थियानमेन स्क्वायर पर गोली न चलाने की वजह बताने वाला चीनी सैन्य अफसर का वीडियो 35 साल बाद लीक

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1989 के छात्र आंदोलन से जुड़ा PLA जनरल शू छिनशियान का कोर्ट मार्शल वीडियो सामने आया, सैन्य आदेश मानने से इनकार की कहानी उजागर

चीन के 1989 के थियानमेन स्क्वायर आंदोलन से जुड़ा एक संवेदनशील और गोपनीय वीडियो 35 साल बाद लीक होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। यह वीडियो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के तत्कालीन जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का है, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने लोकतंत्र समर्थक छात्रों पर गोली चलाने का आदेश क्यों नहीं माना।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब छह घंटे का वीडियो पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ, जिसका स्रोत अब तक स्पष्ट नहीं है। वीडियो को अब तक यूट्यूब पर 13 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इसे थियानमेन आंदोलन के इतिहासकार वू रेनहुआ ने साझा किया, जिन्होंने इसे उस दौर की सैन्य असहमति का अहम दस्तावेज बताया है।

वीडियो में जनरल शू छिनशियान कहते हैं कि थियानमेन स्क्वायर पर चल रहा आंदोलन कोई हिंसक विद्रोह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक जन आंदोलन था, जिसे बातचीत और राजनीतिक समाधान के जरिए सुलझाया जा सकता था। उन्होंने साफ कहा कि वे अपने जीवन में ऐसा आदेश नहीं देना चाहते थे, जिससे निर्दोष छात्रों की जान जाए और वे इतिहास में अपराधी बन जाएं।

साल 1989 में चीनी सरकार ने बीजिंग में मार्शल लॉ लागू करते हुए जनरल शू को करीब 15 हजार सैनिकों के साथ तैनाती का आदेश दिया था। लेकिन उन्होंने अपने जवानों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया। इसके बाद सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया और पांच साल की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि 3 और 4 जून 1989 की रात थियानमेन स्क्वायर और आसपास के इलाकों में सेना की कार्रवाई में सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है। आधिकारिक तौर पर चीन ने कभी सटीक आंकड़े जारी नहीं किए, जबकि बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 10 हजार से अधिक होने की बात कही गई है।

थियानमेन आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1989 में सुधारवादी नेता हू याओबांग की मृत्यु के बाद हुई थी। छात्रों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। कई हफ्तों तक शांतिपूर्ण रहने के बाद सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए सेना उतार दी।

लीक हुआ यह वीडियो दिखाता है कि उस समय चीनी सेना के भीतर भी फैसलों को लेकर मतभेद थे, जिसे अब तक सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया था। जनरल शू छिनशियान का 2021 में 85 वर्ष की उम्र में निधन हो चुका है, लेकिन उनकी यह गवाही थियानमेन स्क्वायर की घटना को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश करती है।

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25 Dec 2025 By Nitin Trivedi

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चीन के 1989 के थियानमेन स्क्वायर आंदोलन से जुड़ा एक संवेदनशील और गोपनीय वीडियो 35 साल बाद लीक होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। यह वीडियो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के तत्कालीन जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का है, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने लोकतंत्र समर्थक छात्रों पर गोली चलाने का आदेश क्यों नहीं माना।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब छह घंटे का वीडियो पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ, जिसका स्रोत अब तक स्पष्ट नहीं है। वीडियो को अब तक यूट्यूब पर 13 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इसे थियानमेन आंदोलन के इतिहासकार वू रेनहुआ ने साझा किया, जिन्होंने इसे उस दौर की सैन्य असहमति का अहम दस्तावेज बताया है।

वीडियो में जनरल शू छिनशियान कहते हैं कि थियानमेन स्क्वायर पर चल रहा आंदोलन कोई हिंसक विद्रोह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक जन आंदोलन था, जिसे बातचीत और राजनीतिक समाधान के जरिए सुलझाया जा सकता था। उन्होंने साफ कहा कि वे अपने जीवन में ऐसा आदेश नहीं देना चाहते थे, जिससे निर्दोष छात्रों की जान जाए और वे इतिहास में अपराधी बन जाएं।

साल 1989 में चीनी सरकार ने बीजिंग में मार्शल लॉ लागू करते हुए जनरल शू को करीब 15 हजार सैनिकों के साथ तैनाती का आदेश दिया था। लेकिन उन्होंने अपने जवानों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया। इसके बाद सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया और पांच साल की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि 3 और 4 जून 1989 की रात थियानमेन स्क्वायर और आसपास के इलाकों में सेना की कार्रवाई में सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है। आधिकारिक तौर पर चीन ने कभी सटीक आंकड़े जारी नहीं किए, जबकि बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 10 हजार से अधिक होने की बात कही गई है।

थियानमेन आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1989 में सुधारवादी नेता हू याओबांग की मृत्यु के बाद हुई थी। छात्रों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। कई हफ्तों तक शांतिपूर्ण रहने के बाद सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए सेना उतार दी।

लीक हुआ यह वीडियो दिखाता है कि उस समय चीनी सेना के भीतर भी फैसलों को लेकर मतभेद थे, जिसे अब तक सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया था। जनरल शू छिनशियान का 2021 में 85 वर्ष की उम्र में निधन हो चुका है, लेकिन उनकी यह गवाही थियानमेन स्क्वायर की घटना को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश करती है।

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