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- “जिंदा होते हुए भी कागजों में ‘मृत’ घोषित, न्याय के लिए मंत्री के पैरों में गिरे बुजुर्ग दंपत्ति”
“जिंदा होते हुए भी कागजों में ‘मृत’ घोषित, न्याय के लिए मंत्री के पैरों में गिरे बुजुर्ग दंपत्ति”
Panna, MP
पन्ना जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग दंपत्ति को प्रशासनिक लापरवाही और दबंगई का ऐसा दंश झेलना पड़ा कि उन्हें जिंदा होते हुए भी ‘मृत’ घोषित कर दिया गया। 80 वर्षीय भूरा आदिवासी और उनकी पत्नी 75 वर्षीय केशकली बाई अपने हक की जमीन और पहचान वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
शनिवार को जब जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार उद्यानिकी विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे, तो बुजुर्ग दंपत्ति उनके सामने गिड़गिड़ाते हुए पैरों पर गिर पड़े। रोते हुए उन्होंने कहा –
“साहब, हम जिंदा हैं… हमें हमारी जमीन दिलवा दो।”
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए। मंत्रीजी ने उन्हें आश्वासन दिया कि “पटवारी से बात करवा कर जमीन ढूंढी जाएगी,” और फिर वे आगे बढ़ गए।
कैसे छिनी जमीन और पहचान?
करीब 30 साल पहले रोजगार की तलाश में बुजुर्ग दंपत्ति कटनी चले गए थे। आरोप है कि इसी बीच दबंगों ने उनके बेटे की मिलीभगत से लगभग 6 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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उनका नाम वोटर लिस्ट और आधार कार्ड से हटा दिया गया।
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वृद्धा पेंशन भी बंद कर दी गई।
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यहां तक कि उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर बेटे ने जमीन भी बेच दी।
भतीजी शीला आदिवासी ने जब सच्चाई जानी, तो बुजुर्गों को वापस पन्ना लेकर आईं। लेकिन अब वे अपनी पहचान और जमीन दोनों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।
भुखमरी और बेबसी में जिंदगी
केशकली बाई रोते हुए कहती हैं –
“हम लोग भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं। हम जिंदा हैं, लेकिन सरकार के कागजों में हमें मरा हुआ बता दिया गया है।”
उनकी बातों से साफ झलकता है कि न्याय के इंतजार में उनकी जिंदगी कितनी कठिन हो गई है।
पटवारी का दावा
पूर्व पटवारी विमल यादव का कहना है कि दंपत्ति ने खुद अपना नाम बदलकर कटनी में दस्तावेज बनवा लिए थे। वहीं उनके बेटे ने माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर कुछ जमीन बेच दी। हालांकि 5 एकड़ जमीन अब भी उनके नाम पर दर्ज है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
बुजुर्ग दंपत्ति के मंत्री के पैरों पर गिरकर न्याय की गुहार लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस मामले को प्रशासन की बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता मान रहे हैं।
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“जिंदा होते हुए भी कागजों में ‘मृत’ घोषित, न्याय के लिए मंत्री के पैरों में गिरे बुजुर्ग दंपत्ति”
Panna, MP
पन्ना जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग दंपत्ति को प्रशासनिक लापरवाही और दबंगई का ऐसा दंश झेलना पड़ा कि उन्हें जिंदा होते हुए भी ‘मृत’ घोषित कर दिया गया। 80 वर्षीय भूरा आदिवासी और उनकी पत्नी 75 वर्षीय केशकली बाई अपने हक की जमीन और पहचान वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
शनिवार को जब जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार उद्यानिकी विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे, तो बुजुर्ग दंपत्ति उनके सामने गिड़गिड़ाते हुए पैरों पर गिर पड़े। रोते हुए उन्होंने कहा –
“साहब, हम जिंदा हैं… हमें हमारी जमीन दिलवा दो।”
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए। मंत्रीजी ने उन्हें आश्वासन दिया कि “पटवारी से बात करवा कर जमीन ढूंढी जाएगी,” और फिर वे आगे बढ़ गए।
कैसे छिनी जमीन और पहचान?
करीब 30 साल पहले रोजगार की तलाश में बुजुर्ग दंपत्ति कटनी चले गए थे। आरोप है कि इसी बीच दबंगों ने उनके बेटे की मिलीभगत से लगभग 6 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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उनका नाम वोटर लिस्ट और आधार कार्ड से हटा दिया गया।
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वृद्धा पेंशन भी बंद कर दी गई।
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यहां तक कि उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर बेटे ने जमीन भी बेच दी।
भतीजी शीला आदिवासी ने जब सच्चाई जानी, तो बुजुर्गों को वापस पन्ना लेकर आईं। लेकिन अब वे अपनी पहचान और जमीन दोनों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।
भुखमरी और बेबसी में जिंदगी
केशकली बाई रोते हुए कहती हैं –
“हम लोग भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं। हम जिंदा हैं, लेकिन सरकार के कागजों में हमें मरा हुआ बता दिया गया है।”
उनकी बातों से साफ झलकता है कि न्याय के इंतजार में उनकी जिंदगी कितनी कठिन हो गई है।
पटवारी का दावा
पूर्व पटवारी विमल यादव का कहना है कि दंपत्ति ने खुद अपना नाम बदलकर कटनी में दस्तावेज बनवा लिए थे। वहीं उनके बेटे ने माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर कुछ जमीन बेच दी। हालांकि 5 एकड़ जमीन अब भी उनके नाम पर दर्ज है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
बुजुर्ग दंपत्ति के मंत्री के पैरों पर गिरकर न्याय की गुहार लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस मामले को प्रशासन की बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता मान रहे हैं।
