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भोपाल का निशातपुरा स्टेशन 26 जुलाई से खुलेगा, लंबा इंतजार होगा खत्म
भोपाल (म.प्र.)
करीब तीन साल से तैयार स्टेशन पर शुरू होगी यात्री आवाजाही, निशातपुरा-करोंद समेत आसपास की बड़ी आबादी को मिलेगी राहत
राजधानी के निशातपुरा इलाके में करीब तीन साल से बनकर तैयार खड़ा रेलवे स्टेशन अब आखिरकार यात्रियों के लिए खुलने जा रहा है। 26 जुलाई को निशातपुरा रेलवे स्टेशन का लोकार्पण प्रस्तावित है और इसके साथ ही यहां यात्री ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी की गई है। स्टेशन जून 2023 में तैयार हो गया था, लेकिन नियमित यात्री सेवा शुरू नहीं होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। प्लेटफॉर्म बने थे, टिकट काउंटर और यात्रियों के बैठने की जगह तैयार थी, लिफ्ट से लेकर सीसीटीवी और लाइटिंग तक का इंतजाम मौजूद था, फिर भी स्टेशन पर यात्रियों की चहल-पहल दिखाई नहीं देती थी। अब लोकार्पण की तारीख तय होने के बाद निशातपुरा, करोंद और भोपाल के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों की उम्मीद बढ़ी है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मामले में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर स्टेशन को जल्द शुरू करने का मुद्दा उठाया था।
ताजा जानकारी के अनुसार 26 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम में रेल मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़ सकते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी। शुरुआती चरण में स्टेशन पर चुनिंदा ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी है। अलग-अलग रिपोर्टों में ट्रेनों की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। पहले तीन ट्रेनों के संचालन या ठहराव की बात कही गई, जबकि बाद में सामने आई जानकारी में फिलहाल दो ट्रेनों को यहां ठहराव दिए जाने का उल्लेख है। इनमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस का नाम सामने आया है। रेलवे की अंतिम समय-सारिणी और आधिकारिक परिचालन आदेश से ट्रेनों की पूरी स्थिति साफ होगी। स्टेशन शुरू होने का असर केवल निशातपुरा तक सीमित नहीं रहने वाला। करोंद, भानपुर, आसपास की कॉलोनियों, रायसेन रोड की ओर के कुछ हिस्सों और पुराने भोपाल से जुड़े इलाकों के यात्रियों के लिए भी यह एक नया विकल्प बन सकता है। अभी इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए भोपाल जंक्शन या रानी कमलापति स्टेशन की ओर जाना पड़ता है। शहर के ट्रैफिक के बीच रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में कई बार काफी समय लगता है। निशातपुरा में नियमित ट्रेन ठहराव बढ़ने पर आसपास रहने वाले यात्रियों को अपने घर के नजदीक से रेल सेवा मिलने की संभावना बनेगी।
Nishatpura Railway Station को भोपाल के रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अनुमान है कि निशातपुरा, करोंद और आसपास के इलाकों की करीब तीन लाख आबादी को स्टेशन के पूरी तरह सक्रिय होने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में यहां कितनी ट्रेनों को नियमित ठहराव दिया जाता है। स्टेशन तैयार होने के बावजूद लंबे समय तक यात्री सेवा शुरू नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों के बीच लगातार सवाल उठते रहे। जुलाई के मध्य तक स्थिति यह थी कि स्टेशन पर न नियमित यात्रियों की आवाजाही थी और न ही सामान्य यात्री स्टेशन जैसी गतिविधि दिखाई देती थी। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस सुविधा के लंबे समय तक उपयोग में नहीं आने को लेकर भी चर्चा रही। दिन में स्टेशन लगभग खाली दिखाई देता था। आसपास रहने वाले लोगों को उम्मीद थी कि निर्माण पूरा होने के बाद जल्द ट्रेनें रुकेंगी, लेकिन इंतजार लंबा खिंचता गया। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा पहले ही विकसित किया जा चुका है। प्लेटफॉर्म के साथ टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, लिफ्ट, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं यहां मौजूद हैं। स्टेशन को यात्री सेवा के लिए इस्तेमाल में लाने के बाद इन सुविधाओं का वास्तविक उपयोग शुरू हो सकेगा। रेलवे के लिए अगली चुनौती यहां नियमित यात्री गतिविधियों के हिसाब से स्टाफ, सुरक्षा, टिकटिंग और परिचालन व्यवस्था को सक्रिय रखना होगी।
भोपाल जंक्शन शहर के सबसे पुराने और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। पुराने शहर के बड़े हिस्से से यात्री इसी स्टेशन पर निर्भर रहते हैं। दूसरी तरफ रानी कमलापति रेलवे स्टेशन नए भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ा केंद्र बन चुका है। निशातपुरा को तीसरे विकल्प के तौर पर विकसित करने से यात्रियों का कुछ दबाव अलग दिशा में बांटा जा सकता है। खासकर वे ट्रेनें जो निशातपुरा से गुजरती हैं और जिन्हें यहां ठहराव दिया जा सकता है, उनके यात्रियों को भोपाल जंक्शन तक जाने की जरूरत कम होगी। इससे समय के साथ भोपाल के रेलवे यातायात का नया पैटर्न भी बन सकता है। फिलहाल शुरुआत सीमित ट्रेनों से होने की तैयारी है, इसलिए स्टेशन के पूरी क्षमता से इस्तेमाल में आने में समय लग सकता है।
निशातपुरा स्टेशन के लोकार्पण को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा रही क्योंकि हाल में मध्य प्रदेश के कई रेलवे स्टेशनों से जुड़े कार्यक्रम हुए, लेकिन निशातपुरा का इंतजार बना रहा। स्टेशन के तैयार होने और यात्री सेवाएं शुरू होने के बीच करीब तीन साल का अंतर स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गया था। कुछ दिन पहले तक यहां ट्रेनें बिना रुके गुजर रही थीं और स्टेशन परिसर में वैसी गतिविधि नहीं थी जैसी किसी चालू यात्री स्टेशन पर सामान्य रूप से दिखाई देती है। अब 26 जुलाई की तारीख सामने आने के बाद रेलवे स्तर पर तैयारियां तेज होने की जानकारी है। प्रस्तावित कार्यक्रम सुबह के समय रखा जा सकता है और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नई दिल्ली से वर्चुअल रूप से जुड़ने की संभावना बताई गई है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा स्थानीय कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। ट्रेनों का ठहराव शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव आसपास के यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा में दिखाई दे सकता है। निशातपुरा और करोंद का इलाका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आबादी वाला क्षेत्र बना है। यहां से भोपाल जंक्शन तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से शहर के व्यस्त हिस्सों से गुजरना पड़ता है। त्योहारों और छुट्टियों के समय स्टेशन तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
निशातपुरा से लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव बढ़ने पर यात्रियों को एक वैकल्पिक बोर्डिंग पॉइंट मिल सकेगा। रेलवे के सामने अब स्टेशन को चरणबद्ध तरीके से ज्यादा ट्रेनों से जोड़ने की मांग भी आ सकती है। शुरुआती ठहराव के बाद यात्री संख्या, टिकट बिक्री और परिचालन जरूरतों के आधार पर आगे अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज पर फैसला लिया जा सकता है। स्टेशन की लोकेशन रेलवे के मौजूदा रूट पर होने के कारण यहां से गुजरने वाली कई ट्रेनों को भविष्य में ठहराव देने की संभावना पर स्थानीय स्तर पर पहले से मांग उठती रही है। 26 जुलाई के कार्यक्रम के साथ स्टेशन औपचारिक रूप से यात्री नक्शे पर आएगा, जबकि किन-किन ट्रेनों का स्थायी ठहराव रहेगा, उनके आगमन-प्रस्थान का समय क्या होगा और टिकट बुकिंग में निशातपुरा को किस तरह शामिल किया जाएगा, इसे लेकर रेलवे की विस्तृत परिचालन सूचना यात्रियों के लिए अहम रहेगी।
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भोपाल का निशातपुरा स्टेशन 26 जुलाई से खुलेगा, लंबा इंतजार होगा खत्म
भोपाल (म.प्र.)
राजधानी के निशातपुरा इलाके में करीब तीन साल से बनकर तैयार खड़ा रेलवे स्टेशन अब आखिरकार यात्रियों के लिए खुलने जा रहा है। 26 जुलाई को निशातपुरा रेलवे स्टेशन का लोकार्पण प्रस्तावित है और इसके साथ ही यहां यात्री ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी की गई है। स्टेशन जून 2023 में तैयार हो गया था, लेकिन नियमित यात्री सेवा शुरू नहीं होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। प्लेटफॉर्म बने थे, टिकट काउंटर और यात्रियों के बैठने की जगह तैयार थी, लिफ्ट से लेकर सीसीटीवी और लाइटिंग तक का इंतजाम मौजूद था, फिर भी स्टेशन पर यात्रियों की चहल-पहल दिखाई नहीं देती थी। अब लोकार्पण की तारीख तय होने के बाद निशातपुरा, करोंद और भोपाल के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों की उम्मीद बढ़ी है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मामले में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर स्टेशन को जल्द शुरू करने का मुद्दा उठाया था।
ताजा जानकारी के अनुसार 26 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम में रेल मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़ सकते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी। शुरुआती चरण में स्टेशन पर चुनिंदा ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी है। अलग-अलग रिपोर्टों में ट्रेनों की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। पहले तीन ट्रेनों के संचालन या ठहराव की बात कही गई, जबकि बाद में सामने आई जानकारी में फिलहाल दो ट्रेनों को यहां ठहराव दिए जाने का उल्लेख है। इनमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस का नाम सामने आया है। रेलवे की अंतिम समय-सारिणी और आधिकारिक परिचालन आदेश से ट्रेनों की पूरी स्थिति साफ होगी। स्टेशन शुरू होने का असर केवल निशातपुरा तक सीमित नहीं रहने वाला। करोंद, भानपुर, आसपास की कॉलोनियों, रायसेन रोड की ओर के कुछ हिस्सों और पुराने भोपाल से जुड़े इलाकों के यात्रियों के लिए भी यह एक नया विकल्प बन सकता है। अभी इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए भोपाल जंक्शन या रानी कमलापति स्टेशन की ओर जाना पड़ता है। शहर के ट्रैफिक के बीच रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में कई बार काफी समय लगता है। निशातपुरा में नियमित ट्रेन ठहराव बढ़ने पर आसपास रहने वाले यात्रियों को अपने घर के नजदीक से रेल सेवा मिलने की संभावना बनेगी।
Nishatpura Railway Station को भोपाल के रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अनुमान है कि निशातपुरा, करोंद और आसपास के इलाकों की करीब तीन लाख आबादी को स्टेशन के पूरी तरह सक्रिय होने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में यहां कितनी ट्रेनों को नियमित ठहराव दिया जाता है। स्टेशन तैयार होने के बावजूद लंबे समय तक यात्री सेवा शुरू नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों के बीच लगातार सवाल उठते रहे। जुलाई के मध्य तक स्थिति यह थी कि स्टेशन पर न नियमित यात्रियों की आवाजाही थी और न ही सामान्य यात्री स्टेशन जैसी गतिविधि दिखाई देती थी। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस सुविधा के लंबे समय तक उपयोग में नहीं आने को लेकर भी चर्चा रही। दिन में स्टेशन लगभग खाली दिखाई देता था। आसपास रहने वाले लोगों को उम्मीद थी कि निर्माण पूरा होने के बाद जल्द ट्रेनें रुकेंगी, लेकिन इंतजार लंबा खिंचता गया। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा पहले ही विकसित किया जा चुका है। प्लेटफॉर्म के साथ टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, लिफ्ट, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं यहां मौजूद हैं। स्टेशन को यात्री सेवा के लिए इस्तेमाल में लाने के बाद इन सुविधाओं का वास्तविक उपयोग शुरू हो सकेगा। रेलवे के लिए अगली चुनौती यहां नियमित यात्री गतिविधियों के हिसाब से स्टाफ, सुरक्षा, टिकटिंग और परिचालन व्यवस्था को सक्रिय रखना होगी।
भोपाल जंक्शन शहर के सबसे पुराने और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। पुराने शहर के बड़े हिस्से से यात्री इसी स्टेशन पर निर्भर रहते हैं। दूसरी तरफ रानी कमलापति रेलवे स्टेशन नए भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ा केंद्र बन चुका है। निशातपुरा को तीसरे विकल्प के तौर पर विकसित करने से यात्रियों का कुछ दबाव अलग दिशा में बांटा जा सकता है। खासकर वे ट्रेनें जो निशातपुरा से गुजरती हैं और जिन्हें यहां ठहराव दिया जा सकता है, उनके यात्रियों को भोपाल जंक्शन तक जाने की जरूरत कम होगी। इससे समय के साथ भोपाल के रेलवे यातायात का नया पैटर्न भी बन सकता है। फिलहाल शुरुआत सीमित ट्रेनों से होने की तैयारी है, इसलिए स्टेशन के पूरी क्षमता से इस्तेमाल में आने में समय लग सकता है।
निशातपुरा स्टेशन के लोकार्पण को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा रही क्योंकि हाल में मध्य प्रदेश के कई रेलवे स्टेशनों से जुड़े कार्यक्रम हुए, लेकिन निशातपुरा का इंतजार बना रहा। स्टेशन के तैयार होने और यात्री सेवाएं शुरू होने के बीच करीब तीन साल का अंतर स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गया था। कुछ दिन पहले तक यहां ट्रेनें बिना रुके गुजर रही थीं और स्टेशन परिसर में वैसी गतिविधि नहीं थी जैसी किसी चालू यात्री स्टेशन पर सामान्य रूप से दिखाई देती है। अब 26 जुलाई की तारीख सामने आने के बाद रेलवे स्तर पर तैयारियां तेज होने की जानकारी है। प्रस्तावित कार्यक्रम सुबह के समय रखा जा सकता है और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नई दिल्ली से वर्चुअल रूप से जुड़ने की संभावना बताई गई है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा स्थानीय कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। ट्रेनों का ठहराव शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव आसपास के यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा में दिखाई दे सकता है। निशातपुरा और करोंद का इलाका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आबादी वाला क्षेत्र बना है। यहां से भोपाल जंक्शन तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से शहर के व्यस्त हिस्सों से गुजरना पड़ता है। त्योहारों और छुट्टियों के समय स्टेशन तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
निशातपुरा से लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव बढ़ने पर यात्रियों को एक वैकल्पिक बोर्डिंग पॉइंट मिल सकेगा। रेलवे के सामने अब स्टेशन को चरणबद्ध तरीके से ज्यादा ट्रेनों से जोड़ने की मांग भी आ सकती है। शुरुआती ठहराव के बाद यात्री संख्या, टिकट बिक्री और परिचालन जरूरतों के आधार पर आगे अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज पर फैसला लिया जा सकता है। स्टेशन की लोकेशन रेलवे के मौजूदा रूट पर होने के कारण यहां से गुजरने वाली कई ट्रेनों को भविष्य में ठहराव देने की संभावना पर स्थानीय स्तर पर पहले से मांग उठती रही है। 26 जुलाई के कार्यक्रम के साथ स्टेशन औपचारिक रूप से यात्री नक्शे पर आएगा, जबकि किन-किन ट्रेनों का स्थायी ठहराव रहेगा, उनके आगमन-प्रस्थान का समय क्या होगा और टिकट बुकिंग में निशातपुरा को किस तरह शामिल किया जाएगा, इसे लेकर रेलवे की विस्तृत परिचालन सूचना यात्रियों के लिए अहम रहेगी।
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