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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, लखमा की प्रॉपर्टी व सुकमा कांग्रेस कार्यालय अटैच
Raipur, CG
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मंत्री और विधायक कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा की संपत्तियों को अटैच कर दिया है। इसके साथ ही सुकमा स्थित कांग्रेस के जिला कार्यालय को भी अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, रायपुर और सुकमा स्थित कई अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें लखमा का रायपुर स्थित बंगला, सुकमा का निजी भवन और उनके बेटे हरीश के नाम दर्ज प्रॉपर्टी शामिल है। अधिकारियों का दावा है कि इन संपत्तियों का निर्माण कथित घोटाले की रकम से हुआ।
कांग्रेस ने जताया विरोध, BJP पर साधा निशाना
इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसे बीजेपी की “राजनीतिक प्रतिशोध की रणनीति” बताया और सवाल किया कि क्या ED कभी बीजेपी के कार्यालयों की भी जांच करेगी। उन्होंने कहा, “हमने विपक्ष में रहते हुए शंकर नगर में कार्यालय बनाया, लेकिन क्या 150 करोड़ की लागत से बने कुशाभाऊ ठाकरे परिसर का भी हिसाब लिया जाएगा?”
BJP बोली- घोटालेबाजों पर कार्रवाई से घबरा रही कांग्रेस
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता केदार गुप्ता ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “भूपेश बघेल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। अब जब जांच हो रही है, तो कांग्रेस बौखला रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि लखमा को तीन वर्षों में करीब 72 करोड़ रुपये का कमीशन मिला, जिसकी पुष्टि दस्तावेजों से हो चुकी है।
ED का आरोप: सिंडिकेट का हिस्सा थे लखमा
ED के अनुसार, कवासी लखमा कथित शराब सिंडिकेट के अहम सदस्य थे। उनके निर्देश पर ही नीतियों में बदलाव कर अवैध लाभ पहुंचाया गया। छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत में भी उनकी भूमिका संदेह के घेरे में है। एजेंसी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग की अनियमितताओं की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
2161 करोड़ का घोटाला, 15 जिलों में सिंडिकेट सक्रिय
ED और ACB की जांच में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला तीन भागों में बांटकर किया गया। डिस्टलरी संचालकों से कमीशन, नकली होलोग्राम वाली शराब की सरकारी दुकानों से बिक्री और सप्लाई ज़ोन में बदलाव कर अवैध वसूली की गई। सरकारी आँकड़ों के अनुसार इस सिंडिकेट ने लगभग 2161 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
लखमा का बचाव: ‘मेरे पास सिर्फ दो एकड़ जमीन’
कार्रवाई के बाद पूर्व मंत्री लखमा ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने 2009 में जगदलपुर में केवल दो एकड़ ज़मीन खरीदी थी। “मैं एक आम ग्रामीण हूं, पहले टोरा-महुआ बेचता था, फिर राजनीति में आया। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है,” लखमा ने कहा।
अटैचमेंट का कानूनी अर्थ
संपत्ति का ‘अटैचमेंट’ मतलब संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है, लेकिन इसका उपयोग किया जा सकता है। परंतु इसे बेचना या ट्रांसफर करना कानूनन संभव नहीं होता। यह कदम तब उठाया जाता है जब संपत्ति की वैधता पर संदेह हो और जांच लंबित हो।
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, लखमा की प्रॉपर्टी व सुकमा कांग्रेस कार्यालय अटैच
Raipur, CG
सूत्रों के अनुसार, रायपुर और सुकमा स्थित कई अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें लखमा का रायपुर स्थित बंगला, सुकमा का निजी भवन और उनके बेटे हरीश के नाम दर्ज प्रॉपर्टी शामिल है। अधिकारियों का दावा है कि इन संपत्तियों का निर्माण कथित घोटाले की रकम से हुआ।
कांग्रेस ने जताया विरोध, BJP पर साधा निशाना
इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसे बीजेपी की “राजनीतिक प्रतिशोध की रणनीति” बताया और सवाल किया कि क्या ED कभी बीजेपी के कार्यालयों की भी जांच करेगी। उन्होंने कहा, “हमने विपक्ष में रहते हुए शंकर नगर में कार्यालय बनाया, लेकिन क्या 150 करोड़ की लागत से बने कुशाभाऊ ठाकरे परिसर का भी हिसाब लिया जाएगा?”
BJP बोली- घोटालेबाजों पर कार्रवाई से घबरा रही कांग्रेस
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता केदार गुप्ता ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “भूपेश बघेल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। अब जब जांच हो रही है, तो कांग्रेस बौखला रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि लखमा को तीन वर्षों में करीब 72 करोड़ रुपये का कमीशन मिला, जिसकी पुष्टि दस्तावेजों से हो चुकी है।
ED का आरोप: सिंडिकेट का हिस्सा थे लखमा
ED के अनुसार, कवासी लखमा कथित शराब सिंडिकेट के अहम सदस्य थे। उनके निर्देश पर ही नीतियों में बदलाव कर अवैध लाभ पहुंचाया गया। छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत में भी उनकी भूमिका संदेह के घेरे में है। एजेंसी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग की अनियमितताओं की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
2161 करोड़ का घोटाला, 15 जिलों में सिंडिकेट सक्रिय
ED और ACB की जांच में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला तीन भागों में बांटकर किया गया। डिस्टलरी संचालकों से कमीशन, नकली होलोग्राम वाली शराब की सरकारी दुकानों से बिक्री और सप्लाई ज़ोन में बदलाव कर अवैध वसूली की गई। सरकारी आँकड़ों के अनुसार इस सिंडिकेट ने लगभग 2161 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
लखमा का बचाव: ‘मेरे पास सिर्फ दो एकड़ जमीन’
कार्रवाई के बाद पूर्व मंत्री लखमा ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने 2009 में जगदलपुर में केवल दो एकड़ ज़मीन खरीदी थी। “मैं एक आम ग्रामीण हूं, पहले टोरा-महुआ बेचता था, फिर राजनीति में आया। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है,” लखमा ने कहा।
अटैचमेंट का कानूनी अर्थ
संपत्ति का ‘अटैचमेंट’ मतलब संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है, लेकिन इसका उपयोग किया जा सकता है। परंतु इसे बेचना या ट्रांसफर करना कानूनन संभव नहीं होता। यह कदम तब उठाया जाता है जब संपत्ति की वैधता पर संदेह हो और जांच लंबित हो।
