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सुप्रीम कोर्ट की फटकार: OBC के 13% होल्ड पदों पर MP सरकार से जवाब तलब, 23 सितंबर को अंतिम सुनवाई
Bhopal, MP
मध्यप्रदेश में सरकारी भर्तियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 13% पद छह साल से होल्ड पर होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल किया—"क्या एमपी सरकार सो रही है? इतने साल में क्या कदम उठाए?"
यह मामला MPPSC के चयनित अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। सरकार ने 2022 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह OBC को 27% आरक्षण देने के पक्ष में है और आदेश पर लगी रोक हटाई जाए।
अदालत ने इसे "अति महत्वपूर्ण मामला" मानते हुए 23 सितंबर को सभी संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तय की है।
पृष्ठभूमि
मई 2022 में हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण को 14% तक सीमित कर दिया था, जिससे 27% आरक्षण का प्रावधान अटक गया। इसके बाद से 13% पद होल्ड पर रखे गए हैं। सरकार का तर्क है कि छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी है, इसलिए मध्यप्रदेश को भी राहत दी जाए।
वहीं, अनारक्षित वर्ग का पक्ष है कि मप्र में आरक्षण सीमा बढ़ाकर 73% करने का प्रयास किया गया, जो संवैधानिक सीमा से अधिक है। वर्तमान में इस मुद्दे पर 70 से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
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Bhopal, MP
यह मामला MPPSC के चयनित अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। सरकार ने 2022 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह OBC को 27% आरक्षण देने के पक्ष में है और आदेश पर लगी रोक हटाई जाए।
अदालत ने इसे "अति महत्वपूर्ण मामला" मानते हुए 23 सितंबर को सभी संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तय की है।
पृष्ठभूमि
मई 2022 में हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण को 14% तक सीमित कर दिया था, जिससे 27% आरक्षण का प्रावधान अटक गया। इसके बाद से 13% पद होल्ड पर रखे गए हैं। सरकार का तर्क है कि छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी है, इसलिए मध्यप्रदेश को भी राहत दी जाए।
वहीं, अनारक्षित वर्ग का पक्ष है कि मप्र में आरक्षण सीमा बढ़ाकर 73% करने का प्रयास किया गया, जो संवैधानिक सीमा से अधिक है। वर्तमान में इस मुद्दे पर 70 से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
