ई-जीरो एफआईआर से साइबर अपराध पर कसा शिकंजा

मध्यप्रदेश

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सुशासन दिवस पर मध्यप्रदेश पुलिस की नई पहल, ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई का रास्ता खुला

मध्यप्रदेश में साइबर अपराध से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर राज्य पुलिस ने ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत दर्ज करने और जांच शुरू करने की प्रक्रिया तेज होगी। यह व्यवस्था ₹1 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में प्रभावी रहेगी और न्याय प्रक्रिया को तकनीक के जरिए अधिक सुलभ बनाने का प्रयास मानी जा रही है।

राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के अनुसार, नई प्रणाली का उद्देश्य समय की बर्बादी, क्षेत्राधिकार की उलझन और देरी की समस्या को खत्म करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इसे लागू किया गया है, जिन्होंने लगातार बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए सख्त और तकनीक आधारित समाधान पर जोर दिया था। पुलिस का कहना है कि जिस तरह स्वच्छता को जनआंदोलन बनाया गया, उसी तरह साइबर सुरक्षा को भी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है।

क्या है ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था

ई-जीरो एफआईआर एक ऐसी डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत पर बिना थाने की सीमाओं में उलझे तुरंत एफआईआर दर्ज की जा सकती है। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत दी गई जीरो एफआईआर की कानूनी मान्यता पर आधारित है, जो जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों का हिस्सा है।

कैसे काम करेगी नई प्रणाली

पीड़ित व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन नंबर या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों में यह जानकारी सीधे राज्य के साइबर पुलिस हब तक पहुंचती है। इसके बाद क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के जरिए शिकायत अपने आप ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है और शिकायतकर्ता को एक यूनिक नंबर मिल जाता है।

राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन मामले की प्रारंभिक समीक्षा कर उसे संबंधित क्षेत्रीय थाने को भेजता है। इसके बाद शिकायतकर्ता को तीन दिन के भीतर नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर इसे नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है।

‘गोल्डन ऑवर’ पर फोकस

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साइबर ठगी के बाद के पहले दो घंटे बेहद अहम होते हैं। इसी समय को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान यदि शिकायत दर्ज हो जाए, तो बैंकों और जांच एजेंसियों के सहयोग से संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के जरिए ट्रांजैक्शन डिटेल, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जा सकेंगे।

क्या होंगे फायदे

नई व्यवस्था से देश में कहीं से भी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकेगी। इससे पीड़ितों को थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और केस की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी। शुरुआती स्तर पर ही बैंकिंग चैनल सक्रिय होने से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

पुलिस मुख्यालय का मानना है कि ई-जीरो एफआईआर प्रणाली साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का मजबूत औजार साबित होगी और आम नागरिकों का भरोसा कानून व्यवस्था पर और मजबूत करेगी।

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25 Dec 2025 By Nitin Trivedi

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मध्यप्रदेश में साइबर अपराध से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर राज्य पुलिस ने ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत दर्ज करने और जांच शुरू करने की प्रक्रिया तेज होगी। यह व्यवस्था ₹1 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में प्रभावी रहेगी और न्याय प्रक्रिया को तकनीक के जरिए अधिक सुलभ बनाने का प्रयास मानी जा रही है।

राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के अनुसार, नई प्रणाली का उद्देश्य समय की बर्बादी, क्षेत्राधिकार की उलझन और देरी की समस्या को खत्म करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इसे लागू किया गया है, जिन्होंने लगातार बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए सख्त और तकनीक आधारित समाधान पर जोर दिया था। पुलिस का कहना है कि जिस तरह स्वच्छता को जनआंदोलन बनाया गया, उसी तरह साइबर सुरक्षा को भी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है।

क्या है ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था

ई-जीरो एफआईआर एक ऐसी डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत पर बिना थाने की सीमाओं में उलझे तुरंत एफआईआर दर्ज की जा सकती है। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत दी गई जीरो एफआईआर की कानूनी मान्यता पर आधारित है, जो जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों का हिस्सा है।

कैसे काम करेगी नई प्रणाली

पीड़ित व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन नंबर या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों में यह जानकारी सीधे राज्य के साइबर पुलिस हब तक पहुंचती है। इसके बाद क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के जरिए शिकायत अपने आप ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है और शिकायतकर्ता को एक यूनिक नंबर मिल जाता है।

राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन मामले की प्रारंभिक समीक्षा कर उसे संबंधित क्षेत्रीय थाने को भेजता है। इसके बाद शिकायतकर्ता को तीन दिन के भीतर नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर इसे नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है।

‘गोल्डन ऑवर’ पर फोकस

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साइबर ठगी के बाद के पहले दो घंटे बेहद अहम होते हैं। इसी समय को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान यदि शिकायत दर्ज हो जाए, तो बैंकों और जांच एजेंसियों के सहयोग से संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के जरिए ट्रांजैक्शन डिटेल, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जा सकेंगे।

क्या होंगे फायदे

नई व्यवस्था से देश में कहीं से भी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकेगी। इससे पीड़ितों को थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और केस की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी। शुरुआती स्तर पर ही बैंकिंग चैनल सक्रिय होने से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

पुलिस मुख्यालय का मानना है कि ई-जीरो एफआईआर प्रणाली साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का मजबूत औजार साबित होगी और आम नागरिकों का भरोसा कानून व्यवस्था पर और मजबूत करेगी।

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