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विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूरोप दौरा: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली कूटनीतिक यात्रा, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
Jagran Desk
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 से 24 मई तक तीन यूरोपीय देशों – नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी – की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी, जो न केवल कूटनीतिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है।
तीन देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को मिलेगा बल
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, जयशंकर इस दौरे में तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। भारत का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक, तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
पाकिस्तान को मिलेगा करारा जवाब
इस यात्रा के दौरान जयशंकर सीमापार आतंकवाद और पाकिस्तान की आतंकियों को निरंतर मदद जैसे गंभीर मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाएंगे। उम्मीद है कि वे ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि और भारत द्वारा उठाए गए कड़े कदमों की जानकारी भी साझा करेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार
गौरतलब है कि 7 मई को भारत ने कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी भारत पर सैन्य हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने हर बार उसे करारा जवाब दिया। चार दिन तक चले इस टकराव के बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी।
भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
एस. जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर है। यह दौरा भारत और यूरोपीय देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा, खासकर उस समय जब दुनिया में नई रणनीतिक व्यवस्थाएं बन रही हैं और वैश्विक नेतृत्व पुनः परिभाषित हो रहा है।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूरोप दौरा: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली कूटनीतिक यात्रा, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
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तीन देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को मिलेगा बल
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, जयशंकर इस दौरे में तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। भारत का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक, तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
पाकिस्तान को मिलेगा करारा जवाब
इस यात्रा के दौरान जयशंकर सीमापार आतंकवाद और पाकिस्तान की आतंकियों को निरंतर मदद जैसे गंभीर मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाएंगे। उम्मीद है कि वे ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि और भारत द्वारा उठाए गए कड़े कदमों की जानकारी भी साझा करेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार
गौरतलब है कि 7 मई को भारत ने कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी भारत पर सैन्य हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने हर बार उसे करारा जवाब दिया। चार दिन तक चले इस टकराव के बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी।
भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
एस. जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर है। यह दौरा भारत और यूरोपीय देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा, खासकर उस समय जब दुनिया में नई रणनीतिक व्यवस्थाएं बन रही हैं और वैश्विक नेतृत्व पुनः परिभाषित हो रहा है।
