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लॉस एंजिल्स जल उठा: अवैध प्रवासियों के समर्थन में हिंसक प्रदर्शन, अमेरिकी झंडे को जलाया, सैकड़ों गाड़ियों में आग
Jagran Desk
अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसा में तब्दील हो गया है। भारतीय समयानुसार रविवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने शहर की सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया। सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, पुलिस और प्रशासन की गाड़ियों पर हमला किया गया और अमेरिकी झंडे को जला कर विरोध जताया गया।
मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर बना टकराव का केंद्र
घटना की शुरुआत मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर के बाहर से हुई, जहां प्रदर्शनकारियों की भीड़ इकट्ठा थी। कुछ उपद्रवियों ने मेक्सिको का झंडा लहराते हुए "ICE लॉस एंजिल्स से बाहर जाओ" और "शेम" जैसे नारे लगाए। बाद में यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गया।
प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोल बम और पत्थर फेंके
रविवार सुबह से ही प्रदर्शन तेज होता गया। उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके, वहीं कई जगहों पर पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल किया गया। दंगाई कांच की बोतलों में पेट्रोल भरकर आग लगाने वाले हथियार तैयार करते देखे गए। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में तोड़फोड़ की और सरकारी इमारतों पर स्प्रे पेंट से नारे लिखे।
अमेरिकी झंडे पर थूका गया, फिर लगाई आग
उपद्रवियों ने सरेआम अमेरिकी झंडे का अपमान किया। पहले उस पर थूका गया, फिर उसमें आग लगा दी गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्रशासन ने तैनात किए 2000 नेशनल गार्ड्स
स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में 2000 नेशनल गार्ड्स को भेजा है। हालांकि, कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम और शहर की मेयर कैरेन बैस ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है, क्योंकि यह तैनाती राज्य की अनुमति के बिना की गई।
अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई बनी हिंसा की जड़
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 6-7 जून को अमेरिकी प्रशासन ने लॉस एंजिल्स में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ डिपोर्टेशन अभियान शुरू किया। ट्रम्प प्रशासन की इस सख्त नीति के विरोध में शहर में व्यापक प्रदर्शन शुरू हो गए, जो अब हिंसक हो चुके हैं।
100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल होने के आरोप में अब तक 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं और सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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Jagran Desk
मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर बना टकराव का केंद्र
घटना की शुरुआत मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर के बाहर से हुई, जहां प्रदर्शनकारियों की भीड़ इकट्ठा थी। कुछ उपद्रवियों ने मेक्सिको का झंडा लहराते हुए "ICE लॉस एंजिल्स से बाहर जाओ" और "शेम" जैसे नारे लगाए। बाद में यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गया।
प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोल बम और पत्थर फेंके
रविवार सुबह से ही प्रदर्शन तेज होता गया। उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके, वहीं कई जगहों पर पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल किया गया। दंगाई कांच की बोतलों में पेट्रोल भरकर आग लगाने वाले हथियार तैयार करते देखे गए। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में तोड़फोड़ की और सरकारी इमारतों पर स्प्रे पेंट से नारे लिखे।
अमेरिकी झंडे पर थूका गया, फिर लगाई आग
उपद्रवियों ने सरेआम अमेरिकी झंडे का अपमान किया। पहले उस पर थूका गया, फिर उसमें आग लगा दी गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्रशासन ने तैनात किए 2000 नेशनल गार्ड्स
स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लॉस एंजिल्स में 2000 नेशनल गार्ड्स को भेजा है। हालांकि, कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम और शहर की मेयर कैरेन बैस ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है, क्योंकि यह तैनाती राज्य की अनुमति के बिना की गई।
अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई बनी हिंसा की जड़
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 6-7 जून को अमेरिकी प्रशासन ने लॉस एंजिल्स में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ डिपोर्टेशन अभियान शुरू किया। ट्रम्प प्रशासन की इस सख्त नीति के विरोध में शहर में व्यापक प्रदर्शन शुरू हो गए, जो अब हिंसक हो चुके हैं।
100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल होने के आरोप में अब तक 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं और सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
