एआई नीति से कक्षा तक: असली चुनौती अब अमल की है

Digital desk

भारत ने शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को जगह देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सवाल यह नहीं है कि बच्चों को एआई सिखाया जाए या नहीं। असली सवाल है—क्या हम एआई को देश के हर स्कूल की वास्तविक कक्षा तक पहुंचा पाएंगे? क्योंकि पाठ्यक्रम में एआई जोड़ना आसान हिस्सा है। उसे एक शिक्षक के हाथ में उपयोगी बनाना कहीं बड़ी चुनौती है।

एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के सामने कई सवाल हैं—एआई कैसे पढ़ाएं? कौन-से उपकरण इस्तेमाल करें? अगर इंटरनेट या संसाधन सीमित हों तो क्या करें? और प्रशिक्षण के बाद कैसे पता चले कि शिक्षक वास्तव में एआई का उपयोग कर रहे हैं? यहीं से हमारी असली परीक्षा शुरू होती है।

पहला निवेश तकनीक नहीं, शिक्षक होना चाहिए

एआई की चर्चा अक्सर प्रयोगशाला, उपकरण और सॉफ्टवेयर से शुरू होती है। लेकिन स्कूल की कक्षा में सबसे महत्वपूर्ण तकनीक नहीं, शिक्षक होता है। हर शिक्षक को एआई विशेषज्ञ बनाने की जरूरत नहीं है। जरूरत है उसे इतना सक्षम बनाने की कि वह एआई को अपने रोजमर्रा के शिक्षण कार्य में समझदारी से इस्तेमाल कर सके—पाठ योजना बनाने, प्रश्नोत्तरी तैयार करने, कठिन विषय को अलग तरीके से समझाने या विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अभ्यास सामग्री बनाने में। साथ ही शिक्षक को यह भी समझना होगा कि एआई हमेशा सही उत्तर नहीं देता। उसके उत्तरों की जांच, आंकड़ों की गोपनीयता, पक्षपात और जिम्मेदार उपयोग को समझना उतना ही जरूरी है।
एआई-सक्षम विद्यालयों की शुरुआत एआई-सक्षम शिक्षकों से होगी।

मध्य प्रदेश से मिली सीख

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यह बात केवल सिद्धांत नहीं है। मध्य प्रदेश में लगभग 17,449 शिक्षकों को, कक्षा 6–12 के स्तर पर, सभी 52 जिलों में प्रशिक्षण देने के अनुभव ने हमें जमीन पर कई महत्वपूर्ण बातें सिखाईं।
•⁠  ⁠पहली सीख यह रही कि उपकरण से पहले समझ जरूरी है। शिक्षकों को एआई की बुनियादी अवधारणाओं के साथ पक्षपात, भ्रामक उत्तर और आंकड़ों की गोपनीयता जैसे विषयों से परिचित कराया गया।
•⁠  ⁠दूसरी, शिक्षक तब तेजी से जुड़ते हैं जब उन्हें एआई का सीधा उपयोग दिखाई देता है। प्रशिक्षण में चैटजीपीटी, नोटबुकएलएम और ऑटोड्रॉ जैसे उपकरणों के माध्यम से पाठ-सार, प्रश्नोत्तरी, विचार-मानचित्र और अन्य शिक्षण सामग्री तैयार कराई गई।
•⁠  ⁠तीसरी सीख शायद सबसे महत्वपूर्ण है—सिर्फ प्रदर्शन काफी नहीं है। जब शिक्षक खुद निर्देश तैयार करते हैं, परिणाम देखते हैं और उसमें सुधार करते हैं, तभी आत्मविश्वास पैदा होता है।
•⁠  ⁠और चौथी—एआई का जिम्मेदार उपयोग शुरुआत से ही प्रशिक्षण का हिस्सा होना चाहिए।
प्रशिक्षण के बाद असली सवाल
किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता यह नहीं होनी चाहिए कि कितने शिक्षकों ने प्रमाणपत्र प्राप्त किया। सवाल होना चाहिए—प्रशिक्षण के 30, 60 और 90 दिन बाद कितने शिक्षक एआई का उपयोग कर रहे हैं? इसे शिक्षक द्वारा तैयार एआई-सहायित पाठ योजना, प्रश्नोत्तरी या कक्षा गतिविधि जैसे वास्तविक उदाहरणों से मापा जा सकता है।
प्रशिक्षण एक शुरुआत है; वास्तविक सफलता उसके बाद होने वाले उपयोग में है।

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पहले एआई की सोच, फिर एआई के उपकरण

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हमें बच्चों को केवल एआई उपकरण चलाना नहीं सिखाना चाहिए। उन्हें अवलोकन, तार्किक चिंतन, समस्या-समाधान, पैटर्न पहचान और आलोचनात्मक सोच जैसी क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है। क्योंकि आज का एआई उपकरण कल बदल जाएगा, लेकिन सोचने और सवाल पूछने की क्षमता हमेशा उपयोगी रहेगी।
सरकारी स्कूलों के लिए एआई शिक्षा का मॉडल महंगे बुनियादी ढांचे से शुरू करने की जरूरत नहीं है। शुरुआत मौजूदा शिक्षकों, विषयों, कक्षाओं और उपलब्ध डिजिटल संसाधनों से की जा सकती है। हमें छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए, उससे सीखना चाहिए, मॉडल में सुधार करना चाहिए और फिर उसे बड़े स्तर पर लागू करना चाहिए।
मध्य प्रदेश का अनुभव यह बताता है कि बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण संभव है। लेकिन प्रशिक्षण केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब आएगा जब शिक्षक प्रशिक्षण के बाद भी एआई का प्रयोग करते रहें और उसका असर कक्षा में दिखाई दे। अंततः एआई शिक्षा की सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने स्कूलों ने एआई को पाठ्यक्रम में शामिल किया। यह इस बात से मापी जाएगी कि कितने शिक्षक उसे अपनी कक्षा में सार्थक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं और कितने विद्यार्थी उससे बेहतर सीख रहे हैं।
एआई साक्षरता केवल पाठ्यक्रम में एआई शामिल करने से सार्वभौमिक नहीं होगी। यह तब सार्वभौमिक होगी, जब हम उन शिक्षकों की क्षमता बनाएंगे जो उस पाठ्यक्रम को कक्षा तक पहुंचाते हैं।
यही है—एआई नीति से एआई अभ्यास तक की असली यात्रा।

लेखक परिचय
आशीष मित्तल : निदेशक,  (आई-एआईआर) 

आशीष मित्तल शिक्षा क्षेत्र में 20 वर्षों के अनुभव वाले शिक्षा एवं एआई विशेषज्ञ हैं। वे इंस्टीट्यूट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रिसर्च (आई-एआईआर) के निदेशक हैं और शिक्षा नीति, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा एआई शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 17,449 शिक्षकों के एआई प्रशिक्षण सहित बड़े स्तर के शिक्षा कार्यक्रमों के उनके अनुभव ने उन्हें एआई को नीति से कक्षा तक ले जाने की व्यावहारिक चुनौतियों की गहरी समझ दी है।

www.dainikjagranmpcg.com
20 Aug 2026 By दैनिक जागरण

एआई नीति से कक्षा तक: असली चुनौती अब अमल की है

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एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के सामने कई सवाल हैं—एआई कैसे पढ़ाएं? कौन-से उपकरण इस्तेमाल करें? अगर इंटरनेट या संसाधन सीमित हों तो क्या करें? और प्रशिक्षण के बाद कैसे पता चले कि शिक्षक वास्तव में एआई का उपयोग कर रहे हैं? यहीं से हमारी असली परीक्षा शुरू होती है।

पहला निवेश तकनीक नहीं, शिक्षक होना चाहिए

एआई की चर्चा अक्सर प्रयोगशाला, उपकरण और सॉफ्टवेयर से शुरू होती है। लेकिन स्कूल की कक्षा में सबसे महत्वपूर्ण तकनीक नहीं, शिक्षक होता है। हर शिक्षक को एआई विशेषज्ञ बनाने की जरूरत नहीं है। जरूरत है उसे इतना सक्षम बनाने की कि वह एआई को अपने रोजमर्रा के शिक्षण कार्य में समझदारी से इस्तेमाल कर सके—पाठ योजना बनाने, प्रश्नोत्तरी तैयार करने, कठिन विषय को अलग तरीके से समझाने या विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अभ्यास सामग्री बनाने में। साथ ही शिक्षक को यह भी समझना होगा कि एआई हमेशा सही उत्तर नहीं देता। उसके उत्तरों की जांच, आंकड़ों की गोपनीयता, पक्षपात और जिम्मेदार उपयोग को समझना उतना ही जरूरी है।
एआई-सक्षम विद्यालयों की शुरुआत एआई-सक्षम शिक्षकों से होगी।

मध्य प्रदेश से मिली सीख

यह बात केवल सिद्धांत नहीं है। मध्य प्रदेश में लगभग 17,449 शिक्षकों को, कक्षा 6–12 के स्तर पर, सभी 52 जिलों में प्रशिक्षण देने के अनुभव ने हमें जमीन पर कई महत्वपूर्ण बातें सिखाईं।
•⁠  ⁠पहली सीख यह रही कि उपकरण से पहले समझ जरूरी है। शिक्षकों को एआई की बुनियादी अवधारणाओं के साथ पक्षपात, भ्रामक उत्तर और आंकड़ों की गोपनीयता जैसे विषयों से परिचित कराया गया।
•⁠  ⁠दूसरी, शिक्षक तब तेजी से जुड़ते हैं जब उन्हें एआई का सीधा उपयोग दिखाई देता है। प्रशिक्षण में चैटजीपीटी, नोटबुकएलएम और ऑटोड्रॉ जैसे उपकरणों के माध्यम से पाठ-सार, प्रश्नोत्तरी, विचार-मानचित्र और अन्य शिक्षण सामग्री तैयार कराई गई।
•⁠  ⁠तीसरी सीख शायद सबसे महत्वपूर्ण है—सिर्फ प्रदर्शन काफी नहीं है। जब शिक्षक खुद निर्देश तैयार करते हैं, परिणाम देखते हैं और उसमें सुधार करते हैं, तभी आत्मविश्वास पैदा होता है।
•⁠  ⁠और चौथी—एआई का जिम्मेदार उपयोग शुरुआत से ही प्रशिक्षण का हिस्सा होना चाहिए।
प्रशिक्षण के बाद असली सवाल
किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता यह नहीं होनी चाहिए कि कितने शिक्षकों ने प्रमाणपत्र प्राप्त किया। सवाल होना चाहिए—प्रशिक्षण के 30, 60 और 90 दिन बाद कितने शिक्षक एआई का उपयोग कर रहे हैं? इसे शिक्षक द्वारा तैयार एआई-सहायित पाठ योजना, प्रश्नोत्तरी या कक्षा गतिविधि जैसे वास्तविक उदाहरणों से मापा जा सकता है।
प्रशिक्षण एक शुरुआत है; वास्तविक सफलता उसके बाद होने वाले उपयोग में है।

पहले एआई की सोच, फिर एआई के उपकरण

हमें बच्चों को केवल एआई उपकरण चलाना नहीं सिखाना चाहिए। उन्हें अवलोकन, तार्किक चिंतन, समस्या-समाधान, पैटर्न पहचान और आलोचनात्मक सोच जैसी क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है। क्योंकि आज का एआई उपकरण कल बदल जाएगा, लेकिन सोचने और सवाल पूछने की क्षमता हमेशा उपयोगी रहेगी।
सरकारी स्कूलों के लिए एआई शिक्षा का मॉडल महंगे बुनियादी ढांचे से शुरू करने की जरूरत नहीं है। शुरुआत मौजूदा शिक्षकों, विषयों, कक्षाओं और उपलब्ध डिजिटल संसाधनों से की जा सकती है। हमें छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए, उससे सीखना चाहिए, मॉडल में सुधार करना चाहिए और फिर उसे बड़े स्तर पर लागू करना चाहिए।
मध्य प्रदेश का अनुभव यह बताता है कि बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण संभव है। लेकिन प्रशिक्षण केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब आएगा जब शिक्षक प्रशिक्षण के बाद भी एआई का प्रयोग करते रहें और उसका असर कक्षा में दिखाई दे। अंततः एआई शिक्षा की सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने स्कूलों ने एआई को पाठ्यक्रम में शामिल किया। यह इस बात से मापी जाएगी कि कितने शिक्षक उसे अपनी कक्षा में सार्थक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं और कितने विद्यार्थी उससे बेहतर सीख रहे हैं।
एआई साक्षरता केवल पाठ्यक्रम में एआई शामिल करने से सार्वभौमिक नहीं होगी। यह तब सार्वभौमिक होगी, जब हम उन शिक्षकों की क्षमता बनाएंगे जो उस पाठ्यक्रम को कक्षा तक पहुंचाते हैं।
यही है—एआई नीति से एआई अभ्यास तक की असली यात्रा।

लेखक परिचय
आशीष मित्तल : निदेशक,  (आई-एआईआर) 

आशीष मित्तल शिक्षा क्षेत्र में 20 वर्षों के अनुभव वाले शिक्षा एवं एआई विशेषज्ञ हैं। वे इंस्टीट्यूट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रिसर्च (आई-एआईआर) के निदेशक हैं और शिक्षा नीति, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा एआई शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 17,449 शिक्षकों के एआई प्रशिक्षण सहित बड़े स्तर के शिक्षा कार्यक्रमों के उनके अनुभव ने उन्हें एआई को नीति से कक्षा तक ले जाने की व्यावहारिक चुनौतियों की गहरी समझ दी है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/from-ai-policy-to-the-classroom-the-real-challenge-now/article-61857

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