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BJP में छत्तीसगढ़ का बढ़ता प्रभाव: नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष
रायपुर (छ.ग.)
जेपी नड्डा के बाद दूसरे ऐसे नेता, जिनका छत्तीसगढ़ से गहरा जुड़ाव; संगठन और राजनीति दोनों स्तर पर दिख सकते हैं बड़े बदलाव
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ का कद एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह साफ संकेत मिला है कि संगठन में राज्य की भूमिका को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे पहले जेपी नड्डा भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रह चुके हैं और उनके अध्यक्ष बनने के बाद राज्य पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना था।
नितिन नवीन की नियुक्ति को केवल नेतृत्व परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुभव के आधार पर लिया गया फैसला माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह धारणा है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां बीजेपी को कांग्रेस के खिलाफ लंबे समय तक जमीनी संघर्ष करना पड़ा, वहां से मिले अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी साबित हो सकते हैं।
नवीन ने छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाई थी। टिकट वितरण से लेकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय बनाने तक, वे सीधे तौर पर ग्राउंड पॉलिटिक्स से जुड़े रहे। आदिवासी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अलग-अलग राजनीतिक जरूरतों को समझना उनके कार्यकाल की अहम विशेषता मानी जाती है।
संगठन सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन की कार्यशैली संतुलित लेकिन अनुशासन पर केंद्रित रही है। उन्होंने मंडल और जिला स्तर पर नियमित फीडबैक सिस्टम को प्राथमिकता दी, जिससे केंद्रीय नेतृत्व तक जमीनी रिपोर्ट समय पर पहुंच सके। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक फेरबदल और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण पर भी जोर दिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ को इससे कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। पहला, राज्य से जुड़े मुद्दे—चाहे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा हो, आदिवासी विकास की योजनाएं हों या शहरी प्रशासन से जुड़े सवाल—अब सीधे शीर्ष नेतृत्व तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकते हैं। दूसरा, लंबे समय से चर्चा में रही संगठनात्मक गुटबाजी पर संतुलन साधने की कोशिश तेज हो सकती है।
आने वाले महीनों में नगरीय निकाय, पंचायत और भविष्य के विधानसभा चुनावों को देखते हुए टिकट वितरण और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है। पार्टी के अंदर यह संकेत मिल रहे हैं कि अब प्रदर्शन, संगठनात्मक योगदान और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दी जा सकती है। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी चेहरों के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी मजबूत हो सकती है।
केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय भी नितिन नवीन की नियुक्ति का अहम पहलू माना जा रहा है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रचारित किया जाए, इस पर एकरूपता आने की संभावना है। खासतौर पर आदिवासी बहुल इलाकों में विकास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की नीति और स्पष्ट हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जेपी नड्डा के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के संगठनात्मक अनुभवों का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर किया गया, उसी तरह अब भी ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ पार्टी की रणनीति में जगह पा सकता है। इससे कांग्रेस के लिए राज्य में मुकाबला और चुनौतीपूर्ण होने के संकेत मिल रहे हैं।
कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए भी एक नया अध्याय माना जा रहा है। आने वाला समय बताएगा कि यह बदलाव राज्य को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में कितनी मजबूती से स्थापित करता है।
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