विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

मध्य प्रदेश

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आगर-मालवा और जबलपुर से भोपाल आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने देखी मानसून सत्र की कार्यवाही, मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतांत्रिक संस्थाओं को करीब से समझे नई पीढ़ी

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र देखने बुधवार को आगर-मालवा और जबलपुर से पहुंचे स्कूली विद्यार्थियों के लिए यह दौरा केवल सदन की कार्यवाही देखने तक सीमित नहीं रहा। विधानसभा परिसर में उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी हुई। अलग-अलग स्कूलों से आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने सदन में विधायी प्रक्रिया को करीब से देखा और बाद में मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि पढ़ाई और करियर के साथ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना भी जरूरी है। आज के विद्यार्थी आने वाले समय में समाज और देश की जिम्मेदारी संभालेंगे, इसलिए उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि सरकार कैसे काम करती है, कानून किस प्रक्रिया से बनते हैं और लोकतंत्र में एक नागरिक की भूमिका क्या होती है। विधानसभा भ्रमण के दौरान बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। कई विद्यार्थियों के लिए यह पहला मौका था जब उन्होंने किताबों में पढ़ी विधानसभा और संसदीय प्रक्रिया को सामने से चलते देखा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान आगर-मालवा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थी मौजूद रहे। इनके साथ जबलपुर के स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के करीब 40 विद्यार्थी भी विधानसभा पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने औपचारिक बातचीत तक सीमित रहने के बजाय बच्चों से सीधे उनके अनुभव पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि सदन की कार्यवाही देखकर विद्यार्थियों को कैसा लगा और उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में क्या नया समझा। बच्चों ने बताया कि विधानसभा के भीतर जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग विषयों पर चर्चा करते देखना उनके लिए नया अनुभव रहा। स्कूल की किताबों में विधायिका, सरकार और कानून बनाने की जो प्रक्रिया पढ़ाई जाती है, उसका व्यावहारिक रूप उन्हें पहली बार देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत में कहा कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना जरूरी है। लोकतंत्र केवल चुनाव या मतदान तक सीमित व्यवस्था नहीं है। सरकार की कार्यप्रणाली, विधानसभा की भूमिका, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और कानून बनने की प्रक्रिया को समझना भी जागरूक नागरिक बनने का हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि विधानसभा ऐसी जगह है जहां प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठते हैं, उन पर बहस होती है और सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए विधायक अपने इलाके की समस्याएं और जरूरतें सदन के सामने रखते हैं। इसी प्रक्रिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने आसपास होने वाले सामाजिक और विकास से जुड़े बदलावों को समझने तथा सकारात्मक तरीके से उनमें भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और देश का आने वाला समय आज के विद्यार्थियों के हाथ में है। नई पीढ़ी केवल शिक्षा हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे। लोकतांत्रिक मूल्यों को जानना और उन्हें व्यवहार में अपनाना एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितनी जल्दी शासन व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझेंगे, उतनी ही बेहतर तरीके से भविष्य में समाज के लिए अपनी भूमिका तय कर सकेंगे। राज्य सरकार भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास कर रही है। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि युवा प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकें।

विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे विद्यार्थियों के लिए सदन के भीतर का माहौल खासा दिलचस्प रहा। उन्होंने देखा कि विधानसभा में प्रश्न, चर्चा और विधायी कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है। सदन में पक्ष और विपक्ष की भूमिका क्या होती है, मंत्री सवालों के जवाब किस तरह देते हैं और किसी विषय पर जनप्रतिनिधि अपनी बात कैसे रखते हैं, इन सभी प्रक्रियाओं को विद्यार्थियों ने करीब से समझा। सामान्य तौर पर स्कूली पाठ्यक्रम में लोकतंत्र और विधायिका के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन वास्तविक सदन की कार्यवाही देखना अलग अनुभव था। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने भी इस बात का जिक्र किया कि उन्हें संसदीय लोकतंत्र के बारे में कई ऐसी बातें जानने का मौका मिला, जिन्हें केवल किताबों से समझना मुश्किल था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों की जिज्ञासा की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा को लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण शिक्षण केंद्र भी माना जा सकता है, क्योंकि यहां सरकार और जनप्रतिनिधियों के कामकाज को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। नियम-कानून कैसे तैयार होते हैं, किसी प्रस्ताव पर चर्चा किस तरह होती है और जनता से जुड़े मुद्दे सदन तक कैसे पहुंचते हैं, यह सब देखकर विद्यार्थियों को लोकतंत्र की व्यावहारिक जानकारी मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी यात्राओं से बच्चों में सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समझ बढ़ती है। खासकर स्कूली उम्र में यदि विद्यार्थी इन संस्थाओं को करीब से देखते हैं तो उनके भीतर जिम्मेदार नागरिक बनने की सोच और मजबूत हो सकती है।

आगर-मालवा जिले से आए विद्यार्थियों का यह विधानसभा भ्रमण स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था। आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत के मार्गदर्शन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से 50 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थी भोपाल पहुंचे। बच्चों को विधानसभा भवन दिखाया गया और मानसून सत्र के दौरान चल रही सदन की कार्यवाही देखने का अवसर मिला। ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों से आए कई विद्यार्थियों के लिए भोपाल स्थित विधानसभा का यह पहला दौरा था। उन्होंने सदन की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की बैठने की प्रणाली और विधायी कार्यवाही को काफी उत्सुकता से देखा।

इसी तरह जबलपुर कैंट क्षेत्र से विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के लगभग 40 विद्यार्थी विधानसभा पहुंचे थे। विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान विधानसभा परिसर और सदन की गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान बच्चों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि विधानसभा में वास्तविक बहस और कामकाज देखने के बाद उन्हें यह समझने में मदद मिली कि प्रदेश स्तर पर फैसले किस तरह लिए जाते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर बच्चों ने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की और अपने भ्रमण से जुड़ी बातें बताईं।

विद्यार्थी इस मुलाकात में खाली हाथ नहीं पहुंचे थे। उन्होंने अपनी ओर से तैयार किए गए मॉडल और आकर्षक सीनरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेंट किए। बच्चों द्वारा तैयार की गई इन रचनाओं में उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने इन्हें देखा और विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों, विज्ञान, तकनीक और नवाचार में भी रुचि बनाए रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और नए प्रयोग करने की सोच को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी केवल परीक्षा और अंक तक अपनी सोच सीमित न रखें। समाज में क्या हो रहा है, सरकार की नीतियां किस तरह बनती हैं और नागरिक के तौर पर उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं, इसकी जानकारी भी जरूरी है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की बात कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझे और समाज के विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार रहे।

मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में विभिन्न विधेयकों, प्रदेश की योजनाओं, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही है। ऐसे समय विद्यार्थियों को सदन की कार्यवाही देखने का मौका मिलने से उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तविक रूप में समझने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी देखा कि किसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के विचार अलग हो सकते हैं और इन्हीं मतभेदों के बीच चर्चा के जरिए सदन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सवाल-जवाब और बहस लोकतंत्र का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में बच्चों से कहा कि मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में संवाद और संस्थागत व्यवस्था का महत्व समझना जरूरी है।

प्रदेश में स्कूली और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को शासन और प्रशासन की प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी माने जाते हैं। विधानसभा पहुंचने वाले बच्चों को किताबों से अलग एक वास्तविक अनुभव मिलता है। उन्हें पता चलता है कि विधायक किस तरह जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, सदन के नियम क्यों जरूरी होते हैं और सरकार को अपने फैसलों के लिए किस तरह जवाब देना पड़ता है। आगर-मालवा और जबलपुर के विद्यार्थियों ने भी भ्रमण के दौरान इन्हीं प्रक्रियाओं को करीब से देखा और मुख्यमंत्री से बातचीत में अपनी जिज्ञासाएं तथा अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भविष्य की पढ़ाई और रुचियों को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों की सृजनात्मक सोच और मॉडल तैयार करने की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं में मौजूद प्रतिभा को सही अवसर और दिशा मिलनी चाहिए। विज्ञान, तकनीक, नवाचार, प्रशासन, सामाजिक क्षेत्र या किसी दूसरे पेशे में जाने वाले विद्यार्थी अपने काम के जरिए प्रदेश और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। इसके लिए शिक्षा के साथ जिम्मेदारी और सामाजिक समझ भी उतनी ही जरूरी है।

विधानसभा भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को शासकीय और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों ने सदन की कार्यवाही के साथ यह समझने की कोशिश की कि विधायक अपने क्षेत्र के सवाल किस तरह उठाते हैं और शासन से संबंधित विषयों पर चर्चा कैसे आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाए मॉडल और सीनरी भी उन्हें सौंपे। इस दौरान आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत और जबलपुर कैंट विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में आए विद्यार्थियों ने विधानसभा भ्रमण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

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22 Jul 2026 By Priyanka

विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र देखने बुधवार को आगर-मालवा और जबलपुर से पहुंचे स्कूली विद्यार्थियों के लिए यह दौरा केवल सदन की कार्यवाही देखने तक सीमित नहीं रहा। विधानसभा परिसर में उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी हुई। अलग-अलग स्कूलों से आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने सदन में विधायी प्रक्रिया को करीब से देखा और बाद में मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि पढ़ाई और करियर के साथ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना भी जरूरी है। आज के विद्यार्थी आने वाले समय में समाज और देश की जिम्मेदारी संभालेंगे, इसलिए उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि सरकार कैसे काम करती है, कानून किस प्रक्रिया से बनते हैं और लोकतंत्र में एक नागरिक की भूमिका क्या होती है। विधानसभा भ्रमण के दौरान बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। कई विद्यार्थियों के लिए यह पहला मौका था जब उन्होंने किताबों में पढ़ी विधानसभा और संसदीय प्रक्रिया को सामने से चलते देखा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान आगर-मालवा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थी मौजूद रहे। इनके साथ जबलपुर के स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के करीब 40 विद्यार्थी भी विधानसभा पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने औपचारिक बातचीत तक सीमित रहने के बजाय बच्चों से सीधे उनके अनुभव पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि सदन की कार्यवाही देखकर विद्यार्थियों को कैसा लगा और उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में क्या नया समझा। बच्चों ने बताया कि विधानसभा के भीतर जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग विषयों पर चर्चा करते देखना उनके लिए नया अनुभव रहा। स्कूल की किताबों में विधायिका, सरकार और कानून बनाने की जो प्रक्रिया पढ़ाई जाती है, उसका व्यावहारिक रूप उन्हें पहली बार देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत में कहा कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना जरूरी है। लोकतंत्र केवल चुनाव या मतदान तक सीमित व्यवस्था नहीं है। सरकार की कार्यप्रणाली, विधानसभा की भूमिका, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और कानून बनने की प्रक्रिया को समझना भी जागरूक नागरिक बनने का हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि विधानसभा ऐसी जगह है जहां प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठते हैं, उन पर बहस होती है और सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए विधायक अपने इलाके की समस्याएं और जरूरतें सदन के सामने रखते हैं। इसी प्रक्रिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने आसपास होने वाले सामाजिक और विकास से जुड़े बदलावों को समझने तथा सकारात्मक तरीके से उनमें भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और देश का आने वाला समय आज के विद्यार्थियों के हाथ में है। नई पीढ़ी केवल शिक्षा हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे। लोकतांत्रिक मूल्यों को जानना और उन्हें व्यवहार में अपनाना एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितनी जल्दी शासन व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझेंगे, उतनी ही बेहतर तरीके से भविष्य में समाज के लिए अपनी भूमिका तय कर सकेंगे। राज्य सरकार भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास कर रही है। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि युवा प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकें।

विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे विद्यार्थियों के लिए सदन के भीतर का माहौल खासा दिलचस्प रहा। उन्होंने देखा कि विधानसभा में प्रश्न, चर्चा और विधायी कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है। सदन में पक्ष और विपक्ष की भूमिका क्या होती है, मंत्री सवालों के जवाब किस तरह देते हैं और किसी विषय पर जनप्रतिनिधि अपनी बात कैसे रखते हैं, इन सभी प्रक्रियाओं को विद्यार्थियों ने करीब से समझा। सामान्य तौर पर स्कूली पाठ्यक्रम में लोकतंत्र और विधायिका के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन वास्तविक सदन की कार्यवाही देखना अलग अनुभव था। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने भी इस बात का जिक्र किया कि उन्हें संसदीय लोकतंत्र के बारे में कई ऐसी बातें जानने का मौका मिला, जिन्हें केवल किताबों से समझना मुश्किल था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों की जिज्ञासा की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा को लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण शिक्षण केंद्र भी माना जा सकता है, क्योंकि यहां सरकार और जनप्रतिनिधियों के कामकाज को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। नियम-कानून कैसे तैयार होते हैं, किसी प्रस्ताव पर चर्चा किस तरह होती है और जनता से जुड़े मुद्दे सदन तक कैसे पहुंचते हैं, यह सब देखकर विद्यार्थियों को लोकतंत्र की व्यावहारिक जानकारी मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी यात्राओं से बच्चों में सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समझ बढ़ती है। खासकर स्कूली उम्र में यदि विद्यार्थी इन संस्थाओं को करीब से देखते हैं तो उनके भीतर जिम्मेदार नागरिक बनने की सोच और मजबूत हो सकती है।

आगर-मालवा जिले से आए विद्यार्थियों का यह विधानसभा भ्रमण स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था। आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत के मार्गदर्शन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से 50 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थी भोपाल पहुंचे। बच्चों को विधानसभा भवन दिखाया गया और मानसून सत्र के दौरान चल रही सदन की कार्यवाही देखने का अवसर मिला। ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों से आए कई विद्यार्थियों के लिए भोपाल स्थित विधानसभा का यह पहला दौरा था। उन्होंने सदन की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की बैठने की प्रणाली और विधायी कार्यवाही को काफी उत्सुकता से देखा।

इसी तरह जबलपुर कैंट क्षेत्र से विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के लगभग 40 विद्यार्थी विधानसभा पहुंचे थे। विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान विधानसभा परिसर और सदन की गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान बच्चों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि विधानसभा में वास्तविक बहस और कामकाज देखने के बाद उन्हें यह समझने में मदद मिली कि प्रदेश स्तर पर फैसले किस तरह लिए जाते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर बच्चों ने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की और अपने भ्रमण से जुड़ी बातें बताईं।

विद्यार्थी इस मुलाकात में खाली हाथ नहीं पहुंचे थे। उन्होंने अपनी ओर से तैयार किए गए मॉडल और आकर्षक सीनरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेंट किए। बच्चों द्वारा तैयार की गई इन रचनाओं में उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने इन्हें देखा और विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों, विज्ञान, तकनीक और नवाचार में भी रुचि बनाए रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और नए प्रयोग करने की सोच को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी केवल परीक्षा और अंक तक अपनी सोच सीमित न रखें। समाज में क्या हो रहा है, सरकार की नीतियां किस तरह बनती हैं और नागरिक के तौर पर उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं, इसकी जानकारी भी जरूरी है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की बात कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझे और समाज के विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार रहे।

मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में विभिन्न विधेयकों, प्रदेश की योजनाओं, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही है। ऐसे समय विद्यार्थियों को सदन की कार्यवाही देखने का मौका मिलने से उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तविक रूप में समझने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी देखा कि किसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के विचार अलग हो सकते हैं और इन्हीं मतभेदों के बीच चर्चा के जरिए सदन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सवाल-जवाब और बहस लोकतंत्र का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में बच्चों से कहा कि मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में संवाद और संस्थागत व्यवस्था का महत्व समझना जरूरी है।

प्रदेश में स्कूली और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को शासन और प्रशासन की प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी माने जाते हैं। विधानसभा पहुंचने वाले बच्चों को किताबों से अलग एक वास्तविक अनुभव मिलता है। उन्हें पता चलता है कि विधायक किस तरह जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, सदन के नियम क्यों जरूरी होते हैं और सरकार को अपने फैसलों के लिए किस तरह जवाब देना पड़ता है। आगर-मालवा और जबलपुर के विद्यार्थियों ने भी भ्रमण के दौरान इन्हीं प्रक्रियाओं को करीब से देखा और मुख्यमंत्री से बातचीत में अपनी जिज्ञासाएं तथा अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भविष्य की पढ़ाई और रुचियों को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों की सृजनात्मक सोच और मॉडल तैयार करने की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं में मौजूद प्रतिभा को सही अवसर और दिशा मिलनी चाहिए। विज्ञान, तकनीक, नवाचार, प्रशासन, सामाजिक क्षेत्र या किसी दूसरे पेशे में जाने वाले विद्यार्थी अपने काम के जरिए प्रदेश और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। इसके लिए शिक्षा के साथ जिम्मेदारी और सामाजिक समझ भी उतनी ही जरूरी है।

विधानसभा भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को शासकीय और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों ने सदन की कार्यवाही के साथ यह समझने की कोशिश की कि विधायक अपने क्षेत्र के सवाल किस तरह उठाते हैं और शासन से संबंधित विषयों पर चर्चा कैसे आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाए मॉडल और सीनरी भी उन्हें सौंपे। इस दौरान आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत और जबलपुर कैंट विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में आए विद्यार्थियों ने विधानसभा भ्रमण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-met-the-brilliant-students-who-reached-the/article-59523

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