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CLAT 2026 टॉपर विवाद: FIR के घेरे में लीगलऐज (टॉपरैंकर्स), क्या फाउंडर्स पर बढ़ेगा कानूनी शिकंजा?
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AIR-1 छात्रा से कथित दबाव में वीडियो बयान का आरोप, जोधपुर में दर्ज FIR से कोचिंग इंडस्ट्री में हलचल
FIR के अनुसार, आरोप है कि CLAT 2026 की टॉपर छात्रा पर दबाव बनाकर एक वीडियो रिकॉर्ड कराया गया, जिसमें उससे यह कहलवाया गया कि वह लॉ प्रेप टूटोरियल की छात्रा नहीं रही। शिकायत में दावा किया गया है कि यह बयान अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के दबाव में दिलवाया गया।
लॉ प्रेप टूटोरियल का कहना है कि छात्रा ने उनके Online CLAT Coaching OG Batch में पढ़ाई की थी, जो टॉप 50 CLAT अभ्यर्थियों के लिए डिजाइन किया गया विशेष प्रोग्राम है। इसके अलावा, छात्रा द्वारा उनके मॉक टेस्ट, गेम चेंजर किट और स्टडी मटीरियल के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।
FIR दर्ज कराने की वजह
शिकायत के मुताबिक, कथित वीडियो बयान का इस्तेमाल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रचार सामग्री में किया गया, जिससे छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया गया और लॉ प्रेप टूटोरियल की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
FIR में किन-किन के नाम?
FIR में कुल छह लोगों के नाम शामिल हैं—
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हर्ष गर्गानी – डायरेक्टर, लीगलऐज (टॉपरैंकर्स)
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करण मेहता – डायरेक्टर, लीगलऐज (टॉपरैंकर्स)
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नीरज नागरशेठ – डायरेक्टर, लीगलऐज (टॉपरैंकर्स)
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गौरव गोयल – डायरेक्टर, लीगलऐज (टॉपरैंकर्स)
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गीताली गुप्ता – CLAT 2026 AIR-1
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जगदीश कुमार गुप्ता – छात्रा के पिता
लॉ प्रेप टूटोरियल ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य किसी छात्रा को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कथित तौर पर अपनाई गई संस्थागत प्रक्रियाओं को कानूनी दायरे में लाना है।
क्या इस मामले में जेल हो सकती है?
कानूनी प्रक्रिया के तहत—
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पुलिस जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर सकती है
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अदालत मामले पर संज्ञान ले सकती है
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आरोप सिद्ध होने की स्थिति में सजा या जेल की संभावना बन सकती है
हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों पर निर्भर करेगा।
इस विवाद को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आरोपों में कहा गया है कि—
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देश की टॉप रैंक होल्डर छात्रा पर दबाव डाला गया
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उसके शैक्षणिक सफर का इस्तेमाल मार्केटिंग टूल के रूप में किया गया
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छात्रों और अभिभावकों को भ्रामक संदेश दिया गया
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला सिर्फ कोचिंग प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों के शोषण और भरोसे के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बन सकता है।
अब पूरे प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है, जिसमें डिजिटल डेटा, वीडियो और लिखित दस्तावेजों की पड़ताल शामिल है। आगे की कार्रवाई अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
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