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रतलाम में असिस्टेंट कमांडेंट ने की आत्महत्या की कोशिश, 50 डिप्रेशन की गोलियां खाईं; अफसरों पर प्रताड़ना के आरोप
Ratlam, MP
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा स्थित 24वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट रामबाबू पाठक ने शुक्रवार को डिप्रेशन की 50 गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
उन्हें परिजनों द्वारा पहले स्थानीय क्लिनिक और फिर रतलाम मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया।
परिवार का आरोप—सीनियर अफसरों की प्रताड़ना बनी वजह
रामबाबू की बेटी मुस्कान और पत्नी ने आरोप लगाया है कि बटालियन में तैनात कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। उनका कहना है कि लंबे समय से रामबाबू डिप्रेशन का इलाज ले रहे थे और डॉक्टर ने भी ड्यूटी से आराम की सलाह दी थी, जिसे अफसरों ने नजरअंदाज किया।
बेटी मुस्कान के अनुसार, उनके पिता ने सुसाइड नोट भी लिखा था जिसमें उन्होंने कहा, "अब मैं नहीं काम करना चाहता, थक गया हूं।"
हर बार कहते थे—‘लाइफ खत्म कर लूंगा’
परिजनों ने बताया कि रामबाबू पिछले कई वर्षों से मानसिक रूप से परेशान थे और विभागीय दबाव के चलते कई बार आत्महत्या की बातें करते थे। 2020 से उनका मानसिक उपचार चल रहा था। पिछले एक सप्ताह से उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ गई थी।
बिना गलती के जांच, खराब की गई ACR
परिवार का आरोप है कि रामबाबू के खिलाफ 23वीं बटालियन में बिना किसी गलती के विभागीय जांच की गई थी, जिसमें बाद में उन्हें क्लीनचिट मिली। इसके बावजूद वर्तमान बटालियन में उन्हें फिर मानसिक रूप से परेशान किया गया। बेटी मुस्कान का दावा है कि जानबूझकर उनके तीन ACR खराब की गईं और कई वरिष्ठ अफसर लगातार उनके खिलाफ मानसिक दबाव बनाते रहे।
बड़े अफसर भी पहुंचे अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही रतलाम के एसपी अमित कुमार समेत अन्य अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। रामबाबू के साथ उनकी बेटी मुस्कान और परिजन एंबुलेंस से इंदौर रवाना हुए। उनका बेटा भी भोपाल से इंदौर के लिए रवाना हो गया है।
परिजनों ने कहा है कि यदि रामबाबू को कुछ हुआ, तो वे न्याय के लिए लड़ाई लड़ेंगे और दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।
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रतलाम में असिस्टेंट कमांडेंट ने की आत्महत्या की कोशिश, 50 डिप्रेशन की गोलियां खाईं; अफसरों पर प्रताड़ना के आरोप
Ratlam, MP
उन्हें परिजनों द्वारा पहले स्थानीय क्लिनिक और फिर रतलाम मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया।
परिवार का आरोप—सीनियर अफसरों की प्रताड़ना बनी वजह
रामबाबू की बेटी मुस्कान और पत्नी ने आरोप लगाया है कि बटालियन में तैनात कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। उनका कहना है कि लंबे समय से रामबाबू डिप्रेशन का इलाज ले रहे थे और डॉक्टर ने भी ड्यूटी से आराम की सलाह दी थी, जिसे अफसरों ने नजरअंदाज किया।
बेटी मुस्कान के अनुसार, उनके पिता ने सुसाइड नोट भी लिखा था जिसमें उन्होंने कहा, "अब मैं नहीं काम करना चाहता, थक गया हूं।"
हर बार कहते थे—‘लाइफ खत्म कर लूंगा’
परिजनों ने बताया कि रामबाबू पिछले कई वर्षों से मानसिक रूप से परेशान थे और विभागीय दबाव के चलते कई बार आत्महत्या की बातें करते थे। 2020 से उनका मानसिक उपचार चल रहा था। पिछले एक सप्ताह से उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ गई थी।
बिना गलती के जांच, खराब की गई ACR
परिवार का आरोप है कि रामबाबू के खिलाफ 23वीं बटालियन में बिना किसी गलती के विभागीय जांच की गई थी, जिसमें बाद में उन्हें क्लीनचिट मिली। इसके बावजूद वर्तमान बटालियन में उन्हें फिर मानसिक रूप से परेशान किया गया। बेटी मुस्कान का दावा है कि जानबूझकर उनके तीन ACR खराब की गईं और कई वरिष्ठ अफसर लगातार उनके खिलाफ मानसिक दबाव बनाते रहे।
बड़े अफसर भी पहुंचे अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही रतलाम के एसपी अमित कुमार समेत अन्य अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। रामबाबू के साथ उनकी बेटी मुस्कान और परिजन एंबुलेंस से इंदौर रवाना हुए। उनका बेटा भी भोपाल से इंदौर के लिए रवाना हो गया है।
परिजनों ने कहा है कि यदि रामबाबू को कुछ हुआ, तो वे न्याय के लिए लड़ाई लड़ेंगे और दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।
