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बंगाल विधानसभा में बजट चर्चा के बीच हंगामा, TMC विधायक कुणाल घोष को मार्शलों ने बाहर निकाला
Digital Desk
बागी खेमे के विधायक अखरुज्जमां के बोलने के दौरान शुरू हुआ विरोध, स्पीकर के निर्देश के बाद भी नहीं थमा हंगामा; पूरे दिन के लिए सदन से निलंबित किए गए कुणाल घोष
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को बजट पर चर्चा के दौरान अचानक माहौल गरमा गया। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष और पार्टी के बागी खेमे से जुड़े विधायक अखरुज्जमां को लेकर सदन में ऐसा विवाद बढ़ा कि मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, अखरुज्जमां जैसे ही अपना भाषण देने के लिए खड़े हुए, कुणाल घोष ने उनका विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही प्रभावित होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कुणाल को अपनी जगह पर लौटने और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। इसके बाद उन्हें सदन से बाहर कराने का आदेश दिया गया और मार्शल उन्हें बाहर ले गए।
घटनाक्रम बजट पर चल रही चर्चा के दौरान शुरू हुआ। अखरुज्जमां को अपनी बात रखने का मौका मिला था, लेकिन उनके बोलना शुरू करते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। कुणाल घोष अपनी सीट से उठकर आगे पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। लगातार व्यवधान के कारण अखरुज्जमां अपना भाषण ठीक तरीके से जारी नहीं रख सके। सदन के भीतर सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच ही इस तरह की तनातनी से कुछ समय के लिए असामान्य स्थिति बन गई। मामला केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा और सदन में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की बात भी सामने आई।
स्पीकर बिमान बनर्जी ने सदन में व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की। उन्होंने कुणाल घोष को कई बार अपनी निर्धारित सीट पर वापस जाने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि चेतावनी के बावजूद विरोध जारी रहा और अखरुज्जमां के भाषण में लगातार व्यवधान पड़ता रहा। बजट जैसी महत्वपूर्ण चर्चा के बीच सदन का कामकाज प्रभावित होते देख स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद विधानसभा के मार्शलों को कुणाल घोष को सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया गया। मार्शल उनके पास पहुंचे और उन्हें बाहर ले गए।
इस घटनाक्रम के दौरान सदन में कुछ देर तक काफी शोर रहा। एक तरफ अखरुज्जमां को बोलने का मौका देने की कोशिश की जा रही थी, दूसरी तरफ विरोध और नारेबाजी जारी थी। विधानसभा में किसी सदस्य को अपनी बात रखने से रोकने की स्थिति को लेकर स्पीकर ने नाराजगी जताई। संसदीय व्यवस्था के तहत किसी विधायक को बोलने का समय मिलने पर दूसरे सदस्यों से अपेक्षा रहती है कि वे नियमों के दायरे में अपनी आपत्ति दर्ज कराएं। यहां मामला लगातार बढ़ता चला गया और आखिरकार स्पीकर को मार्शलों की मदद लेनी पड़ी।
कुणाल घोष के खिलाफ कार्रवाई केवल उन्हें सदन से बाहर भेजने तक सीमित नहीं रही। उन्हें दिनभर की कार्यवाही के लिए निलंबित कर दिया गया। यानी उस दिन की बाकी कार्यवाही में वह हिस्सा नहीं ले सके। विधानसभा में अनुशासन और सदन की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी स्पीकर के पास होती है और लगातार निर्देश नहीं मानने की स्थिति में सदस्य के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है। बुधवार को हुए घटनाक्रम में भी इसी अधिकार के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई।
विवाद के केंद्र में रहे अखरुज्जमां तृणमूल कांग्रेस के भीतर बागी रुख से जुड़े विधायक बताए जा रहे हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके भाषण को लेकर पहले से तनाव की स्थिति होने की बात कही जा रही है। जैसे ही उन्हें बोलने का अवसर मिला, विरोध सामने आ गया। हालांकि सदन में किसी राजनीतिक मतभेद या पार्टी के अंदरूनी विवाद के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलाने की जिम्मेदारी सभी सदस्यों की होती है। बुधवार की घटना में यही राजनीतिक तनाव सीधे सदन के भीतर दिखाई दिया।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में है और पार्टी के भीतर होने वाले मतभेद अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। विधानसभा के भीतर किसी बागी या असंतुष्ट विधायक के रुख का असर सदन की कार्यवाही पर पड़ना अलग राजनीतिक संकेत भी देता है। अखरुज्जमां को लेकर सामने आए विरोध ने इसी अंदरूनी खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा उनका भाषण रोकने की कोशिश और उसके बाद स्पीकर की ओर से की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रही।
कुणाल घोष को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थक नेताओं में गिना जाता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह अपने मुखर बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। सदन में बुधवार को भी उनका आक्रामक विरोध चर्चा का विषय बन गया। विधानसभा के भीतर हुई घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हुई कि सत्तारूढ़ दल के अंदर मौजूद मतभेद अब सदन की कार्यवाही के दौरान भी खुलकर सामने आ रहे हैं। बागी खेमे से जुड़े विधायक के भाषण के दौरान विरोध ने इस राजनीतिक टकराव को और साफ कर दिया।
बजट सत्र किसी भी विधानसभा के सबसे महत्वपूर्ण सत्रों में माना जाता है। इस दौरान सरकार की आय, खर्च, योजनाओं और आने वाले वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर चर्चा होती है। विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी बजट के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी बात रखते हैं। ऐसे में किसी सदस्य के भाषण के दौरान लगातार व्यवधान होने से चर्चा प्रभावित होती है। बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बजट पर बहस के बीच राजनीतिक विवाद हावी हो गया और कुछ समय तक मूल चर्चा पीछे छूट गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने पहले मौखिक निर्देश देकर स्थिति संभालने की कोशिश की। जानकारी के अनुसार, कुणाल घोष को बार-बार अपनी जगह पर लौटने को कहा गया। इसके बावजूद वह विरोध करते रहे। जब निर्देशों का असर नहीं हुआ तो स्पीकर ने मार्शलों को बुलाने का फैसला किया। आमतौर पर विधानसभा में मार्शलों का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी सदस्य को बाहर जाने का आदेश दिया गया हो और वह स्वयं सदन छोड़ने के लिए तैयार न हो या कार्यवाही में लगातार व्यवधान बना रहे।
मार्शलों के पहुंचने के बाद भी सदन में तनाव की स्थिति बनी रही। कुणाल को वहां से हटाकर बाहर ले जाया गया। इस दौरान अन्य विधायकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और कुछ देर के लिए पूरा ध्यान बजट चर्चा से हटकर इसी घटनाक्रम पर केंद्रित हो गया। राजनीतिक रूप से यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि टकराव किसी विपक्षी विधायक और सत्ता पक्ष के बीच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच पैदा हुआ।
अखरुज्जमां का भाषण शुरू होते ही विरोध किए जाने से वह अपनी बात सहज तरीके से नहीं रख सके। सदन में लगातार नारे और शोर के कारण उनका भाषण बाधित हुआ। स्पीकर की कोशिश थी कि संबंधित विधायक को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और सदन तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़े। मगर हंगामे के चलते इसमें रुकावट आई। बाद में कुणाल के खिलाफ कार्रवाई के बाद सदन की आगे की कार्यवाही को चलाने की कोशिश की गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में इससे पहले भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और निलंबन की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार स्थिति अलग इसलिए रही क्योंकि विवाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच दिखाई दिया। राजनीतिक दलों में आंतरिक मतभेद आमतौर पर पार्टी बैठकों या सार्वजनिक बयानों के जरिए सामने आते हैं, लेकिन जब वही तनाव विधानसभा के भीतर पहुंचता है तो उसका सीधा असर सदन के कामकाज पर पड़ता है।
कुणाल घोष को पूरे दिन के लिए निलंबित किए जाने के बाद वह उस दिन की बाकी बजट चर्चा और विधानसभा की अन्य कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके। स्पीकर की कार्रवाई ने साफ किया कि किसी विधायक को आवंटित समय में बोलने से रोकने और बार-बार दिए गए निर्देशों की अनदेखी करने पर सदन अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है। वहीं, अखरुज्जमां और तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर भी इस घटनाक्रम के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है।
घटना के समय विधानसभा के भीतर मौजूद सदस्यों के सामने अचानक बदली स्थिति को संभालना चुनौती बन गया था। बजट पर चल रही सामान्य चर्चा कुछ ही मिनटों में नारेबाजी और राजनीतिक टकराव में बदल गई। स्पीकर की चेतावनी, कुणाल घोष का विरोध जारी रहना और फिर मार्शलों का सदन में पहुंचना—पूरा घटनाक्रम तेजी से हुआ। दिनभर के निलंबन के आदेश के बाद कुणाल को विधानसभा की उस दिन की शेष कार्यवाही से बाहर रखा गया।
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बंगाल विधानसभा में बजट चर्चा के बीच हंगामा, TMC विधायक कुणाल घोष को मार्शलों ने बाहर निकाला
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को बजट पर चर्चा के दौरान अचानक माहौल गरमा गया। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष और पार्टी के बागी खेमे से जुड़े विधायक अखरुज्जमां को लेकर सदन में ऐसा विवाद बढ़ा कि मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, अखरुज्जमां जैसे ही अपना भाषण देने के लिए खड़े हुए, कुणाल घोष ने उनका विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही प्रभावित होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कुणाल को अपनी जगह पर लौटने और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। इसके बाद उन्हें सदन से बाहर कराने का आदेश दिया गया और मार्शल उन्हें बाहर ले गए।
घटनाक्रम बजट पर चल रही चर्चा के दौरान शुरू हुआ। अखरुज्जमां को अपनी बात रखने का मौका मिला था, लेकिन उनके बोलना शुरू करते ही विरोध की आवाजें उठने लगीं। कुणाल घोष अपनी सीट से उठकर आगे पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। लगातार व्यवधान के कारण अखरुज्जमां अपना भाषण ठीक तरीके से जारी नहीं रख सके। सदन के भीतर सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच ही इस तरह की तनातनी से कुछ समय के लिए असामान्य स्थिति बन गई। मामला केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा और सदन में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने की बात भी सामने आई।
स्पीकर बिमान बनर्जी ने सदन में व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की। उन्होंने कुणाल घोष को कई बार अपनी निर्धारित सीट पर वापस जाने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि चेतावनी के बावजूद विरोध जारी रहा और अखरुज्जमां के भाषण में लगातार व्यवधान पड़ता रहा। बजट जैसी महत्वपूर्ण चर्चा के बीच सदन का कामकाज प्रभावित होते देख स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद विधानसभा के मार्शलों को कुणाल घोष को सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया गया। मार्शल उनके पास पहुंचे और उन्हें बाहर ले गए।
इस घटनाक्रम के दौरान सदन में कुछ देर तक काफी शोर रहा। एक तरफ अखरुज्जमां को बोलने का मौका देने की कोशिश की जा रही थी, दूसरी तरफ विरोध और नारेबाजी जारी थी। विधानसभा में किसी सदस्य को अपनी बात रखने से रोकने की स्थिति को लेकर स्पीकर ने नाराजगी जताई। संसदीय व्यवस्था के तहत किसी विधायक को बोलने का समय मिलने पर दूसरे सदस्यों से अपेक्षा रहती है कि वे नियमों के दायरे में अपनी आपत्ति दर्ज कराएं। यहां मामला लगातार बढ़ता चला गया और आखिरकार स्पीकर को मार्शलों की मदद लेनी पड़ी।
कुणाल घोष के खिलाफ कार्रवाई केवल उन्हें सदन से बाहर भेजने तक सीमित नहीं रही। उन्हें दिनभर की कार्यवाही के लिए निलंबित कर दिया गया। यानी उस दिन की बाकी कार्यवाही में वह हिस्सा नहीं ले सके। विधानसभा में अनुशासन और सदन की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी स्पीकर के पास होती है और लगातार निर्देश नहीं मानने की स्थिति में सदस्य के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है। बुधवार को हुए घटनाक्रम में भी इसी अधिकार के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई।
विवाद के केंद्र में रहे अखरुज्जमां तृणमूल कांग्रेस के भीतर बागी रुख से जुड़े विधायक बताए जा रहे हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके भाषण को लेकर पहले से तनाव की स्थिति होने की बात कही जा रही है। जैसे ही उन्हें बोलने का अवसर मिला, विरोध सामने आ गया। हालांकि सदन में किसी राजनीतिक मतभेद या पार्टी के अंदरूनी विवाद के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलाने की जिम्मेदारी सभी सदस्यों की होती है। बुधवार की घटना में यही राजनीतिक तनाव सीधे सदन के भीतर दिखाई दिया।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में है और पार्टी के भीतर होने वाले मतभेद अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। विधानसभा के भीतर किसी बागी या असंतुष्ट विधायक के रुख का असर सदन की कार्यवाही पर पड़ना अलग राजनीतिक संकेत भी देता है। अखरुज्जमां को लेकर सामने आए विरोध ने इसी अंदरूनी खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा उनका भाषण रोकने की कोशिश और उसके बाद स्पीकर की ओर से की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रही।
कुणाल घोष को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थक नेताओं में गिना जाता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह अपने मुखर बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। सदन में बुधवार को भी उनका आक्रामक विरोध चर्चा का विषय बन गया। विधानसभा के भीतर हुई घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हुई कि सत्तारूढ़ दल के अंदर मौजूद मतभेद अब सदन की कार्यवाही के दौरान भी खुलकर सामने आ रहे हैं। बागी खेमे से जुड़े विधायक के भाषण के दौरान विरोध ने इस राजनीतिक टकराव को और साफ कर दिया।
बजट सत्र किसी भी विधानसभा के सबसे महत्वपूर्ण सत्रों में माना जाता है। इस दौरान सरकार की आय, खर्च, योजनाओं और आने वाले वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर चर्चा होती है। विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी बजट के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी बात रखते हैं। ऐसे में किसी सदस्य के भाषण के दौरान लगातार व्यवधान होने से चर्चा प्रभावित होती है। बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बजट पर बहस के बीच राजनीतिक विवाद हावी हो गया और कुछ समय तक मूल चर्चा पीछे छूट गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने पहले मौखिक निर्देश देकर स्थिति संभालने की कोशिश की। जानकारी के अनुसार, कुणाल घोष को बार-बार अपनी जगह पर लौटने को कहा गया। इसके बावजूद वह विरोध करते रहे। जब निर्देशों का असर नहीं हुआ तो स्पीकर ने मार्शलों को बुलाने का फैसला किया। आमतौर पर विधानसभा में मार्शलों का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी सदस्य को बाहर जाने का आदेश दिया गया हो और वह स्वयं सदन छोड़ने के लिए तैयार न हो या कार्यवाही में लगातार व्यवधान बना रहे।
मार्शलों के पहुंचने के बाद भी सदन में तनाव की स्थिति बनी रही। कुणाल को वहां से हटाकर बाहर ले जाया गया। इस दौरान अन्य विधायकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और कुछ देर के लिए पूरा ध्यान बजट चर्चा से हटकर इसी घटनाक्रम पर केंद्रित हो गया। राजनीतिक रूप से यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि टकराव किसी विपक्षी विधायक और सत्ता पक्ष के बीच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच पैदा हुआ।
अखरुज्जमां का भाषण शुरू होते ही विरोध किए जाने से वह अपनी बात सहज तरीके से नहीं रख सके। सदन में लगातार नारे और शोर के कारण उनका भाषण बाधित हुआ। स्पीकर की कोशिश थी कि संबंधित विधायक को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और सदन तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़े। मगर हंगामे के चलते इसमें रुकावट आई। बाद में कुणाल के खिलाफ कार्रवाई के बाद सदन की आगे की कार्यवाही को चलाने की कोशिश की गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में इससे पहले भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और निलंबन की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार स्थिति अलग इसलिए रही क्योंकि विवाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच दिखाई दिया। राजनीतिक दलों में आंतरिक मतभेद आमतौर पर पार्टी बैठकों या सार्वजनिक बयानों के जरिए सामने आते हैं, लेकिन जब वही तनाव विधानसभा के भीतर पहुंचता है तो उसका सीधा असर सदन के कामकाज पर पड़ता है।
कुणाल घोष को पूरे दिन के लिए निलंबित किए जाने के बाद वह उस दिन की बाकी बजट चर्चा और विधानसभा की अन्य कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके। स्पीकर की कार्रवाई ने साफ किया कि किसी विधायक को आवंटित समय में बोलने से रोकने और बार-बार दिए गए निर्देशों की अनदेखी करने पर सदन अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है। वहीं, अखरुज्जमां और तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर भी इस घटनाक्रम के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है।
घटना के समय विधानसभा के भीतर मौजूद सदस्यों के सामने अचानक बदली स्थिति को संभालना चुनौती बन गया था। बजट पर चल रही सामान्य चर्चा कुछ ही मिनटों में नारेबाजी और राजनीतिक टकराव में बदल गई। स्पीकर की चेतावनी, कुणाल घोष का विरोध जारी रहना और फिर मार्शलों का सदन में पहुंचना—पूरा घटनाक्रम तेजी से हुआ। दिनभर के निलंबन के आदेश के बाद कुणाल को विधानसभा की उस दिन की शेष कार्यवाही से बाहर रखा गया।
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