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ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले—चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से और बिगड़े रिश्ते
अंतराष्ट्रीय न्यूज
कनाडा के चीन से बढ़ते व्यापार और मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट पर असहमति के बीच वॉशिंगटन-ओटावा संबंधों में नई तल्खी
वॉशिंगटन डीसी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कनाडा को लेकर बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर मौजूदा हालात बने रहे तो चीन “एक साल के भीतर ही कनाडा को खा जाएगा।” ट्रम्प की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अमेरिकी ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का खुलकर विरोध कर रहे हैं और बीजिंग के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत कर रहे हैं।
क्या कहा ट्रम्प ने?
ट्रम्प ने कहा कि कनाडा, अमेरिका के बजाय चीन के साथ कारोबार बढ़ा रहा है, जो उसके लिए घातक साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रुख उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है। ट्रम्प के अनुसार, “हम कनाडा को सुरक्षा और आर्थिक सुविधाएं देते हैं, लेकिन वह चीन की ओर झुक रहा है।”
विवाद की जड़ क्या है?
तनाव की एक बड़ी वजह कनाडा और चीन के बीच हालिया व्यापार समझौते हैं। प्रधानमंत्री कार्नी 13 से 17 जनवरी के बीच चीन दौरे पर थे, जहां कई अहम करार हुए। इनमें चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर कनाडा द्वारा लगाए गए टैरिफ में बड़ी कटौती शामिल है। पहले यह टैरिफ 100% था, जिसे घटाकर 6.1% किया गया है। इसके बदले चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर लगाए गए भारी जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी है।
यह फैसला अमेरिका को खटक रहा है, क्योंकि 2024 में कनाडा ने अमेरिका के साथ मिलकर ही चीनी ईवी पर सख्त टैरिफ लगाए थे। अब नीति में इस बदलाव को ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी हितों के खिलाफ मान रहा है।
गोल्डन डोम पर क्यों टकराव?
अमेरिका का ‘गोल्डन डोम’ प्रोजेक्ट इजराइल के आयरन डोम की तर्ज पर तैयार किया जा रहा विशाल मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जिसकी लागत करीब 175 अरब डॉलर बताई जा रही है। इसमें हजारों सैटेलाइट्स के जरिए मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही नष्ट करने की योजना है। ट्रम्प इस परियोजना को अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी ने इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताया है।
दावोस से बढ़ी तल्खी
तनाव तब और बढ़ गया जब दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कार्नी ने ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ पर भाषण देते हुए बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की। ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया और कहा कि कनाडा को अमेरिका का “धन्यवाद” करना चाहिए। इसके जवाब में कार्नी ने साफ कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से आगे बढ़ रहा है।
पहले भी भिड़ चुके हैं दोनों नेता
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प और कार्नी आमने-सामने आए हों। ग्रीनलैंड और नाटो से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों के बयान टकरा चुके हैं। ट्रम्प पहले ही कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने की बात कह चुके हैं, जिसे कार्नी सिरे से खारिज कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर मतभेद आने वाले समय में अमेरिका-कनाडा संबंधों को और जटिल बना सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच संवाद जारी है, लेकिन बयानबाजी ने रिश्तों में खटास साफ कर दी है।
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