मानसून सत्र का तीसरा दिन आज, अनुपूरक बजट पर चर्चा; सदन में रहेंगे CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश

On

विधानसभा में वित्तीय प्रस्तावों पर सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा के आसार, मुख्यमंत्री दोपहर में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक में भी होंगे शामिल

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन गुरुवार, 23 जुलाई को वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से अहम रहने वाला है। विधानसभा में प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा प्रस्तावित है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी बात रखेंगे। मानसून सत्र के शुरुआती दो दिनों में विधेयकों और दूसरे मुद्दों को लेकर सदन में राजनीतिक हलचल बनी रही, अब तीसरे दिन सरकार के वित्तीय प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह विधानसभा पहुंचकर सदन की कार्यवाही में शामिल होंगे। दोपहर बाद उनका सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी बैठक में शामिल होने का कार्यक्रम भी तय है। भोपाल में विधानसभा सत्र के कारण सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और पांच दिवसीय सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कामकाज को एजेंडे में रखा है। सत्र के शुरुआती दिनों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC समेत कई विधेयक सदन के सामने आए, जिन्हें लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। पहले दिन ही UCC सहित कई मसौदा विधेयक पेश किए गए थे और कांग्रेस ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। अब तीसरे दिन सदन का फोकस अनुपूरक बजट और उससे जुड़े वित्तीय प्रावधानों पर रहने की उम्मीद है। सरकार को अलग-अलग विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत और उसके इस्तेमाल को लेकर सदन में जवाब देना होगा। विपक्ष भी खर्च की प्राथमिकताओं और प्रदेश की वित्तीय स्थिति से जुड़े सवाल उठा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गुरुवार का कार्यक्रम भी विधानसभा की गतिविधियों के आसपास केंद्रित रहेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होंगे। सदन में होने वाली चर्चा के दौरान सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों पर जवाब और पक्ष रखा जा सकता है। दोपहर करीब 1:30 बजे मुख्यमंत्री का समय मुलाकातों के लिए आरक्षित बताया गया है। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे विधानसभा परिसर के समिति कक्ष क्रमांक-1 में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक प्रस्तावित है। विधानसभा सत्र के बीच होने वाली इस बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे के सभी बिंदु सार्वजनिक जानकारी में स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

अनुपूरक बजट पर होने वाली चर्चा तीसरे दिन के कामकाज का प्रमुख हिस्सा रहने की संभावना है। सामान्य तौर पर सरकार मुख्य बजट पारित होने के बाद ऐसी योजनाओं, परियोजनाओं या विभागीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान लेकर आती है, जिनके लिए पहले स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं रहती या नई आवश्यकता सामने आती है। ऐसे प्रस्तावों पर विधानसभा में चर्चा होती है और संबंधित खर्च के लिए सदन की मंजूरी ली जाती है। इस दौरान विपक्ष को सरकार से यह पूछने का मौका मिलता है कि अतिरिक्त राशि की जरूरत क्यों पड़ी, पैसा किन योजनाओं पर खर्च किया जाएगा और पहले से स्वीकृत बजट की स्थिति क्या है। इसलिए अनुपूरक बजट की चर्चा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर भी राजनीतिक बहस होती है।

इस बार मानसून सत्र की शुरुआत से ही माहौल राजनीतिक रूप से गर्म रहा है। UCC विधेयक इस सत्र के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल रहा और इसे लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने विधेयक की प्रक्रिया और कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। पहले दिन UCC के साथ कई दूसरे विधेयक भी सदन में पेश किए गए। इस वजह से पांच दिन का यह छोटा सत्र विधायी कामकाज के लिहाज से काफी व्यस्त माना जा रहा है। तीसरे दिन भी विपक्ष दूसरे जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश कर सकता है।

प्रदेश के किसानों, कानून-व्यवस्था, रोजगार, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में सवाल उठने की संभावना रहती है। मानसून के दौरान कई जिलों में स्थानीय समस्याएं सामने आती हैं, ऐसे में विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विषय प्रश्नकाल और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए उठा सकते हैं। विपक्ष की रणनीति सरकार को जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने की रहेगी, जबकि सत्ता पक्ष सरकार की योजनाओं और फैसलों को सामने रखने की कोशिश करेगा। सीमित अवधि के इस मानसून सत्र में बड़ी संख्या में विधायी कामकाज होने के कारण प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश लंबित विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को निर्धारित समय के भीतर पूरा कराने की है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी के कारण सदन की राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। मुख्यमंत्री विधानसभा में सरकार के नेता होने के साथ कई विभागीय और नीतिगत मामलों में सीधे हस्तक्षेप करते हैं। तीसरे दिन उनका अधिकांश कार्यक्रम विधानसभा परिसर में ही केंद्रित है। सदन की कार्यवाही के बाद मुलाकातों के लिए निर्धारित समय के दौरान विधायक और अन्य प्रतिनिधि उनसे क्षेत्रीय या प्रशासनिक विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक होगी। यह विभाग राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी सेवाओं और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से जुड़ा है, इसलिए सत्र के बीच होने वाली बैठक प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मानसून सत्र में वित्तीय प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार को विभिन्न योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए खर्च की व्यवस्था करनी होती है। मुख्य बजट में अनुमानित राशि तय होने के बावजूद साल के बीच नई परियोजनाएं, अतिरिक्त खर्च या किसी योजना की बढ़ी हुई जरूरत सामने आ सकती है। ऐसी स्थिति में अनुपूरक बजट के जरिए विधानसभा से अतिरिक्त राशि खर्च करने की अनुमति मांगी जाती है। सदन में चर्चा के दौरान विधायक यह जानने की कोशिश करते हैं कि अतिरिक्त आवंटन का फायदा किन क्षेत्रों और वर्गों को मिलेगा। सरकार को भी विभागवार खर्च और प्रस्तावित योजनाओं के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।

सत्र के शुरुआती दिनों में सरकार ने जिस तेजी से विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया है, उससे तीसरे दिन भी सदन में लंबा कामकाज होने की संभावना बनी हुई है। विधानसभा का यह मानसून सत्र केवल पांच दिनों के लिए निर्धारित है, इसलिए प्रश्नकाल, विधेयक, वित्तीय प्रस्ताव और दूसरे शासकीय काम एक सीमित समय में पूरे किए जाने हैं। विपक्ष इसी छोटी अवधि को लेकर भी सरकार पर सवाल उठा सकता है। विपक्षी दल आम तौर पर लंबे सत्र की मांग करते रहे हैं ताकि जनहित और क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा समय तक चर्चा हो सके। सरकार की ओर से तय एजेंडे के मुताबिक कामकाज पूरा कराने पर जोर रहेगा। जून में सामने आए कार्यक्रम के अनुसार यह पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से निर्धारित किया गया था।

विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक सदन में जाने से पहले और कार्यवाही के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखते हैं। पिछले दिनों UCC समेत कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। तीसरे दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष खर्च, कर्ज और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है। सरकार की तरफ से विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय जरूरत का पक्ष रखा जा सकता है। ऐसे में सदन के भीतर वित्तीय चर्चा के साथ राजनीतिक बहस भी तेज रहने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री के सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक पर भी प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी। विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय बैठक होने से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों की समीक्षा संभव है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक कार्यक्रम में बैठक के विस्तृत एजेंडे का उल्लेख नहीं है, इसलिए किसी खास निर्णय को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा। बैठक दोपहर 2:30 बजे विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में प्रस्तावित है। इससे पहले मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही और मुलाकातों में व्यस्त रहेंगे। इस तरह मुख्यमंत्री का दिन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों गतिविधियों से भरा रहेगा।

भोपाल में विधानसभा सत्र के चलते सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी प्रशासन की नजर रहती है। विधानसभा परिसर में विधायकों, मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों की आवाजाही बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्रों में सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां ज्यादा रहती हैं। सत्र के दौरान अलग-अलग संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन या ज्ञापन देने भी पहुंचते हैं, इसलिए पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। तीसरे दिन भी विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से सभी की नजर सदन के भीतर होने वाली चर्चा और सरकार-विपक्ष के रुख पर रहेगी।

मानसून सत्र के बाकी दिनों में भी सरकार के सामने विधायी एजेंडा पूरा करने की चुनौती रहेगी। पांच दिन के इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ वित्तीय कामकाज को मंजूरी दिलाना है। UCC जैसे बड़े मुद्दे ने पहले ही सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब अनुपूरक बजट पर बहस के जरिए प्रदेश की आर्थिक प्राथमिकताएं और विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा सामने आएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह 11 बजे से विधानसभा की गतिविधियों में शामिल रहेंगे और दोपहर में प्रशासनिक बैठक करेंगे। तीसरे दिन की कार्यवाही में विपक्ष के सवाल, सरकार के जवाब और वित्तीय प्रस्तावों पर होने वाली बहस प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम रहेंगे।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
22 Jul 2026 By Priyanka

मानसून सत्र का तीसरा दिन आज, अनुपूरक बजट पर चर्चा; सदन में रहेंगे CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन गुरुवार, 23 जुलाई को वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से अहम रहने वाला है। विधानसभा में प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा प्रस्तावित है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी बात रखेंगे। मानसून सत्र के शुरुआती दो दिनों में विधेयकों और दूसरे मुद्दों को लेकर सदन में राजनीतिक हलचल बनी रही, अब तीसरे दिन सरकार के वित्तीय प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह विधानसभा पहुंचकर सदन की कार्यवाही में शामिल होंगे। दोपहर बाद उनका सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी बैठक में शामिल होने का कार्यक्रम भी तय है। भोपाल में विधानसभा सत्र के कारण सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और पांच दिवसीय सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कामकाज को एजेंडे में रखा है। सत्र के शुरुआती दिनों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC समेत कई विधेयक सदन के सामने आए, जिन्हें लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। पहले दिन ही UCC सहित कई मसौदा विधेयक पेश किए गए थे और कांग्रेस ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। अब तीसरे दिन सदन का फोकस अनुपूरक बजट और उससे जुड़े वित्तीय प्रावधानों पर रहने की उम्मीद है। सरकार को अलग-अलग विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत और उसके इस्तेमाल को लेकर सदन में जवाब देना होगा। विपक्ष भी खर्च की प्राथमिकताओं और प्रदेश की वित्तीय स्थिति से जुड़े सवाल उठा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गुरुवार का कार्यक्रम भी विधानसभा की गतिविधियों के आसपास केंद्रित रहेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होंगे। सदन में होने वाली चर्चा के दौरान सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों पर जवाब और पक्ष रखा जा सकता है। दोपहर करीब 1:30 बजे मुख्यमंत्री का समय मुलाकातों के लिए आरक्षित बताया गया है। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे विधानसभा परिसर के समिति कक्ष क्रमांक-1 में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक प्रस्तावित है। विधानसभा सत्र के बीच होने वाली इस बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे के सभी बिंदु सार्वजनिक जानकारी में स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

अनुपूरक बजट पर होने वाली चर्चा तीसरे दिन के कामकाज का प्रमुख हिस्सा रहने की संभावना है। सामान्य तौर पर सरकार मुख्य बजट पारित होने के बाद ऐसी योजनाओं, परियोजनाओं या विभागीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान लेकर आती है, जिनके लिए पहले स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं रहती या नई आवश्यकता सामने आती है। ऐसे प्रस्तावों पर विधानसभा में चर्चा होती है और संबंधित खर्च के लिए सदन की मंजूरी ली जाती है। इस दौरान विपक्ष को सरकार से यह पूछने का मौका मिलता है कि अतिरिक्त राशि की जरूरत क्यों पड़ी, पैसा किन योजनाओं पर खर्च किया जाएगा और पहले से स्वीकृत बजट की स्थिति क्या है। इसलिए अनुपूरक बजट की चर्चा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर भी राजनीतिक बहस होती है।

इस बार मानसून सत्र की शुरुआत से ही माहौल राजनीतिक रूप से गर्म रहा है। UCC विधेयक इस सत्र के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल रहा और इसे लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने विधेयक की प्रक्रिया और कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। पहले दिन UCC के साथ कई दूसरे विधेयक भी सदन में पेश किए गए। इस वजह से पांच दिन का यह छोटा सत्र विधायी कामकाज के लिहाज से काफी व्यस्त माना जा रहा है। तीसरे दिन भी विपक्ष दूसरे जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश कर सकता है।

प्रदेश के किसानों, कानून-व्यवस्था, रोजगार, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में सवाल उठने की संभावना रहती है। मानसून के दौरान कई जिलों में स्थानीय समस्याएं सामने आती हैं, ऐसे में विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विषय प्रश्नकाल और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए उठा सकते हैं। विपक्ष की रणनीति सरकार को जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने की रहेगी, जबकि सत्ता पक्ष सरकार की योजनाओं और फैसलों को सामने रखने की कोशिश करेगा। सीमित अवधि के इस मानसून सत्र में बड़ी संख्या में विधायी कामकाज होने के कारण प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश लंबित विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को निर्धारित समय के भीतर पूरा कराने की है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी के कारण सदन की राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। मुख्यमंत्री विधानसभा में सरकार के नेता होने के साथ कई विभागीय और नीतिगत मामलों में सीधे हस्तक्षेप करते हैं। तीसरे दिन उनका अधिकांश कार्यक्रम विधानसभा परिसर में ही केंद्रित है। सदन की कार्यवाही के बाद मुलाकातों के लिए निर्धारित समय के दौरान विधायक और अन्य प्रतिनिधि उनसे क्षेत्रीय या प्रशासनिक विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक होगी। यह विभाग राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी सेवाओं और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से जुड़ा है, इसलिए सत्र के बीच होने वाली बैठक प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मानसून सत्र में वित्तीय प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार को विभिन्न योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए खर्च की व्यवस्था करनी होती है। मुख्य बजट में अनुमानित राशि तय होने के बावजूद साल के बीच नई परियोजनाएं, अतिरिक्त खर्च या किसी योजना की बढ़ी हुई जरूरत सामने आ सकती है। ऐसी स्थिति में अनुपूरक बजट के जरिए विधानसभा से अतिरिक्त राशि खर्च करने की अनुमति मांगी जाती है। सदन में चर्चा के दौरान विधायक यह जानने की कोशिश करते हैं कि अतिरिक्त आवंटन का फायदा किन क्षेत्रों और वर्गों को मिलेगा। सरकार को भी विभागवार खर्च और प्रस्तावित योजनाओं के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।

सत्र के शुरुआती दिनों में सरकार ने जिस तेजी से विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया है, उससे तीसरे दिन भी सदन में लंबा कामकाज होने की संभावना बनी हुई है। विधानसभा का यह मानसून सत्र केवल पांच दिनों के लिए निर्धारित है, इसलिए प्रश्नकाल, विधेयक, वित्तीय प्रस्ताव और दूसरे शासकीय काम एक सीमित समय में पूरे किए जाने हैं। विपक्ष इसी छोटी अवधि को लेकर भी सरकार पर सवाल उठा सकता है। विपक्षी दल आम तौर पर लंबे सत्र की मांग करते रहे हैं ताकि जनहित और क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा समय तक चर्चा हो सके। सरकार की ओर से तय एजेंडे के मुताबिक कामकाज पूरा कराने पर जोर रहेगा। जून में सामने आए कार्यक्रम के अनुसार यह पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से निर्धारित किया गया था।

विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक सदन में जाने से पहले और कार्यवाही के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखते हैं। पिछले दिनों UCC समेत कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। तीसरे दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष खर्च, कर्ज और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है। सरकार की तरफ से विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय जरूरत का पक्ष रखा जा सकता है। ऐसे में सदन के भीतर वित्तीय चर्चा के साथ राजनीतिक बहस भी तेज रहने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री के सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक पर भी प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी। विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय बैठक होने से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों की समीक्षा संभव है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक कार्यक्रम में बैठक के विस्तृत एजेंडे का उल्लेख नहीं है, इसलिए किसी खास निर्णय को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा। बैठक दोपहर 2:30 बजे विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में प्रस्तावित है। इससे पहले मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही और मुलाकातों में व्यस्त रहेंगे। इस तरह मुख्यमंत्री का दिन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों गतिविधियों से भरा रहेगा।

भोपाल में विधानसभा सत्र के चलते सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी प्रशासन की नजर रहती है। विधानसभा परिसर में विधायकों, मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों की आवाजाही बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्रों में सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां ज्यादा रहती हैं। सत्र के दौरान अलग-अलग संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन या ज्ञापन देने भी पहुंचते हैं, इसलिए पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। तीसरे दिन भी विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से सभी की नजर सदन के भीतर होने वाली चर्चा और सरकार-विपक्ष के रुख पर रहेगी।

मानसून सत्र के बाकी दिनों में भी सरकार के सामने विधायी एजेंडा पूरा करने की चुनौती रहेगी। पांच दिन के इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ वित्तीय कामकाज को मंजूरी दिलाना है। UCC जैसे बड़े मुद्दे ने पहले ही सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब अनुपूरक बजट पर बहस के जरिए प्रदेश की आर्थिक प्राथमिकताएं और विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा सामने आएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह 11 बजे से विधानसभा की गतिविधियों में शामिल रहेंगे और दोपहर में प्रशासनिक बैठक करेंगे। तीसरे दिन की कार्यवाही में विपक्ष के सवाल, सरकार के जवाब और वित्तीय प्रस्तावों पर होने वाली बहस प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम रहेंगे।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-be-in-the-house-to-discuss/article-59448

खबरें और भी हैं

विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद
कौन होगा दतिया विधानसभा उपचुनाव में जनता की पहली पसंद?
Select one option below:

टाप न्यूज

विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

आगर-मालवा और जबलपुर से भोपाल आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने देखी मानसून सत्र की कार्यवाही, मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतांत्रिक...
मध्य प्रदेश 
विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

15,000+ Joint Replacement Procedures के अनुभव के साथ डॉ. मनु शर्मा ने वडोदरा में रचा नया कीर्तिमान

सूरत (गुजरात) [भारत],22 जुलाई: 15,000+ सफल Knee Replacement Procedures का अनुभव और Patient-Centric Treatment के...
लाइफ स्टाइल 
15,000+ Joint Replacement Procedures के अनुभव के साथ डॉ. मनु शर्मा ने वडोदरा में रचा नया कीर्तिमान

केरल तट पर रेस्क्यू के लिए चीन ने भारत को कहा शुक्रिया, बोला- मदद हमेशा याद रहेगी

PLA की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में चीनी सैन्य राजनयिक ने भारतीय बचाव अभियान की सराहना की; 2025 में MV...
देश विदेश 
केरल तट पर रेस्क्यू के लिए चीन ने भारत को कहा शुक्रिया, बोला- मदद हमेशा याद रहेगी

फ्रांस में प्रतिबंधित कीटनाशकों की वापसी पर सियासी घमासान, पर्यावरण मंत्री ने दिया इस्तीफा

मधुमक्खियों और जैव विविधता पर खतरे का हवाला देकर मोनिक बारबू ने पद छोड़ने की पेशकश की, राष्ट्रपति मैक्रों ने...
देश विदेश 
फ्रांस में प्रतिबंधित कीटनाशकों की वापसी पर सियासी घमासान, पर्यावरण मंत्री ने दिया इस्तीफा

बिजनेस

अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा
अप्रैल-जून में कंपनी का रेवेन्यू 42.4% बढ़कर ₹9,711 करोड़; ट्रांसमिशन, स्मार्ट मीटरिंग और एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार में मजबूत बढ़त
मारुति की कारें अगस्त से होंगी महंगी, ₹30,000 तक बढ़ेंगे दाम: इंडिगो ने बनाया नया रिकॉर्ड, सिट्रोएन ने लॉन्च किया बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन
शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी पर वैश्विक तनाव का असर; कच्चे तेल और बिटकॉइन पर भी नजर
सरकार का बड़ा बयान: E20 पेट्रोल से इंजन पर असर नहीं, LTCG टैक्स में राहत का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
सर्राफा बाजार में फिर चमका सोना-चांदी, गोल्ड ₹1.42 लाख के करीब; चांदी ₹2.19 लाख प्रति किलो
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.