मुलाकात की। उनके साथ बारामती से सांसद और उनकी बेटी सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं। सामने आई जानकारी के मुताबिक बैठक करीब 20 मिनट चली और इस दौरान पवार ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी सौंपा। दोनों नेताओं के बीच किन-किन विषयों पर विस्तार से बात हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि NCP (SP) की ओर से कहा गया कि पवार ने एक दिन पहले जंतर-मंतर पर मिले प्रदर्शनकारियों की मांगें प्रधानमंत्री तक पहुंचाईं। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब शरद पवार की पार्टी और भाजपा के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकी को लेकर पहले से अटकलें चल रही हैं।
संसद भवन में हुई मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं। प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार और सुप्रिया सुले का स्वागत किया। मुलाकात का अंदाज सहज दिखाई दिया, लेकिन राजनीति में तस्वीरों के भी अपने मायने निकाले जाते हैं। खासकर तब, जब महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से NCP (SP) के भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हों। यही वजह रही कि बैठक की खबर सामने आते ही इसे केवल सामान्य राजनीतिक या संसदीय मुलाकात मानने के बजाय संभावित नए समीकरणों से जोड़कर भी देखा जाने लगा। फिलहाल पवार या उनकी पार्टी ने NDA में जाने की कोई घोषणा नहीं की है। पार्टी इससे पहले भी ऐसी अटकलों को खारिज करती रही है।
इस मुलाकात का एक दूसरा पहलू भी है। शरद पवार मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां CJP से जुड़ा प्रदर्शन चल रहा था। उनके साथ सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं। वहां उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी। प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। पवार ने वहां मौजूद लोगों की शिकायतें और मांगें सुनी थीं। इसके ठीक अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात होने के कारण दोनों घटनाक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
NCP (SP) की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ बैठक में पवार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों और उनकी शिकायतों को भी रखा। यानी मुलाकात को केवल संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं है। एक दिन पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात और अगले दिन प्रधानमंत्री तक उनकी बात पहुंचाना बैठक का एक स्पष्ट संदर्भ बताया गया है। हालांकि प्रधानमंत्री और पवार के बीच इसके अलावा राजनीतिक या अन्य मुद्दों पर कोई बातचीत हुई या नहीं, इसका विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा की बड़ी वजह हाल के कुछ घटनाक्रम भी हैं। महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) और भाजपा के बीच रिश्तों को लेकर पिछले कुछ समय से तरह-तरह की अटकलें लगती रही हैं। हाल में पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दी थी। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया समीकरण तैयार हो रहा है। हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन या NDA में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सुप्रिया सुले के हालिया बयानों को भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा गया। परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर उन्होंने कहा था कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान अनुपात में बढ़ोतरी की व्यवस्था होती है तो विरोध का कारण कम हो सकता है। उनके इस रुख को कुछ राजनीतिक हलकों ने केंद्र सरकार के प्रति नरमी के संकेत के रूप में देखा। बाद में सुले ने साफ किया कि पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम आधिकारिक फैसला नहीं लिया है और समर्थन से जुड़ी खबरों को उन्होंने बेबुनियाद बताया।
शरद पवार भारतीय राजनीति के उन नेताओं में रहे हैं जिनके लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं से संवाद बने रहे हैं। वैचारिक और चुनावी विरोध के बावजूद वह अलग-अलग दलों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार के बीच भी पहले कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा अन्य मौकों पर बातचीत हुई है। इसलिए दोनों नेताओं की हर मुलाकात को गठबंधन की दिशा में कदम मान लेना जल्दबाजी होगी। फिर भी मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों ने बुधवार की बैठक को सामान्य मुलाकात से कहीं ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलावों से गुजरी है। पहले शिवसेना में विभाजन हुआ और फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी दो हिस्सों में बंट गई। एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में NCP (SP) के रूप में आगे बढ़ा, जबकि दूसरा खेमा अलग राजनीतिक रास्ते पर चला गया। इन बदलावों के बाद राज्य में गठबंधन की राजनीति काफी जटिल हो चुकी है। ऐसे माहौल में किसी भी बड़े नेता की भाजपा नेतृत्व से मुलाकात तुरंत राजनीतिक अटकलों को जन्म देती है।
शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक रिश्तों में विरोध और व्यक्तिगत संवाद दोनों साथ-साथ दिखाई देते रहे हैं। चुनावी मंचों पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना की है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ। सुप्रिया सुले भी पहले यह कह चुकी हैं कि लोकतंत्र में बातचीत महत्वपूर्ण है। 2023 में भी उन्होंने शरद पवार और मोदी के एक कार्यक्रम में साथ आने को लेकर कहा था कि प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं और लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए।
मौजूदा बैठक को लेकर NDA में शामिल होने की अटकलें इसलिए भी तेज हैं क्योंकि महाराष्ट्र के विपक्षी खेमे में पिछले कुछ समय से राजनीतिक भरोसे को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं की टिप्पणियों के बाद भी NCP (SP) के अगले कदम को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि पार्टी की ओर से ऐसे दावों को नकारते हुए विपक्ष में बने रहने की बात कही गई। इसलिए बुधवार की मुलाकात को किसी औपचारिक राजनीतिक बदलाव की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शरद पवार की मौजूदगी ने एक अलग राजनीतिक संदेश दिया था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सीधे बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिजीत दीपके ने आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बारे में उन्हें जानकारी दी थी। पवार ने मुद्दे को उचित स्तर तक पहुंचाने की बात कही थी। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात हुई और पार्टी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की बातें मोदी तक पहुंचाई गईं।
संसद का मानसून सत्र चलने के कारण दिल्ली में अलग-अलग दलों के नेताओं की मुलाकातें लगातार हो रही हैं। कई महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच बातचीत भी चलती रहती है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का प्रधानमंत्री से मिलना असामान्य नहीं है। लेकिन शरद पवार का राजनीतिक कद, महाराष्ट्र के बदलते समीकरण और NCP (SP) को लेकर हाल में चली चर्चाओं ने इस बैठक को खास बना दिया।
सुप्रिया सुले का बैठक में मौजूद रहना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह लोकसभा में बारामती का प्रतिनिधित्व करती हैं और NCP (SP) के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। पार्टी के संसदीय मामलों और संगठन में उनकी भूमिका अहम है। हाल के दिनों में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके बयानों को भी पार्टी की आगे की रणनीति के संकेत के तौर पर देखा गया है। हालांकि उन्होंने बार-बार यह कहा है कि राजनीतिक मुलाकातों के आधार पर गठबंधन या पार्टी बदलने जैसी अटकलें नहीं लगाई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और पवार के बीच बुधवार की बातचीत का विस्तृत आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है। उपलब्ध जानकारी में पवार की ओर से पत्र सौंपे जाने और प्रदर्शनकारियों की मांगों को सामने रखने की बात प्रमुख है। बैठक करीब 20 मिनट तक चली। इसके बाद भी किसी पक्ष ने NDA में शामिल होने या नए राजनीतिक गठबंधन से जुड़ी कोई घोषणा नहीं की। ऐसे में फिलहाल इसे राजनीतिक संवाद और मुद्दों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने वाली मुलाकात के रूप में ही तथ्यात्मक तौर पर देखा जा सकता है।
महाराष्ट्र में आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से NCP (SP) की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। जयंत पाटिल की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात, परिसीमन जैसे मुद्दों पर सुप्रिया सुले के बयान और अब शरद पवार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात—इन घटनाओं ने अटकलों को जरूर बढ़ाया है। दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व ने अभी तक भाजपा या NDA के साथ जाने का कोई फैसला घोषित नहीं किया है। बुधवार की बैठक के बाद भी दोनों नेताओं के बीच हुई पूरी बातचीत सार्वजनिक नहीं की गई है।
खबरें और भी हैं
Thank you for voting! Results will be shown after the poll ends.
Thank you for voting! Results will be shown after the poll ends.
