MP में फायर सेफ्टी का नया कानून, शहर में 10 और गांव में 20 मिनट का लक्ष्य

मध्य प्रदेश

On

विधानसभा से अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक पारित, 15 मीटर से ऊंची इमारतों से लेकर पंडाल और स्कूल तक सुरक्षा नियमों के दायरे में

मध्य प्रदेश में आग लगने की घटनाओं से निपटने और फायर सेफ्टी सिस्टम को एक तय व्यवस्था के तहत लाने के लिए विधानसभा ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा अहम विधेयक पारित कर दिया है। मंगलवार, 21 जुलाई को विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी दे दी गई। नए प्रावधानों का सबसे अहम पहलू दमकल सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर है। सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में फायर स्टेशन और दमकल व्यवस्था इस तरह विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है कि शहरी इलाके में आग लगने की सूचना मिलने पर करीब 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट के भीतर अग्निशमन वाहन मौके तक पहुंच सकें। अभी प्रदेश के कई दूर-दराज इलाकों में फायर स्टेशन की दूरी और संसाधनों की कमी के कारण दमकल को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है।

नई व्यवस्था में इसी अंतर को कम करने पर जोर दिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में विधेयक की जानकारी देते हुए बताया कि इसे तैयार करने से पहले दूसरे राज्यों और केंद्र में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। सरकार का फोकस केवल आग लगने के बाद उसे बुझाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी घटनाएं होने से पहले सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। अग्निशमन सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाओं की श्रेणी में लाने का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ प्रदेश में फायर सेफ्टी के लिए अलग संचालनालय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य अग्निशमन सेवाओं को अधिक संगठित करना, कर्मचारियों को आधुनिक प्रशिक्षण देना और अलग-अलग निकायों में काम कर रही व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल तैयार करना है।

नए MP Fire Safety Bill 2026 में जवाबदेही को भी अहम बनाया गया है। किसी इमारत या परिसर में आग लगने के बाद जांच के दौरान यदि यह सामने आता है कि वहां निर्धारित फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया गया था, तो जिम्मेदारी केवल किसी एक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच की जा सकेगी और भवन मालिक की जवाबदेही भी तय होगी। अभी तक आग की बड़ी घटनाओं के बाद अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि संबंधित इमारत के पास जरूरी अनुमति थी या नहीं, फायर फाइटिंग उपकरण चालू हालत में थे या नहीं और समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया गया। नई कानूनी व्यवस्था में इन बिंदुओं को स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। खास तौर पर ऊंची इमारतों के लिए नियम सख्त रखे गए हैं। सदन में दी गई जानकारी के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी होगी।

ऐसे भवनों में आग लगने की स्थिति सामान्य इमारतों से अलग होती है। ऊपरी मंजिलों तक पहुंच, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष उपकरण और पहले से तैयार सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से एनओसी प्रक्रिया को अहम माना गया है। कानून का दायरा केवल बहुमंजिला इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े आयोजनों में लगाए जाने वाले पंडालों को भी फायर सेफ्टी व्यवस्था के तहत लाने का प्रावधान है। जबलपुर उत्तर से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने विधेयक के समर्थन में चर्चा करते हुए सदन को बताया कि पंडालों के लिए भी अग्नि सुरक्षा संबंधी अनुमति जरूरी होगी। धार्मिक आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम, मेले और दूसरे बड़े आयोजनों में अस्थायी पंडाल लगाए जाते हैं, जहां बिजली की वायरिंग, सजावटी सामग्री, कपड़े और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण आग का खतरा बढ़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे आयोजनों में पहले से सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। स्कूलों को लेकर भी फायर एनओसी के मापदंड तय किए जाने का प्रावधान है। स्कूल भवनों में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होती है। नियमों के तहत फायर सेफ्टी उपकरण, निकासी मार्ग और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार रखना होगा।

विधेयक में आम लोगों की भागीदारी और आपातकालीन सेवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। विधायक अभिलाष पांडे के मुताबिक स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद ली जा सके। वहीं आग लगने की झूठी सूचना देकर दमकल और आपातकालीन सेवाओं को बेवजह व्यस्त करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। फायर ब्रिगेड के लिए झूठी कॉल केवल संसाधनों की बर्बादी का मामला नहीं होती, बल्कि उसी समय किसी वास्तविक घटना में दमकल की जरूरत पड़ने पर रिस्पॉन्स प्रभावित हो सकता है। प्रदेश में फायर स्टेशन नेटवर्क के विस्तार को नए कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बहुमंजिला इमारतें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल और घनी बस्तियां फायर सेफ्टी के लिहाज से लगातार नई चुनौती पैदा कर रही हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या अलग है। कई गांव निकटतम नगर निकाय या फायर स्टेशन से काफी दूर हैं, इसलिए आग लगने के बाद दमकल पहुंचने तक नुकसान बढ़ने का खतरा रहता है। इसी अंतर को देखते हुए शहरों के लिए 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 20 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य सामने रखा गया है।

इसे जमीन पर लागू करने के लिए फायर स्टेशनों की संख्या, दमकल वाहनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मचारियों और स्थानीय स्तर के संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत होगी। विधेयक में राज्य स्तर पर प्रशिक्षण संस्थान बनाने का प्रावधान इसी ढांचे से जुड़ा है। यहां अग्निशमन कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, रेस्क्यू ऑपरेशन और अलग-अलग तरह की आपात परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। मंगलवार को विधानसभा में केवल फायर सेफ्टी से जुड़ा विधेयक ही चर्चा में नहीं रहा। सदन में करीब साढ़े पांच घंटे चली कार्यवाही और चर्चा के दौरान राजमार्ग संशोधन, मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता और यूसीसी से जुड़े प्रस्ताव समेत कुल आठ विधेयकों को पारित किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा कानून सीधे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। अब इसके तहत बनने वाले नियमों, फायर स्टेशनों के नेटवर्क, कर्मचारियों की तैनाती, भवनों की एनओसी प्रक्रिया और निरीक्षण व्यवस्था पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
22 Jul 2026 By Priyanka

MP में फायर सेफ्टी का नया कानून, शहर में 10 और गांव में 20 मिनट का लक्ष्य

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में आग लगने की घटनाओं से निपटने और फायर सेफ्टी सिस्टम को एक तय व्यवस्था के तहत लाने के लिए विधानसभा ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा अहम विधेयक पारित कर दिया है। मंगलवार, 21 जुलाई को विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी दे दी गई। नए प्रावधानों का सबसे अहम पहलू दमकल सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर है। सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में फायर स्टेशन और दमकल व्यवस्था इस तरह विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है कि शहरी इलाके में आग लगने की सूचना मिलने पर करीब 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट के भीतर अग्निशमन वाहन मौके तक पहुंच सकें। अभी प्रदेश के कई दूर-दराज इलाकों में फायर स्टेशन की दूरी और संसाधनों की कमी के कारण दमकल को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है।

नई व्यवस्था में इसी अंतर को कम करने पर जोर दिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में विधेयक की जानकारी देते हुए बताया कि इसे तैयार करने से पहले दूसरे राज्यों और केंद्र में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। सरकार का फोकस केवल आग लगने के बाद उसे बुझाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी घटनाएं होने से पहले सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। अग्निशमन सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाओं की श्रेणी में लाने का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ प्रदेश में फायर सेफ्टी के लिए अलग संचालनालय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य अग्निशमन सेवाओं को अधिक संगठित करना, कर्मचारियों को आधुनिक प्रशिक्षण देना और अलग-अलग निकायों में काम कर रही व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल तैयार करना है।

नए MP Fire Safety Bill 2026 में जवाबदेही को भी अहम बनाया गया है। किसी इमारत या परिसर में आग लगने के बाद जांच के दौरान यदि यह सामने आता है कि वहां निर्धारित फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया गया था, तो जिम्मेदारी केवल किसी एक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच की जा सकेगी और भवन मालिक की जवाबदेही भी तय होगी। अभी तक आग की बड़ी घटनाओं के बाद अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि संबंधित इमारत के पास जरूरी अनुमति थी या नहीं, फायर फाइटिंग उपकरण चालू हालत में थे या नहीं और समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया गया। नई कानूनी व्यवस्था में इन बिंदुओं को स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। खास तौर पर ऊंची इमारतों के लिए नियम सख्त रखे गए हैं। सदन में दी गई जानकारी के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी होगी।

ऐसे भवनों में आग लगने की स्थिति सामान्य इमारतों से अलग होती है। ऊपरी मंजिलों तक पहुंच, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष उपकरण और पहले से तैयार सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से एनओसी प्रक्रिया को अहम माना गया है। कानून का दायरा केवल बहुमंजिला इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े आयोजनों में लगाए जाने वाले पंडालों को भी फायर सेफ्टी व्यवस्था के तहत लाने का प्रावधान है। जबलपुर उत्तर से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने विधेयक के समर्थन में चर्चा करते हुए सदन को बताया कि पंडालों के लिए भी अग्नि सुरक्षा संबंधी अनुमति जरूरी होगी। धार्मिक आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम, मेले और दूसरे बड़े आयोजनों में अस्थायी पंडाल लगाए जाते हैं, जहां बिजली की वायरिंग, सजावटी सामग्री, कपड़े और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण आग का खतरा बढ़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे आयोजनों में पहले से सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। स्कूलों को लेकर भी फायर एनओसी के मापदंड तय किए जाने का प्रावधान है। स्कूल भवनों में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होती है। नियमों के तहत फायर सेफ्टी उपकरण, निकासी मार्ग और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार रखना होगा।

विधेयक में आम लोगों की भागीदारी और आपातकालीन सेवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। विधायक अभिलाष पांडे के मुताबिक स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद ली जा सके। वहीं आग लगने की झूठी सूचना देकर दमकल और आपातकालीन सेवाओं को बेवजह व्यस्त करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। फायर ब्रिगेड के लिए झूठी कॉल केवल संसाधनों की बर्बादी का मामला नहीं होती, बल्कि उसी समय किसी वास्तविक घटना में दमकल की जरूरत पड़ने पर रिस्पॉन्स प्रभावित हो सकता है। प्रदेश में फायर स्टेशन नेटवर्क के विस्तार को नए कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बहुमंजिला इमारतें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल और घनी बस्तियां फायर सेफ्टी के लिहाज से लगातार नई चुनौती पैदा कर रही हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या अलग है। कई गांव निकटतम नगर निकाय या फायर स्टेशन से काफी दूर हैं, इसलिए आग लगने के बाद दमकल पहुंचने तक नुकसान बढ़ने का खतरा रहता है। इसी अंतर को देखते हुए शहरों के लिए 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 20 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य सामने रखा गया है।

इसे जमीन पर लागू करने के लिए फायर स्टेशनों की संख्या, दमकल वाहनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मचारियों और स्थानीय स्तर के संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत होगी। विधेयक में राज्य स्तर पर प्रशिक्षण संस्थान बनाने का प्रावधान इसी ढांचे से जुड़ा है। यहां अग्निशमन कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, रेस्क्यू ऑपरेशन और अलग-अलग तरह की आपात परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। मंगलवार को विधानसभा में केवल फायर सेफ्टी से जुड़ा विधेयक ही चर्चा में नहीं रहा। सदन में करीब साढ़े पांच घंटे चली कार्यवाही और चर्चा के दौरान राजमार्ग संशोधन, मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता और यूसीसी से जुड़े प्रस्ताव समेत कुल आठ विधेयकों को पारित किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा कानून सीधे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। अब इसके तहत बनने वाले नियमों, फायर स्टेशनों के नेटवर्क, कर्मचारियों की तैनाती, भवनों की एनओसी प्रक्रिया और निरीक्षण व्यवस्था पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-fire-safety-law-in-mp-target-of-10-minutes/article-59454

खबरें और भी हैं

विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद
कौन होगा दतिया विधानसभा उपचुनाव में जनता की पहली पसंद?
Select one option below:

टाप न्यूज

विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

आगर-मालवा और जबलपुर से भोपाल आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने देखी मानसून सत्र की कार्यवाही, मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतांत्रिक...
मध्य प्रदेश 
विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद

15,000+ Joint Replacement Procedures के अनुभव के साथ डॉ. मनु शर्मा ने वडोदरा में रचा नया कीर्तिमान

सूरत (गुजरात) [भारत],22 जुलाई: 15,000+ सफल Knee Replacement Procedures का अनुभव और Patient-Centric Treatment के...
लाइफ स्टाइल 
15,000+ Joint Replacement Procedures के अनुभव के साथ डॉ. मनु शर्मा ने वडोदरा में रचा नया कीर्तिमान

केरल तट पर रेस्क्यू के लिए चीन ने भारत को कहा शुक्रिया, बोला- मदद हमेशा याद रहेगी

PLA की 99वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में चीनी सैन्य राजनयिक ने भारतीय बचाव अभियान की सराहना की; 2025 में MV...
देश विदेश 
केरल तट पर रेस्क्यू के लिए चीन ने भारत को कहा शुक्रिया, बोला- मदद हमेशा याद रहेगी

फ्रांस में प्रतिबंधित कीटनाशकों की वापसी पर सियासी घमासान, पर्यावरण मंत्री ने दिया इस्तीफा

मधुमक्खियों और जैव विविधता पर खतरे का हवाला देकर मोनिक बारबू ने पद छोड़ने की पेशकश की, राष्ट्रपति मैक्रों ने...
देश विदेश 
फ्रांस में प्रतिबंधित कीटनाशकों की वापसी पर सियासी घमासान, पर्यावरण मंत्री ने दिया इस्तीफा

बिजनेस

अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा
अप्रैल-जून में कंपनी का रेवेन्यू 42.4% बढ़कर ₹9,711 करोड़; ट्रांसमिशन, स्मार्ट मीटरिंग और एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार में मजबूत बढ़त
मारुति की कारें अगस्त से होंगी महंगी, ₹30,000 तक बढ़ेंगे दाम: इंडिगो ने बनाया नया रिकॉर्ड, सिट्रोएन ने लॉन्च किया बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन
शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी पर वैश्विक तनाव का असर; कच्चे तेल और बिटकॉइन पर भी नजर
सरकार का बड़ा बयान: E20 पेट्रोल से इंजन पर असर नहीं, LTCG टैक्स में राहत का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
सर्राफा बाजार में फिर चमका सोना-चांदी, गोल्ड ₹1.42 लाख के करीब; चांदी ₹2.19 लाख प्रति किलो
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.