भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के पीछे की वजह को लेकर पहली बार खुलकर बात की है। जून 2019 में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले युवराज ने कहा कि उस दौर में न तो उन्हें खेल में आनंद मिल रहा था और न ही टीम के माहौल में वह सम्मान, जिसके वे हकदार थे। यही वजह थी कि उन्होंने खुद से सवाल करना शुरू कर दिया कि आखिर वह क्रिकेट क्यों खेल रहे हैं।
सानिया मिर्जा के साथ एक पॉडकास्ट बातचीत में युवराज ने कहा कि जब खिलाड़ी मानसिक रूप से खेल से कटने लगता है, तो मैदान पर प्रदर्शन भी प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि लगातार अनदेखी और सहयोग की कमी ने उन्हें भीतर से थका दिया था। युवराज के मुताबिक, “जब खेल का मजा खत्म हो जाए, तो हर दिन खुद को साबित करने का दबाव भारी पड़ने लगता है।”
युवराज सिंह ने 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। इसके बाद वे टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर होते चले गए। 2019 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में चयन न होना उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उस समय उन्हें मध्यक्रम में एक अहम विकल्प माना जा रहा था, लेकिन चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा नहीं जताया। इसके कुछ ही समय बाद युवराज ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास की घोषणा कर दी।
आईपीएल में उनका आखिरी सीजन 2019 रहा, जहां वे मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे। हालांकि, उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। युवराज ने स्वीकार किया कि जब मन खेल में नहीं लगता, तो बड़े मंच पर खुद को अभिव्यक्त करना और कठिन हो जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संन्यास लेने के बाद उन्हें मानसिक शांति मिली। युवराज के शब्दों में, “मैं मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह थक चुका था। यह सोचकर परेशान रहता था कि मैं किसके लिए खेल रहा हूं। जिस दिन मैंने क्रिकेट छोड़ा, उसी दिन मुझे सुकून मिला।”
बातचीत के दौरान युवराज ने अपने शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में एक सीनियर खिलाड़ी ने उनके पिता से उनकी प्रतिभा को लेकर संदेह जताया था। हालांकि, युवराज ने इसे कभी दिल पर नहीं लिया, लेकिन उनके पिता को उस टिप्पणी से गहरा आघात पहुंचा था।
युवराज सिंह का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। 2011 वनडे वर्ल्ड कप में वे भारत की जीत के नायक बने और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने गए। उसी वर्ष उन्हें कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उन्होंने लंबा इलाज कराया और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की। 2007 टी-20 वर्ल्ड कप में एक ओवर में छह छक्के और 12 गेंदों में अर्धशतक आज भी उनके करियर की पहचान हैं।
यह बयान आज की ताज़ा ख़बरें भारत समाचार अपडेट और खेल जगत में इसलिए अहम है, क्योंकि यह एक सफल खिलाड़ी के उस संघर्ष को सामने लाता है, जो आंकड़ों के पीछे अक्सर नजरअंदाज हो जाता है।
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