महिला से जबरदस्ती और मारपीट के दोषी को 6 साल की सजा, SC-ST एक्ट में नहीं टिक पाया अभियोजन

दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)

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दुर्ग-भिलाई के नंदिनीनगर क्षेत्र का 2018 का मामला, कोर्ट ने छेड़छाड़ और गंभीर चोट में सुनाई सश्रम कैद

दुर्ग जिले के नंदिनीनगर क्षेत्र में महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के एक गंभीर मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते आरोपी को उस अधिनियम से बरी कर दिया गया।

यह मामला ग्राम पिटौरा का है, जहां 9 फरवरी 2018 की रात करीब साढ़े 9 बजे पीड़िता अपने घर के सामने स्थित बोरिंग पर बर्तन धो रही थी। इसी दौरान गांव का ही निवासी परदेशी यादव वहां पहुंचा और महिला के साथ जबरदस्ती करने लगा। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने महिला का हाथ पकड़कर उसे अंधेरे की ओर खींचने का प्रयास किया।

पीड़िता के विरोध करने और शोर मचाने पर आरोपी ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसने महिला के सिर और मुंह पर कई मुक्के मारे, जिससे एक दांत टूट गया और दो अन्य दांत ढीले हो गए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पीड़िता बदहवास हालत में घर पहुंची और पूरी घटना अपने पति और परिजनों को बताई।

घटना की सूचना पर नंदिनीनगर आरक्षी केंद्र में अपराध क्रमांक 38/2018 के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रारंभ में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (स्त्री की लज्जा भंग) और 323 (मारपीट) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, घटना स्थल का नक्शा तैयार किया गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए।

मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की गंभीरता सामने आने के बाद मामले में धारा 325 (गंभीर चोट) जोड़ी गई। पीड़िता द्वारा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने पर मामला विशेष अनुसूचित जाति एवं जनजाति न्यायालय को सौंपा गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके पति व अन्य परिजन, जांच अधिकारी और दो चिकित्सक शामिल थे। डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि दांत टूटना गंभीर चोट की श्रेणी में आता है। न्यायालय ने माना कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता का बयान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और केवल प्रत्यक्षदर्शी के अभाव में उसे नकारा नहीं जा सकता।

हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने के आधार पर SC-ST एक्ट स्वतः लागू नहीं हो जाता। अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि अपराध जातिगत आधार पर किया गया था, इसलिए आरोपी को संबंधित धाराओं से दोषमुक्त कर दिया गया।

विशेष न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने आरोपी परदेशी यादव को धारा 354 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 325 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं अलग-अलग प्रभावी होंगी। यह फैसला 28 जनवरी 2026 को सुनाया गया।

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www.dainikjagranmpcg.com
29 Jan 2026 By Nitin Trivedi

महिला से जबरदस्ती और मारपीट के दोषी को 6 साल की सजा, SC-ST एक्ट में नहीं टिक पाया अभियोजन

दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)

दुर्ग जिले के नंदिनीनगर क्षेत्र में महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के एक गंभीर मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते आरोपी को उस अधिनियम से बरी कर दिया गया।

यह मामला ग्राम पिटौरा का है, जहां 9 फरवरी 2018 की रात करीब साढ़े 9 बजे पीड़िता अपने घर के सामने स्थित बोरिंग पर बर्तन धो रही थी। इसी दौरान गांव का ही निवासी परदेशी यादव वहां पहुंचा और महिला के साथ जबरदस्ती करने लगा। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने महिला का हाथ पकड़कर उसे अंधेरे की ओर खींचने का प्रयास किया।

पीड़िता के विरोध करने और शोर मचाने पर आरोपी ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसने महिला के सिर और मुंह पर कई मुक्के मारे, जिससे एक दांत टूट गया और दो अन्य दांत ढीले हो गए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पीड़िता बदहवास हालत में घर पहुंची और पूरी घटना अपने पति और परिजनों को बताई।

घटना की सूचना पर नंदिनीनगर आरक्षी केंद्र में अपराध क्रमांक 38/2018 के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रारंभ में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (स्त्री की लज्जा भंग) और 323 (मारपीट) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, घटना स्थल का नक्शा तैयार किया गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए।

मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की गंभीरता सामने आने के बाद मामले में धारा 325 (गंभीर चोट) जोड़ी गई। पीड़िता द्वारा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने पर मामला विशेष अनुसूचित जाति एवं जनजाति न्यायालय को सौंपा गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके पति व अन्य परिजन, जांच अधिकारी और दो चिकित्सक शामिल थे। डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि दांत टूटना गंभीर चोट की श्रेणी में आता है। न्यायालय ने माना कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता का बयान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और केवल प्रत्यक्षदर्शी के अभाव में उसे नकारा नहीं जा सकता।

हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने के आधार पर SC-ST एक्ट स्वतः लागू नहीं हो जाता। अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि अपराध जातिगत आधार पर किया गया था, इसलिए आरोपी को संबंधित धाराओं से दोषमुक्त कर दिया गया।

विशेष न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने आरोपी परदेशी यादव को धारा 354 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 325 IPC के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों सजाएं अलग-अलग प्रभावी होंगी। यह फैसला 28 जनवरी 2026 को सुनाया गया।

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