भोपाल में ‘महाक्रांति रैली’: समान काम-समान वेतन की मांग पर एकजुट हुए आउटसोर्स कर्मचारी

Bhopal,M.P

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल रविवार को हजारों अस्थायी, अंशकालीन और आउटसोर्स कर्मचारियों के नारों से गूंज उठी।

 तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में इन कर्मचारियों ने “समान काम-समान वेतन” की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली, जिसे ‘महाक्रांति रैली’ नाम दिया गया।

न्याय और स्थायित्व की मांग

आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के बैनर तले आयोजित इस रैली में बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेयर और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हुए।
मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा, “यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि उन लाखों कर्मचारियों की आवाज है जो वर्षों से अस्थिर रोजगार और आर्थिक अन्याय झेल रहे हैं। सरकार को अब यह समझना होगा कि कर्मचारियों की मेहनत का सम्मान ही असली सुशासन है।”

ठेका प्रथा पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने पूरे सरकारी तंत्र को आउटसोर्स कंपनियों के हवाले कर दिया है। क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर स्थायी भर्तियां लगभग बंद हैं और इन्हें आउटसोर्स कंपनियों के जरिए भरा जा रहा है।
ग्राम पंचायतों में चौकीदारी करने वाले रामनिवास केवट ने बताया कि वह 25 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी ₹2000 मासिक वेतन पाते हैं। “कभी-कभी छह महीने तक तनख्वाह नहीं मिलती,” उन्होंने कहा, “ऐसे में परिवार पालना असंभव हो गया है।”

हाईकोर्ट में जनहित याचिका की तैयारी

संयुक्त मोर्चा ने घोषणा की कि 19 जनवरी को जबलपुर में सामूहिक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट के ‘समान काम-समान वेतन’ के आदेश को लागू कराया जा सके।
वासुदेव शर्मा ने बताया, “सरकार को ठेकेदारों से विशेष प्रेम है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रतिमाह तय किया जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली उम्मीद

मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के 19 अगस्त 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों से समान कार्य करवाना लेकिन कम वेतन देना ‘श्रमिक शोषण’ है। अदालत ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

20 वर्षों से बंद हैं नियमित भर्तियां

संयुक्त मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बीते दो दशकों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित भर्तियां नहीं हुईं। विभागीय कार्य इन्हीं अस्थायी कर्मियों से कराया जा रहा है, जिन्हें न वेतन का स्थायित्व है और न भविष्य की कोई सुरक्षा।

मुख्य मांगें

  • समान कार्य के लिए समान वेतन नीति का तत्काल क्रियान्वयन

  • सभी अस्थायी और आउटसोर्स कर्मियों को नियमित पदों पर समायोजन

  • न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रति माह किया जाए

  • ठेका और आउटसोर्स प्रथा समाप्त की जाए

  • बैंक मित्रों को सीधे बैंक से जोड़ा जाए

  • राजस्व सर्वेयरों को नियमित वेतन और रोजगार दर्जा दिया जाए

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12 Oct 2025 By दैनिक जागरण

भोपाल में ‘महाक्रांति रैली’: समान काम-समान वेतन की मांग पर एकजुट हुए आउटसोर्स कर्मचारी

Bhopal,M.P

 तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में इन कर्मचारियों ने “समान काम-समान वेतन” की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली, जिसे ‘महाक्रांति रैली’ नाम दिया गया।

न्याय और स्थायित्व की मांग

आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के बैनर तले आयोजित इस रैली में बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेयर और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हुए।
मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा, “यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि उन लाखों कर्मचारियों की आवाज है जो वर्षों से अस्थिर रोजगार और आर्थिक अन्याय झेल रहे हैं। सरकार को अब यह समझना होगा कि कर्मचारियों की मेहनत का सम्मान ही असली सुशासन है।”

ठेका प्रथा पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने पूरे सरकारी तंत्र को आउटसोर्स कंपनियों के हवाले कर दिया है। क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर स्थायी भर्तियां लगभग बंद हैं और इन्हें आउटसोर्स कंपनियों के जरिए भरा जा रहा है।
ग्राम पंचायतों में चौकीदारी करने वाले रामनिवास केवट ने बताया कि वह 25 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी ₹2000 मासिक वेतन पाते हैं। “कभी-कभी छह महीने तक तनख्वाह नहीं मिलती,” उन्होंने कहा, “ऐसे में परिवार पालना असंभव हो गया है।”

हाईकोर्ट में जनहित याचिका की तैयारी

संयुक्त मोर्चा ने घोषणा की कि 19 जनवरी को जबलपुर में सामूहिक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट के ‘समान काम-समान वेतन’ के आदेश को लागू कराया जा सके।
वासुदेव शर्मा ने बताया, “सरकार को ठेकेदारों से विशेष प्रेम है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रतिमाह तय किया जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली उम्मीद

मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के 19 अगस्त 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों से समान कार्य करवाना लेकिन कम वेतन देना ‘श्रमिक शोषण’ है। अदालत ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

20 वर्षों से बंद हैं नियमित भर्तियां

संयुक्त मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बीते दो दशकों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित भर्तियां नहीं हुईं। विभागीय कार्य इन्हीं अस्थायी कर्मियों से कराया जा रहा है, जिन्हें न वेतन का स्थायित्व है और न भविष्य की कोई सुरक्षा।

मुख्य मांगें

  • समान कार्य के लिए समान वेतन नीति का तत्काल क्रियान्वयन

  • सभी अस्थायी और आउटसोर्स कर्मियों को नियमित पदों पर समायोजन

  • न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रति माह किया जाए

  • ठेका और आउटसोर्स प्रथा समाप्त की जाए

  • बैंक मित्रों को सीधे बैंक से जोड़ा जाए

  • राजस्व सर्वेयरों को नियमित वेतन और रोजगार दर्जा दिया जाए

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