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तिरुवनंतपुरम नगर निगम ने BJP पर लगाया 19.7 लाख का जुर्माना, PM मोदी के दौरे में अवैध फ्लेक्स बोर्ड का मामला
नेशनल न्यूज
BJP का ही मेयर होने के बावजूद कार्रवाई, हाईकोर्ट आदेशों के उल्लंघन पर पुलिस केस दर्ज
तिरुवनंतपुरम। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुश्किलों में घिर गई है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से फ्लेक्स बोर्ड लगाने के मामले में BJP पर 19.7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। खास बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब नगर निगम में BJP का ही मेयर पद पर है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान शहर के कई इलाकों, खासकर पालियम जंक्शन से पुलिमूडु जंक्शन तक फुटपाथों पर बड़े पैमाने पर फ्लेक्स बोर्ड लगाए गए थे। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ। नगर निगम सचिव की शिकायत के आधार पर कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन में BJP जिला अध्यक्ष करमना जयन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फ्लेक्स बोर्ड लगाने के दौरान केरल हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों और स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना) और धारा 285 (सार्वजनिक रास्तों पर खतरा और बाधा उत्पन्न करना) के तहत दर्ज किया है। इसके अलावा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(b) भी लगाई गई है, जो जनता को असुविधा और खतरे से जुड़ी है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अवैध फ्लेक्स बोर्ड हटाने के लिए BJP नेताओं को पहले ही निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मजबूरन जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया गया। निगम का दावा है कि यह कदम पारदर्शी प्रशासन और नियमों के समान पालन के तहत उठाया गया है।
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि 26 दिसंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम में पहली बार BJP का मेयर चुना गया था। भाजपा के वीवी राजेश ने 51 वोटों के साथ मेयर पद संभाला था, जिससे 45 साल से चला आ रहा वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का कब्जा खत्म हुआ। ऐसे में अपनी ही पार्टी के खिलाफ नगर निगम की यह कार्रवाई राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केरल में BJP की बढ़ती सियासी मौजूदगी के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता का भी परीक्षण है। विपक्षी दल इसे BJP के “दोहरे मापदंड” से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि नगर निगम का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं।
फिलहाल, मामले की जांच पुलिस कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। यह देखना अहम होगा कि इस प्रकरण का असर राज्य की राजनीति और नगर निगम प्रशासन पर किस रूप में पड़ता है।
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