ऑपरेशन कर्रेगुट्टा: 24 दिनों में 31 नक्सली ढेर, कांग्रेस ने उठाए सवाल

Jagdalpur, CG

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छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे नक्सल ऑपरेशन 'कर्रेगुट्टा' में अब तक 31 नक्सलियों को मार गिराया गया है। वहीं, IED ब्लास्ट में 8 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं।

इस ऑपरेशन के परिणामों पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं, विशेष रूप से आदिवासियों के हताहत होने को लेकर। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा है कि क्या एनकाउंटर में मारे गए लोग आदिवासी तो नहीं थे? उन्होंने यह भी सवाल किया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान कैसे हुई?

इस ऑपरेशन पर पहली बार आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग होगी, जिसमें CRPF के DG जीपी सिंह और छत्तीसगढ़ पुलिस के DG अरुण देव गौतम ऑपरेशन की सफलता और चुनौतियों पर जानकारी देंगे। ऑपरेशन 22 अप्रैल से शुरू हुआ था और अब 24 दिन पूरे हो गए हैं।

बटालियन नंबर 1 को हुआ भारी नुकसान

मिली जानकारी के अनुसार, कर्रेगुट्टा में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 के सैकड़ों नक्सली सक्रिय थे, और इनमें से अधिकांश मारे गए नक्सली इसी बटालियन के थे। इन नक्सलियों पर छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से लाखों रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

भारी पहाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन

यह ऑपरेशन 280 किलोमीटर लंबी पहाड़ी श्रृंखला में चल रहा है, जो छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र को जोड़ती है। इस क्षेत्र की ऊंचाई 5000 फीट से अधिक है, और जवानों को इस कठिन इलाक़े में चढ़ाई करने में भारी मुश्किलें आई हैं। यहां पानी का स्रोत केवल बरसाती नाले हैं, जिससे स्थिति और कठिन हो गई।

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की भूमिका

शुरुआत में यह जानकारी सामने आई थी कि तेलंगाना पुलिस भी इस ऑपरेशन में शामिल है, लेकिन जब ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई, तो पता चला कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से छत्तीसगढ़ पुलिस और CRPF द्वारा लड़ा जा रहा है। तेलंगाना की पुलिस की कोई सक्रिय भूमिका इस ऑपरेशन में नहीं है।

तेलंगाना में शांति वार्ता की मांग

तेलंगाना में शांति समिति ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी। पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनकी बेटी के. कविता ने इस ऑपरेशन को गलत बताया और इसे तुरंत रोकने की बात कही थी।

इस ऑपरेशन के कारण जनसामान्य और आदिवासी समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है।

नक्सलियों की धरपकड़ और चुनौतियां

ऑपरेशन 'कर्रेगुट्टा' से नक्सलियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिलेगा। फिलहाल, ऑपरेशन के दौरान हुए संघर्षों और नुकसान के बाद अधिकारियों की ओर से इस ऑपरेशन के परिणामों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी देने की योजना है।

Edited By: Nitin Trivedi

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14 May 2025 By Nitin Trivedi

ऑपरेशन कर्रेगुट्टा: 24 दिनों में 31 नक्सली ढेर, कांग्रेस ने उठाए सवाल

Jagdalpur, CG

इस ऑपरेशन के परिणामों पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं, विशेष रूप से आदिवासियों के हताहत होने को लेकर। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा है कि क्या एनकाउंटर में मारे गए लोग आदिवासी तो नहीं थे? उन्होंने यह भी सवाल किया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान कैसे हुई?

इस ऑपरेशन पर पहली बार आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग होगी, जिसमें CRPF के DG जीपी सिंह और छत्तीसगढ़ पुलिस के DG अरुण देव गौतम ऑपरेशन की सफलता और चुनौतियों पर जानकारी देंगे। ऑपरेशन 22 अप्रैल से शुरू हुआ था और अब 24 दिन पूरे हो गए हैं।

बटालियन नंबर 1 को हुआ भारी नुकसान

मिली जानकारी के अनुसार, कर्रेगुट्टा में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 के सैकड़ों नक्सली सक्रिय थे, और इनमें से अधिकांश मारे गए नक्सली इसी बटालियन के थे। इन नक्सलियों पर छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से लाखों रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

भारी पहाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन

यह ऑपरेशन 280 किलोमीटर लंबी पहाड़ी श्रृंखला में चल रहा है, जो छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र को जोड़ती है। इस क्षेत्र की ऊंचाई 5000 फीट से अधिक है, और जवानों को इस कठिन इलाक़े में चढ़ाई करने में भारी मुश्किलें आई हैं। यहां पानी का स्रोत केवल बरसाती नाले हैं, जिससे स्थिति और कठिन हो गई।

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की भूमिका

शुरुआत में यह जानकारी सामने आई थी कि तेलंगाना पुलिस भी इस ऑपरेशन में शामिल है, लेकिन जब ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई, तो पता चला कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से छत्तीसगढ़ पुलिस और CRPF द्वारा लड़ा जा रहा है। तेलंगाना की पुलिस की कोई सक्रिय भूमिका इस ऑपरेशन में नहीं है।

तेलंगाना में शांति वार्ता की मांग

तेलंगाना में शांति समिति ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी। पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनकी बेटी के. कविता ने इस ऑपरेशन को गलत बताया और इसे तुरंत रोकने की बात कही थी।

इस ऑपरेशन के कारण जनसामान्य और आदिवासी समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है।

नक्सलियों की धरपकड़ और चुनौतियां

ऑपरेशन 'कर्रेगुट्टा' से नक्सलियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिलेगा। फिलहाल, ऑपरेशन के दौरान हुए संघर्षों और नुकसान के बाद अधिकारियों की ओर से इस ऑपरेशन के परिणामों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी देने की योजना है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/operation-karegutta-31-naxalite-piles-raised-questions-in-24-days/article-20831

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