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कोरबा में पिता के साथ सो रही 6 साल की बच्ची को करैत ने डसा, मौत
कोरबा (छ.ग.)
रात करीब एक बजे कान और हाथ पर सर्पदंश, पहले कीड़ा काटने का हुआ शक; बाद में उसी बिस्तर पर लिपटा मिला जहरीला सांप
जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के आमाखोखरा गांव में रात को पिता के साथ सो रही छह साल की बच्ची को करैत सांप ने डस लिया। बच्ची की चीख सुनकर परिवार के लोग जागे तो शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद किसी कीड़े ने काट लिया है। कुछ देर बाद सर्पदंश जैसे लक्षण दिखाई देने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर निकले। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने के कारण बच्ची को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृत बच्ची की पहचान सान्वी कंवर के रूप में हुई है। घटना रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब परिवार ने बाद में उसी जगह को ध्यान से देखा जहां बच्ची अपने पिता के साथ सो रही थी। करैत सांप बिस्तर पर ही लिपटा मिला।
आशंका है कि सांप पहले से बिस्तर या उसके आसपास छिपा हुआ था और अंधेरा होने के कारण किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। आमाखोखरा गांव में रहने वाले सान्वी के पिता किरण सिंह मजदूरी और खेती का काम कर परिवार चलाते हैं। घटना वाली रात भी घर में सब कुछ सामान्य था। परिवार के सदस्यों ने खाना खाया और उसके बाद अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। छह साल की सान्वी अपने पिता के साथ एक कमरे में सो रही थी। उसकी मां दूसरे बच्चे के साथ दूसरे कमरे में थी। आधी रात गुजर चुकी थी और घर के सभी लोग गहरी नींद में थे। इसी दौरान करीब एक बजे अचानक सान्वी दर्द से चीखते हुए उठी। उसकी आवाज सुनकर पिता और घर के दूसरे सदस्य भी जाग गए। परिवार के मुताबिक बच्ची को कान और हाथ के पास काटे जाने के निशान दिखाई दिए। शुरुआत में यह समझ नहीं आया कि उसे सांप ने डसा है। परिजनों को लगा कि सोते समय किसी कीड़े ने काट लिया होगा। रात के अंधेरे में आसपास कोई सांप भी नजर नहीं आया था।
कुछ समय में बच्ची की हालत बदलने लगी और सर्पदंश की आशंका हुई। इसके बाद परिवार ने देर न करते हुए उसे कटघोरा के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने बच्ची की स्थिति देखी और उपचार शुरू किया। हालत गंभीर होने के कारण उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिवार बच्ची को लेकर वहां पहुंचा और इलाज शुरू कराया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। छह साल की बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।
घटना के बाद परिवार ने कमरे और बिस्तर के आसपास दोबारा देखा तो वहां जो मिला, उससे सर्पदंश की आशंका स्पष्ट हो गई। बच्ची के पिता किरण सिंह के मुताबिक उन्हें पहले लगा था कि अगर सांप ने काटा भी होगा तो वह कमरे से निकल चुका होगा। बाद में बिस्तर को ध्यान से देखने पर करैत सांप वहीं लिपटा हुआ दिखाई दिया। इससे आशंका जताई जा रही है कि सांप रात में किसी समय घर के भीतर घुसा और बिस्तर तक पहुंच गया था या पहले से वहां छिपा हुआ था। परिवार के लोगों को अंधेरे में उसकी मौजूदगी का पता नहीं चला। बच्ची भी सोते समय उससे अनजान थी। बताया गया कि सांप ने उसे पहले कान के पास और फिर हाथ पर काटा। दर्द महसूस होने पर वह अचानक जागी और जोर से चिल्लाई।
उसी आवाज से पिता की नींद खुली। करैत को अत्यधिक विषैले सांपों में गिना जाता है और इसके काटने के कई मामलों में शुरुआती समय में तेज दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं दिखने के कारण खतरे का अंदाजा देर से लग सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ किसी भी संदिग्ध सर्पदंश की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह देते हैं। आमाखोखरा की इस घटना में परिवार बच्ची को पहले कटघोरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया था। वहां उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। इलाज के बावजूद बच्ची की मौत हो गई।
Korba Snake Bite Case की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बरसात के दौरान ग्रामीण और शहर से लगे क्षेत्रों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण सांपों के प्राकृतिक ठिकानों में पानी भरने, नमी बढ़ने और भोजन की तलाश के चलते वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। कई बार सांप घरों के भीतर ऐसी जगह छिप जाते हैं जहां सामान्य तौर पर लोगों की नजर नहीं जाती। बिस्तर, जमीन पर रखा सामान, लकड़ी, पुराने कपड़ों के ढेर और घर के अंधेरे हिस्सों में उनकी मौजूदगी का पता तत्काल नहीं चल पाता। खासकर रात के समय खतरा बढ़ जाता है। आमाखोखरा की घटना में भी परिवार का कहना है कि सोते समय कमरे में सांप दिखाई नहीं दिया था। बच्ची के डसे जाने के बाद भी शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सांप कहां है। बाद में वह बिस्तर पर ही मिला।
स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने बरसात के दौरान सर्पदंश के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी है। उनके मुताबिक बारिश के दिनों में सांप सुरक्षित और सूखी जगह तलाशते हुए घरों में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी हो सकता है। घर और आसपास के हिस्से में साफ-सफाई रखना भी जरूरी है, ताकि सांपों को छिपने की जगह कम मिले। खासकर घर के आसपास जमा कबाड़, लकड़ियां, झाड़ियां और लंबे समय से पड़ा सामान हटाने पर ध्यान देना चाहिए।
सर्पदंश होने पर सबसे जरूरी कदम बिना समय गंवाए मरीज को अस्पताल पहुंचाना है। विशेषज्ञों ने झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद नहीं करने की सलाह दी है। सांप जहरीला है या नहीं, इसकी पहचान करने में समय लगाने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना जरूरी माना जाता है। कई बार काटने के तुरंत बाद मरीज सामान्य दिखाई देता है, लेकिन विष का प्रभाव धीरे-धीरे शरीर पर बढ़ सकता है। करैत के मामले में विशेष सावधानी की जरूरत होती है, क्योंकि यह सांप अक्सर रात के समय सक्रिय रहता है और सो रहे लोगों के सर्पदंश के मामले भी सामने आते हैं। जमीन या निचले स्तर पर सोने वाले लोगों को बरसात में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
आमाखोखरा गांव की घटना में छह साल की सान्वी अपने पिता के साथ सो रही थी, जबकि उसकी मां और दूसरा बच्चा अलग कमरे में थे। रात करीब एक बजे अचानक उसकी चीख ने परिवार को जगा दिया। कुछ ही घंटों के भीतर परिवार की सामान्य रात अस्पतालों के चक्कर और फिर बच्ची की मौत की खबर में बदल गई। परिवार ने पहले उसे कटघोरा में चिकित्सा सहायता दिलाई और हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक लेकर गया। बाद में घर लौटकर बिस्तर की जांच करने पर करैत सांप वहीं मौजूद मिला। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों को बरसात के दौरान घर में सोने से पहले बिस्तर और आसपास की जगह जांचने, मच्छरदानी लगाने और किसी भी तरह के सर्पदंश की आशंका होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
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कोरबा में पिता के साथ सो रही 6 साल की बच्ची को करैत ने डसा, मौत
कोरबा (छ.ग.)
जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के आमाखोखरा गांव में रात को पिता के साथ सो रही छह साल की बच्ची को करैत सांप ने डस लिया। बच्ची की चीख सुनकर परिवार के लोग जागे तो शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद किसी कीड़े ने काट लिया है। कुछ देर बाद सर्पदंश जैसे लक्षण दिखाई देने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर निकले। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने के कारण बच्ची को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृत बच्ची की पहचान सान्वी कंवर के रूप में हुई है। घटना रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब परिवार ने बाद में उसी जगह को ध्यान से देखा जहां बच्ची अपने पिता के साथ सो रही थी। करैत सांप बिस्तर पर ही लिपटा मिला।
आशंका है कि सांप पहले से बिस्तर या उसके आसपास छिपा हुआ था और अंधेरा होने के कारण किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। आमाखोखरा गांव में रहने वाले सान्वी के पिता किरण सिंह मजदूरी और खेती का काम कर परिवार चलाते हैं। घटना वाली रात भी घर में सब कुछ सामान्य था। परिवार के सदस्यों ने खाना खाया और उसके बाद अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। छह साल की सान्वी अपने पिता के साथ एक कमरे में सो रही थी। उसकी मां दूसरे बच्चे के साथ दूसरे कमरे में थी। आधी रात गुजर चुकी थी और घर के सभी लोग गहरी नींद में थे। इसी दौरान करीब एक बजे अचानक सान्वी दर्द से चीखते हुए उठी। उसकी आवाज सुनकर पिता और घर के दूसरे सदस्य भी जाग गए। परिवार के मुताबिक बच्ची को कान और हाथ के पास काटे जाने के निशान दिखाई दिए। शुरुआत में यह समझ नहीं आया कि उसे सांप ने डसा है। परिजनों को लगा कि सोते समय किसी कीड़े ने काट लिया होगा। रात के अंधेरे में आसपास कोई सांप भी नजर नहीं आया था।
कुछ समय में बच्ची की हालत बदलने लगी और सर्पदंश की आशंका हुई। इसके बाद परिवार ने देर न करते हुए उसे कटघोरा के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने बच्ची की स्थिति देखी और उपचार शुरू किया। हालत गंभीर होने के कारण उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिवार बच्ची को लेकर वहां पहुंचा और इलाज शुरू कराया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। छह साल की बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।
घटना के बाद परिवार ने कमरे और बिस्तर के आसपास दोबारा देखा तो वहां जो मिला, उससे सर्पदंश की आशंका स्पष्ट हो गई। बच्ची के पिता किरण सिंह के मुताबिक उन्हें पहले लगा था कि अगर सांप ने काटा भी होगा तो वह कमरे से निकल चुका होगा। बाद में बिस्तर को ध्यान से देखने पर करैत सांप वहीं लिपटा हुआ दिखाई दिया। इससे आशंका जताई जा रही है कि सांप रात में किसी समय घर के भीतर घुसा और बिस्तर तक पहुंच गया था या पहले से वहां छिपा हुआ था। परिवार के लोगों को अंधेरे में उसकी मौजूदगी का पता नहीं चला। बच्ची भी सोते समय उससे अनजान थी। बताया गया कि सांप ने उसे पहले कान के पास और फिर हाथ पर काटा। दर्द महसूस होने पर वह अचानक जागी और जोर से चिल्लाई।
उसी आवाज से पिता की नींद खुली। करैत को अत्यधिक विषैले सांपों में गिना जाता है और इसके काटने के कई मामलों में शुरुआती समय में तेज दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं दिखने के कारण खतरे का अंदाजा देर से लग सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ किसी भी संदिग्ध सर्पदंश की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह देते हैं। आमाखोखरा की इस घटना में परिवार बच्ची को पहले कटघोरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया था। वहां उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। इलाज के बावजूद बच्ची की मौत हो गई।
Korba Snake Bite Case की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बरसात के दौरान ग्रामीण और शहर से लगे क्षेत्रों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण सांपों के प्राकृतिक ठिकानों में पानी भरने, नमी बढ़ने और भोजन की तलाश के चलते वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। कई बार सांप घरों के भीतर ऐसी जगह छिप जाते हैं जहां सामान्य तौर पर लोगों की नजर नहीं जाती। बिस्तर, जमीन पर रखा सामान, लकड़ी, पुराने कपड़ों के ढेर और घर के अंधेरे हिस्सों में उनकी मौजूदगी का पता तत्काल नहीं चल पाता। खासकर रात के समय खतरा बढ़ जाता है। आमाखोखरा की घटना में भी परिवार का कहना है कि सोते समय कमरे में सांप दिखाई नहीं दिया था। बच्ची के डसे जाने के बाद भी शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सांप कहां है। बाद में वह बिस्तर पर ही मिला।
स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने बरसात के दौरान सर्पदंश के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी है। उनके मुताबिक बारिश के दिनों में सांप सुरक्षित और सूखी जगह तलाशते हुए घरों में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी हो सकता है। घर और आसपास के हिस्से में साफ-सफाई रखना भी जरूरी है, ताकि सांपों को छिपने की जगह कम मिले। खासकर घर के आसपास जमा कबाड़, लकड़ियां, झाड़ियां और लंबे समय से पड़ा सामान हटाने पर ध्यान देना चाहिए।
सर्पदंश होने पर सबसे जरूरी कदम बिना समय गंवाए मरीज को अस्पताल पहुंचाना है। विशेषज्ञों ने झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद नहीं करने की सलाह दी है। सांप जहरीला है या नहीं, इसकी पहचान करने में समय लगाने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना जरूरी माना जाता है। कई बार काटने के तुरंत बाद मरीज सामान्य दिखाई देता है, लेकिन विष का प्रभाव धीरे-धीरे शरीर पर बढ़ सकता है। करैत के मामले में विशेष सावधानी की जरूरत होती है, क्योंकि यह सांप अक्सर रात के समय सक्रिय रहता है और सो रहे लोगों के सर्पदंश के मामले भी सामने आते हैं। जमीन या निचले स्तर पर सोने वाले लोगों को बरसात में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
आमाखोखरा गांव की घटना में छह साल की सान्वी अपने पिता के साथ सो रही थी, जबकि उसकी मां और दूसरा बच्चा अलग कमरे में थे। रात करीब एक बजे अचानक उसकी चीख ने परिवार को जगा दिया। कुछ ही घंटों के भीतर परिवार की सामान्य रात अस्पतालों के चक्कर और फिर बच्ची की मौत की खबर में बदल गई। परिवार ने पहले उसे कटघोरा में चिकित्सा सहायता दिलाई और हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक लेकर गया। बाद में घर लौटकर बिस्तर की जांच करने पर करैत सांप वहीं मौजूद मिला। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों को बरसात के दौरान घर में सोने से पहले बिस्तर और आसपास की जगह जांचने, मच्छरदानी लगाने और किसी भी तरह के सर्पदंश की आशंका होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
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